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CCCTS पदोन्नति: चयन प्रक्रिया से लेकर अंतिम सूची तक गड़बड़झाला….सूची में बरती गई भारी अनियमितताएं: पक्षपात, नियमों की अनदेखी और रेल राजस्व को चूना

न्यूज़ जंक्शन-18
​रतलाम। भारतीय रेलवे के रतलाम मंडल में वाणिज्य विभाग के अंतर्गत हाल ही में जारी की गई सीसीटीसी (CCCTS – ग्रेड पे 4200) की पदोन्नति सूची को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। चयन से लेकर अंतिम सूची तक की पूरी प्रक्रिया में रेलवे बोर्ड के स्थापित नियमों, स्थानांतरण नीति और आरक्षित वर्ग के हितों को दरकिनार करने के आरोप है। केवल चुनिंदा लोगों को फायदा पहुँचाने के स्पष्ट संकेत हैं। इन फैसलों से जहाँ एक ओर रेल राजस्व की भारी बर्बादी होगी। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

बता दें कि परीक्षा के बाद करीब ढाई माह तक सूची अटकाए रखी गई। बाद में सूची जारी किए जाने के बाद दोबारा फेरबदल किया गया। अब अंतिम सूची को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे है।

प्रशासनिक मिलीभगत और चुप्पी पर सवाल:- इन सभी मामलों से यह साफ जाहिर होता है कि रेलवे बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर प्रशासनिक पदों का दुरुपयोग किया जा रहा है। एक तरफ भारतीय करदाताओं के गाढ़े पसीने की कमाई को स्थानांतरण भत्ते के नाम पर पानी की तरह बहाया जा रहा है। दूसरी तरफ सोची-समझी रणनीति के तहत एससी/एसटी वर्ग के कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की बात कही जा रही है।
​इन तमाम गंभीर अनियमितताओं और जातिगत भेदभाव के खिलाफ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन द्वारा प्रशासन को पत्र लिखा जा चुका है। इसके साथ ही, इस सूची में हुई धांधलियों और मनमानी के विरुद्ध राष्ट्रीय दलित महासंघ के राष्ट्रीय सचिव द्वारा देश के रेल मंत्री एवं अनुसूचित जाति आयोग को औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई गई है। ऐसी अनियमितताओं के लिहाज से आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों द्वारा चुटकियां ली जा रही है। कहा जा रहा है कि इस वर्ग के साथ इस खुले अन्याय और उत्पीड़न पर ‘वर्मा एसोसिएशन’ की चुप्पी है। ऐसी धांधलियां कई बड़े सवाल खड़े करती है। बल्कि अनियमितता की लंबी फेहरिस्त है।

चहेतों को उपकृत करने के लिए सीनियरिटी और नियमों का उल्लंघन: सूची में कुछ खास कर्मचारियों को उनकी मनपसंद जगह पर पदोन्नत करने के लिए वरिष्ठता क्रम की पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई गई हैं। ‘बेस्ट एमोंग द फेल्योर’ श्रेणी में पास हुए नानक सिंह को उज्जैन में टीसी के रूप में पदस्थापित करने के लिए, जनरल सीनियरिटी में पास उज्जैन के सबसे वरिष्ठ कर्मचारी दीपेन्द्र कुमार का रतलाम स्थानांतरण कर दिया गया। वहीं, रतलाम से जनरल सीनियरिटी में पास सिंगल मदर श्रीमती तृप्ति चौहान को नागदा भेज दिया गया। इस गैर-जरूरी उठापटक के कारण दो-दो कर्मचारियों को भारी-भरकम स्थानांतरण भत्ता देना पड़ेगा। जबकि उज्जैन और रतलाम में पहले से ही पद रिक्त थे। सिंगल मदर के संबंध में रेलवे बोर्ड के विशेष दिशा-निर्देश भी मौजूद हैं।

आरक्षित वर्ग (SC/ST) के नियमों की अनदेखी: रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश (RBE No. 89/2018) के तहत एससी/एसटी कर्मचारियों को उनकी पदोन्नति के दौरान यथासंभव उनके वर्तमान कार्यस्थल या आसपास ही पदोन्नत किए जाने का नियम है। इसके विपरीत, उज्जैन के अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी राम अवतार को तराना में पदोन्नति दी गई, जबकि उज्जैन में ही पद खाली थे। उनके कनिष्ठ कर्मचारियों को उज्जैन में ही रोक लिया गया। ऐसा ही मामला उज्जैन के उदय सिंह ठाकुर और रतलाम की अनुसूचित जाति वर्ग की कर्मचारी श्रीमती मीरा कैथवास के साथ भी हुआ। जिन्हें रतलाम से जावरा भेज दिया गया। इन सभी मामलों में नियमों की अनदेखी से जहाँ एक ओर रेल राजस्व को अनावश्यक रूप से दोतरफा स्थानांतरण भत्ते का नुकसान हुआ है। वहीं दूसरी ओर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्रताड़ित करने की मानसिकता साफ झलकती है।

