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कुर्सी का दांव: दावेदारों से मंत्री संकट में, गड़बड़ाने लगे सियासी तालमेल

-मामला रेलवे संगठनों के मंडल अध्यक्ष पद की आगामी नियुक्ति का।
-पद की दौड़ में बढ़ने लगी दावेदारी, महामंत्री से संपर्क में जुटे।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे ट्रेड यूनियनों में आगामी मंडल अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर दावेदारों की बढ़ती खींचतान अब जोर आजमाईश में उतर आई है। इससे संगठनों का प्रबंधकीय तालमेल गड़बड़ाने लगा है। संगठनों की परेशानी यह भी है कि दोनों ओर दावेदारों की संख्या में हर पखवाड़े इजाफ़ा होने लगा है। यह दावेदारी सीधे केंद्रीय पदाधिकारी के समक्ष जताई जाने लगी है।
आंतरिक सूचनाओं के मुताबिक हर दावेदार अपनी ताजा ज़मीनी पकड़, संगठन से बेहतर तालमेल तथा कर्मचारियों के बीच स्वच्छ छबि होने का दंभ भर रहा है। दूसरी ओर मंडल मंत्रियों के लिए वर्तमान पदाधिकारियों में तालमेल बिठाना माथापच्ची साबित हो रहा है। ब्रांच पदाधिकारी के आपसी गिले शिकवे इन मंडल मंत्रियों के सिर की सलवटें बढ़ा रहे है।

नई दावेदारी में वरिष्ठता का हवाला

इधर, दावेदारी की बात की जाए तो वेस्टर्न रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन में युवा नेता की छबि वाले सहायक मंडल मंत्री नरेंद्र सोलंकी, चीफ वेलफेयर इस्पेक्टर व वरिष्ठता का दंभ भरने वाले हरीश चांदवानी, कोषाध्यक्ष शैलेष तिवारी शामिल है। वही नई दावेदारी में सीनियर इंस्टीट्यूट सचिव व मीडिया प्रवक्ता अशोक तिवारी भी शामिल हो गए है।
दूसरी ओर वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ में अध्यक्ष की दावेदारी में उज्जैन से चैतन्य चौधरी, दाहोद से सचिन मिश्रा के अलावा वर्तमान में मंडल मंत्री के साथ कदमताल कर रहे प्रताप गिरी पहले हो दावेदारी पेश कर चुके है। इस दौड़ में अब सहायक मंडल मंत्री दीपक भारद्वाज भी दावेदारी ठोक रहे है। भारद्वाज का तर्क है कि वे संगठन में सर्वाधिक वरिष्ठ सहायक मंडल मंत्री है। उनके रिटायरमेंट का समय भी 15 माह ही बचा है। ऐसे में उन्हें मंडल अध्यक्ष नियुक्त कर वर्तमान संगठन का संकट टाल सकता है।

महामंत्री पर टिकी दावेदारों की निगाहें

अध्यक्ष पद के लिए अगले दो माह यानी जून व जुलाई में दोनों संगठनों पर लगभग नियुक्ति हो जाएगी। कुछ दावेदार अभी से मंडल मंत्रियों के करीब रहते हुए खुद को विश्वसनीय जता रहे तो कुछ दावेदार मंड़ल मंत्रियों को असहाय मानते सीधे महामंत्री को अपने पक्ष में राजी करने की जुगत में लग गए है।
हालांकि सभी केवल अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे है। मगर वह दूसरे को यह कहते दिखाई दे रहे कि यदि संगठन तुम्हें अध्यक्ष बनाता है तो वह खुद की दावेदारी छोड़ देंगे। लेकिन तीसरा कोई मंडल अध्यक्ष नही बनाना चाहिए।

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