रेल टिकिट काउंटर पर भ्रष्टाचार की बुकिंग…? NIT के खेल से रेलवे को चपत, रोस्टर और ड्यूटी में भी घोर मनमानी
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम जंक्शन से ट्रेनों में सफर करने के लिए टिकिट ख़रीदी का बुकिंग कार्यालय इन दिनों गुप्त भ्रष्टाचार व घोर अनियमितता का केंद्र बन गया है। ‘नॉन इशू टिकट’ (NIT) की आड़ में रेलवे के राजस्व को हर दिन हजारों रुपए का चूना लगाने का खेल चल रहा है। इस दबे छिपे भ्रष्टाचार संज्ञान में नहीं लेने पर विभागीय अधिकारियों और प्रभारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हैरत की बात है कि दैनिक आधार पर निकलने वाली NIT रजिस्टर की प्रविष्टियां और वाणिज्य निरीक्षक के नियमित निरीक्षण के बावजूद यह खेल बेधड़क जारी है। हालांकि दो दिन पहले इंचार्ज ने इस खेल को पकड़ा भी। लेकिन मामला कार्रवाई तक नहीं ले जाया गया।
दरअसल आश्चर्य यह है कि रतलाम स्टेशन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण जंक्शन पर दो-दो बुकिंग प्रभारी की तैनाती है। इसके बावजूद इस तरह की धांधली होना प्रशासनिक ढिलाई है। बल्कि संभावित साठगांठ भी दर्शा रही है।
कुछ साफगोई ड्यूटी व्यवस्था में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि यदि वाणिज्य विभाग के उच्च अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम को संज्ञान में लें। डेली रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच कराएं तो भ्रष्टाचार के नायब ‘सिंडिकेट खेल’ को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
NIT का ‘मास्टर खेल’: ऐसे लगाया जा रहा है रेलवे को चूना:- रेल टिकिटों को जारी करते वक्त सिस्टम में तकनीकी खराबी या गलती सुधारने के लिए रेलवे द्वारा ‘नॉन इशू टिकट’ (NIT) के विकल्प का ऑप्शन रहता है। प्रिंट के दौरान त्रुटि होने पर टिकिट को उसी वक्त निरस्त किया जा सकता है। विंडो के क्लर्क इसका इस्तेमाल अब फर्जीवाड़े के लिए करने लगे है। एक कर्मचारी ने तो इसमें महारत हासिल की तो इसकी भनक इंचार्ज को लगी भी है। लेकिन मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
इस तरह होता है फर्जीवाड़े का खेल:-
ब्लैंक प्रिंटिंग: टिकट रोल के नंबर (उदाहरण 88661) पर प्रिंटर की रिबन हटाकर सिस्टम में 10 रुपए का प्लेटफॉर्म टिकट जारी किया जाता है। इससे सिस्टम में 10 रुपए दर्ज होते हैं। लेकिन भौतिक रूप से टिकट सादा (खाली) ही रहता है।
– कीमती टिकट की छपाई: इसके बाद उसी टिकट (88661) पर रिबन लगाकर 200 रुपए (उदाहरण मुंबई) का टिकट छाप दिया जाता है।
– सिस्टम का फर्जीवाड़ा: सिस्टम के हिसाब से यह 200 रुपए का टिकट अगले नंबर (88662) पर छपा दिखता है। जबकि वास्तव में 88662 नंबर का टिकट ब्लैंक रह जाता है।
– NIT में हेरफेर: अगले नंबर (88663) को ‘प्रिंटिंग एरर’ बताकर सिस्टम में NIT (नॉन इशू) दर्ज कर दिया जाता है। इसके बाद ब्लैंक टिकट और NIT का बहाना बनाकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर लिया जाता है। अंतर की राशि कर्मचारी की जेब में चली जाती है।
रोस्टर में फिक्सिंग का खेल भी: मनपसंद को विशेष शिफ्ट और पक्के काउंटर:- बुकिंग कार्यालय में आर्थिक धांधली के अलावा ड्यूटी को लेकर भी अनियमितता की बात सामने आई है। कुछ कर्मचारी बताते है कि प्रभारियों द्वारा कुछ खास कर्मचारियों पर ‘विशेष कृपा’ बरसाई जा रही है। रोस्टर नियमों को ताक पर रखकर इन्हें लगातार एक ही शिफ्ट और एक ही काउंटर पर तैनात किया जा रहा है। इसे लेकर बुकिंग ऑफिस में विरोध पनपने लगा है। (ड्यूटी घंटे को रेलवे समय से समझे)
बता दें कि ड्यूटी के अनियमितता के चलते ही सीनियर डीसीएम हिना केवलरामानी ने इंदौर स्टेशन पर कार्यरत विंडो क्लर्क को नौकरी से बर्खास्तगी की कार्रवाई की है।
– विंडो नंबर 8 (मुख्य बुकिंग ऑफिस): विभागीय सूत्रों के मुताबिक विंडो क्लर्क कर्मचारी कुमारी दीपिका को लगातार सुबह 06:00 से 14:00 बजे की शिफ्ट में ही ड्यूटी दी जा रही है। वरिष्ठता का हवाला देकर अन्य काउंटर या शिफ्ट (14:00-22:00 या 22:00-06:00) में काम करने से साफ इंकार किया जाता है। सवाल यह है कि यदि वरिष्ठता के आधार पर अपर विंडो (एमआर सहित तमाम रेलवे फीस जमा करने जैसे अन्य हल्के काम) दी जा रही है। सवाल है कि नाइट शिफ्ट या दोपहर की शिफ्ट में ड्यूटी क्यों नहीं लगाई जाती?
– प्लेटफॉर्म नंबर 07: विंडो क्लर्क तृप्ति चौहान को 05:00 से 13:00 बजे के रोस्टर में लगातार फिक्स रखा गया है।
– प्लेटफॉर्म नंबर 02: विंडो नंबर 2 पर क्लर्क श्रीमती मधुबाला पाटीदार (05:30 से 13:30) और विंडो नंबर 3 पर क्लर्क अरविंद सक्सेना (05:00 से 13:00) की ड्यूटी लंबे समय से निश्चित चल रही है।
ड्यूटी के दौरान गायब रहने की भी ‘जुगलबंदी’:- प्लेटफॉर्म नंबर 02 स्थित बुकिंग ऑफिस में कर्मचारियों के काम के दौरान गायब रहने का सिलसिला नियमित जारी है। सुबह 07:30 बजे के करीब महिला क्लर्क काउंटर छोड़कर घर चली जाती है। लगभग एक घंटे बाद लौटती हैं।
उनके वापस आने के बाद, सुबह 10:30 बजे पुरूष क्लर्क काउंटर छोड़कर निकल जाता है। दोपहर 12:00 बजे के आसपास लौटता हैं।
कर्मचारियों के मुताबिक ड्यूटी घंटे के दौरान कर्मचारियों की इस आपसी ‘जुगलबंदी’ और गैर-हाजिरी की पुष्टि बुकिंग कार्यालय की हाजरी रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच से आसानी से की जा सकती है।