दंपति नीति और आरक्षित नियमों का दोहरा उल्लंघन: अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाली कर्मचारी श्रीमती प्रिया लोठ और उनके पति श्री अभिषेक करोसिया दोनों ही रेलवे के वाणिज्य विभाग में रतलाम के गुड्स कार्यालय में पदस्थ हैं। इसके बावजूद, नियमानुसार पति-पत्नी को एक ही स्थान पर रखने के बोर्ड के आदेश (RBE No. 63/2026) तथा एससी/एसटी के दिशा-निर्देशों को ताक पर रख दिया गया है। उन्हें जावरा स्टेशन पर पदोन्नत कर दिया गया। जबकि रतलाम में पर्याप्त रिक्तियां थी। उनके कई कनिष्ठों को रतलाम में ही रखा गया था।

दूरी और प्रशासनिक जिद की हदें: इंदौर के अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी अनिल जारवाल को उनके कार्यस्थल से लगभग 350 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ में पदोन्नत कर दिया गया। जबकि इंदौर के आसपास ही कई पद रिक्त थे। नीमच के कर्मचारी भूपेंद्र सिंह को चित्तौड़गढ़ आसानी से भेजा जा सकता था। जिन्हें बड़नगर कर दिया गया। इसी प्रकार, इंदौर के सोनू राठौर और मंडल कार्यालय रतलाम की अनुष्का सक्सेना के बीच ‘क्रॉस ट्रांसफर’ कराकर बिना किसी तार्किक कारण के रेल खजाने पर अनुचित आर्थिक बोझ डाला गया।

कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़: भोपाल मंडल से पारस्परिक स्थानांतरण पर रतलाम मंडल आए नागेश्वर सोलंकी को इस परीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें परीक्षा से वंचित रखने के लिए पूरी तरह मनमाना रवैया अपनाया गया। उनकी वाजिब गुहार को नजरअंदाज कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास किया गया है।

चयन प्रकिया भी घेरे में:- CCCTS – ग्रेड पे 4200 पदोन्नति के लिए 02.03.2026 को चयन की अधिसूचना जारी की गई। लिखित परीक्षा दिनांक 10.05.2026 को आयोजित की गई। जिसमें कुल 126 कर्मचारियों ने भाग लिया तथा उनमें से 77 कर्मचारियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया। इसके पश्चात 15.09.2026 को 69 कर्मचारियों का पैनल जारी किया गया। जिसे बाद में डीआरएम द्वारा 29.09.2026 को संशोधित कर दिया गया।

उक्त संपूर्ण चयन प्रक्रिया गंभीर अनियमितताओं एवं संदेहों के घेरे में है। प्रारंभ में चयन संबंधी अधिसूचना गलत तरीके से जारी की गई तथा आवेदन आमंत्रित किए गए। बाद में उक्त अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया। इसके पश्चात लिखित परीक्षा का परिणाम ओएमआर (OMR) शीटों का विधिवत मूल्यांकन अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से कराए बिना ही जारी कर दिया गया।

पैनल तैयार करते समय वरिष्ठ कर्मचारियों को छोड़ दिया गया। जबकि कुछ ऐसे कर्मचारियों को गलत वरिष्ठता के आधार पर पैनल में स्थान दिया गया। जो अपनी वरिष्ठता के आधार पर पैनल में शामिल होने के पात्र नहीं थे। इसके अतिरिक्त, असफल अभ्यर्थियों में से नियमानुसार सर्वश्रेष्ठ अभ्यर्थियों पर विचार करने की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई।

जब इन अनियमितताओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया। तब मंडल रेल प्रबंधक द्वारा पूर्व पैनल में संशोधन कर पुनः नया पैनल तैयार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में RBE No. 192/2019 के प्रावधानों का उल्लंघन किए जाने का आरोप है। पैनल में संशोधन करते समय संबंधित कर्मचारियों को कोई नोटिस भी जारी नहीं किया गया, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

इसके अतिरिक्त, पदस्थापना आदेश जारी करते समय वरिष्ठ कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया गया। जबकि कनिष्ठ कर्मचारियों को उसी स्थान पर पदोन्नत कर दिया गया। यह कार्रवाई स्थापित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन की ओर संकेत करती है। साथ ही, RBE No. 89/2018 के प्रावधानों का उल्लंघन किए जाने से आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के अधिकार भी प्रभावित हुए हैं।

आश्चर्यजनक बात यह है कि मंडल स्तर के संबंधित अधिकारियों को इन नियमों के उल्लंघनों की जानकारी है। बावजूद दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टा उन्हें संरक्षण दिए जाने की आशंका जताई जा रही है। जबकि 23.10.2026 को मंडल के दौरे पर आए मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) द्वारा मूल्यांकन प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं की ओर मंडल के अधिकारियों का ध्यान भी आकर्षित कराया गया था।

इस प्रकार की गंभीर अनियमितताओं के प्रति प्रशासन की निष्क्रियता अत्यंत चिंताजनक है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं की जाती है। तब मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी सक्षम जांच एजेंसी को सौंपे जाने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

मामले में रेल संगठन द्वारा अपेक्षा की है कि संपूर्ण चयन प्रक्रिया, ओएमआर शीटों के मूल्यांकन, पैनल निर्माण एवं संशोधन, वरिष्ठता निर्धारण, पदस्थापना आदेशों तथा आरक्षण संबंधी प्रावधानों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। यदि प्रशासन इन गंभीर अनियमितताओं पर अंकुश लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की आवश्यकता होगी।

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