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मैं और मेरी रचना

लेखन संसार;-

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मूरख और इडियट

मालवो म्हारो
है घणो प्यारो I
डग -डग नीर
पग-पग रोटी I
या वात वइगी
अब खोटी I
यां नी है मुरखां को टोटो I
यां को खांपो भी है
मगज में मोटो I
थ्री -इडियट सनिमो आयो
यां का खांपा,
मूरख अणे टेपा के भायो I
कदी कालिदास जिन्दो वेतो ,
तो ऊ घणो खुस वेतो I
जो मगज से काम नी करे ,
वुज मनक नयो कमाल करे I
अणि ती खंपाओ को
मान जागेगा,
खांपा, मुरख और टेपा
मालवा का नाम रोशन करेगा I
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-संजय जोशी “सजग”
78 गुलमोहर कॉलोनी रतलाम (म.प्र.)।

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लघुकथा

गणित रोजी का

जिस विषय को सारे बच्चे घबराते है ।उसे सिखाने के लिए नई शिक्षिका आई रोजी । थोड़ी ज्यादा उम्र की है ।पर दो चार दिनों में ही रोजी मैडम के कक्षा में सब बच्चे खुशी से बैठने लगे । इससे पहले गणित की कक्षा से हमेशा जोर जोर से डांटने की आवाजे आती ।लेकिन रोजी मैडम सब की चहेती हो गई ।एक दिन रोजी को एक नई कक्षा दी ।वह छठी की कक्षा थी ।बच्चे बहुत शैतान थे । कक्षा में पीछे प्रधानाध्यापिका भी आ गई । बच्चों को पता नहीं चला ।
आते ही रोजी ने बोलना शुरू किया ।देखो बच्चों गणित कोई पढ़ाई नहीं होती। बिलकुल घबराने की जरूरत नहीं है। मैं क्या पढ़ाऊं ? आप सबको मुझसे ज्यादा गणित आता है। गणित तो रोजमर्रा की बात है। पढ़ाई है ही कहां?
बच्चे सुनते ही सोचने लगे। ये क्या कह रही है मैडम। एक बच्चा उठकर पूछने लगा, फिर क्या करना होगा? रोजी बोली देखो रोज हमे कुछ न कुछ लाना होता है। पेंसिल, चॉकलेट, कॉपी है न।जैसे आप दस रुपए ले गए, एक चॉकलेट लाई तो कितने की आई ।वह बच्चा बोला पांच रुपए की और पांच रुपए वापस। रोजी बोली तालियां बजाओ ।देखो इसने तो मूंह जबानी ही गणित कर लिया। आप सबको भी उत्तर सही लगा। है की नहीं गणित आसान ?ये पढ़ाई है क्या ?बच्चे बोले नहीं ——– अब रोजी तालियां बजा रही थी।

-अर्चना पंडित
इन्दौर (मप्र)।

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