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महानिर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर ने बोली बड़ी बात….’शास्त्र’ ज्ञान का प्रतीक, ‘शस्त्र’ सुरक्षा का माध्यम, धर्म और समाज पर संकट उबारने संतों और समाज रक्षकों ने शस्त्र भी उठाए

न्यूज़ जंक्शन-18

​ रतलाम। सनातन संस्कृति में ‘शास्त्र’ ज्ञान का प्रतीक है, तो ‘शस्त्र’ सुरक्षा का माध्यम। इतिहास गवाह है कि जब-जब धर्म और समाज पर संकट आया। तब-तब संतों और समाज के रक्षकों ने रक्षात्मक संकल्प के साथ शस्त्र भी उठाए हैं।

यह विचार महानिर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामीश्री विशोकानंद भारती जी महाराज ने रविवार को रतलाम स्थित अखंड ज्ञान आश्रम में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान व्यक्त किए।

​त्रेता, द्वापर और कलयुग के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि द्वापर युग के बाद जब देश में विभिन्न वैचारिक मतभेद बढ़ गए थे। वैदिक परंपराएं कमजोर पड़ने लगी थीं, तब आदि शंकराचार्य का प्राकट्य हुआ। उन्होंने सनातन धर्म का पुनरुत्थान कर पूरे भारतवर्ष को एक सूत्र में पिरोया।

धर्म और समाज की रक्षा के लिए उठते रहे हैं शस्त्र:- स्वामी जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रतलाम की पवित्र धरा पर धर्म की अपार महिमा रही है। लेकिन वर्तमान दौर में सनातन धर्म के आदर्शों का कमजोर होना बेहद चिंताजनक है। नागा साधुओं और अखाड़ों के इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी अधर्म बढ़ता है या आध्यात्मिक स्तंभों पर संकट आता है। समाज की रक्षा के लिए कदम उठाना हमारा कर्तव्य बन जाता है।

युवाओं के लिए नैतिक संस्कार और गौ-सेवा जरूरी:- स्वामी जी ने कहा कि बिना संस्कारों के कोई भी समाज या राष्ट्र सशक्त नहीं बन सकता। आज के युवाओं को धर्म, अध्यात्म और नैतिक मूल्यों की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन परंपरा में ब्राह्मण परंपरा, गौ-माता का संरक्षण और देवताओं का सम्मान आधार स्तंभ हैं। ईश्वर की दृष्टि में सभी समान हैं, क्योंकि हम सब प्रभु की ही संतान हैं।

धार्मिक संगठनों के कार्यों की सराहना, अयोध्या मामले पर प्रतिक्रिया:- प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और दुर्गावाहिनी के सामाजिक व धार्मिक कार्यों की सराहना की। अयोध्या श्रीराम मंदिर के चंदा चोरी मामले से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी जी ने कहा कि जो भी हुआ वह गलत है। वहां पारदर्शी व सुदृढ़ व्यवस्था होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

​अंत में स्वामी जी ने सनातन समाज से अपनी जड़ों की ओर लौटने, देव-स्थानों की मर्यादा बनाए रखने और गौ-सेवा व धर्म-रक्षा का संकल्प लेने की अपील की। इस अवसर पर अखंड ज्ञान आश्रम के स्वामी देवस्वरूपानंदजी महाराज सहित अन्य संतजन, अनिल झालानी, जनक नागल एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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