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​’कवच’ की सुरक्षा पर लापरवाही का पहरा: नियमों को ताक पर रखकर बिछाई जा रही केबल, ऐसी चेंबर में बैठकर अफ़सर कर रहे निगरानी

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। भारतीय रेलवे में यात्रियों के सुरक्षित सफर और ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर रोकने के लिए ‘कवच’ प्रणाली को अत्यंत कारगर बताया जा रहा है। लेकिन रतलाम रेल मंडल में इस अति-महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली को स्थापित करने में बड़ी कोताही और लापरवाही का मामला सामने आ रहा है। एचबीएल कंपनी द्वारा किए जा रहे काम में रेलवे की संबंधित विभाग एजेंसी पर निगरानी का जिम्मा है। लेकिन रतलाम से चंदेरिया सेक्शन के बीच की चल रहे केबलिंग के काम की न्यूज़ जंक्शन-18 को प्राप्त हुई तस्वीरें लापरवाही की कहानी साफ बयां कर रही है। केबलिंग के लिए जमीन की ख़ुदाई बेहद ही अपर्याप्त है। हल्की बारिश में आसानी से बाहर आ सकती है।

आगामी दिनों में कवच सिस्टम स्थापित हो जाएगा। एजेंसी को भुगतान भी कर दिया जाएगा। अधिकारी भी तबादला होकर चले जाएंगे। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के दावे लंबे समय तक कायम रह सकेंगे। यह कहना बेहद ही मुश्किल है।

​नियमों को ताक पर रखकर बिछ रही केबल, मॉनिटरिंग पर सवाल:- ​रतलाम से चंदेरिया स्टेशन के बीच 212 किमी दूरी तक वर्तमान में कवच सिस्टम लगाने का काम जारी है। सुरक्षा मानकों के अनुसार केबल बिछाने के लिए कम से कम 1 मीटर गहरा गड्ढा खोदा जाना बेहद ही अनिवार्य है। हालांकि, धरातल पर एजेंसी द्वारा नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। कार्यस्थल से सामने आई तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि गड्ढे आधा मीटर गहरे भी नहीं हैं। कई जगहों पर तो केबल के पॉइंट्स सीधे सतह पर ही दिखाई दे रहे हैं।
​बताया जा रहा है कि इस कार्य की निगरानी के लिए रेलवे के इंजीनियरों की मॉनिटरिंग तय की गई है। लेकिन जिस प्रकार सतही स्तर पर काम निपटाया जा रहा है। उससे स्पष्ट है कि जिम्मेदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग का घोर अभाव है।
बता दें कि सेक्शन में एसएससी सिग्नल वर्क्स रूपेश राठौर पर इसकी निगरानी का जिम्मा है।


मामले में डिप्टी सीएसटीई वर्क्स अभिषेक मिश्रा का कहना है कि कवच के काम मे लापरवाही बर्दाश्त नहीं है। रेलवे द्वारा निगरानी की जा रही हैं। यदि केबलिंग के लिए खोदे गए गड्ढे की गहराई कम है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।

रतलाम मंडल में कवच का मौजूदा स्टेटस
एक्टिव सेक्शन: रतलाम मंडल के नागदा से गोधरा सेक्शन के 224 रूट किलोमीटर में कवच सिस्टम को सफलतापूर्वक एक्टिव किया जा चुका है।

इंजनों में इंस्टॉलेशन: रतलाम स्थित लोकोमोटिव केयर सेंटर (डीजल शेड) में कुल 96 रेल इंजनों (लोको) में ‘कवच’ लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह उपलब्धि: 96 में से अब तक 68 इंजनों में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। जिसमें 7 पैसेंजर लोको और 61 गुड्स (मालगाड़ी) लोको शामिल है।

‘कवच’ की प्रमुख विशेषताएं और लाभ

स्वचालित ब्रेक लगाना: यदि लोको पायलट निर्धारित गति सीमा का पालन करने में असमर्थ रहता है या गलती से लाल (रेड) सिग्नल पार करता है, तो कवच तुरंत अपने आप ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है।

टक्कर से बचाव: यह आधुनिक तकनीक आमने-सामने और पीछे से होने वाली ट्रेनों की भिड़ंत को रोकने में पूरी तरह सक्षम है।

खराब मौसम में मददगार: घना कोहरा या कम दृश्यता वाले मौसम में भी यह सिस्टम लोको पायलट को सही जानकारी देकर सुरक्षित रेल संचालन में मदद करता है।

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