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सिख गुरुओं की वीरता व शहादत का बखान….विद्यार्थियों को अवगत कराया, गुरनाम बोले-सिखों का इतिहास वीरता व शहादतभरा

-श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति द्वारा विद्यालयों में वीर बाल दिवस मनाया गया।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। श्री गुरु तेग बहादुर शैक्षणिक विकास समिति द्वारा नगर में संचालित विभिन्न विद्यालयों में वीर बाल दिवस मनाया गया। इसमें सिख गुरुओं की वीरता एवं बलिदान के बारे में बच्चों को अवगत कराया गया। विद्यार्थी यह सुनकर हतप्रभ व चकित होते दिखाई दिए।
समिति प्रवक्ता सरदार सुरेंद्र सिंह भामरा ने बताया कि इस अवसर पर श्री गुरू तेगबहादुर पब्लिक स्कूल न्यू रोड, शास्त्री नगर में विभिन्न आयोजन संपन्न हुए। न्यू रोड व शास्त्री नगर स्थित विद्यालय में साहिबजादो, माता गुजरी एवं सिखों की शहादत दर्शाने वाली प्रदर्शनी तथा आयोजन हुए। वहीं शास्त्री नगर स्थित विद्यालय में भी सिख गुरुओं की वीरता व शहादत से बच्चों को अवगत करवाने के लिए विभिन्न आयोजन हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समिति अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह ने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि सिखों का इतिहास वीरता व शहादत के लिए जाना जाता है। उन्होंने कभी भी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की तथा अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया। सिखों ने हिंदु धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान दे दिया। नवें गुरु तेग बहादुर जी द्वारा हिन्दुस्तान की मुगलों के आक्रमण से की गई रक्षा के कारण हिंद की चादर कहा जाता है। सिखो के दसवे गुरु गोविंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। जिसके कारण उन्हें सरवंशदानी कहा जाता है।


जब कश्मीर में कश्मीरी पंडितों पर मुगलों ने आक्रमण कर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया तो सबसे पहले सिखों ने कश्मीरी पंडितों की रक्षा की।
गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्रों ने सहर्ष शहादत दे दी किंतु मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की तथा न हीं अपना धर्म परिवर्तन किया । जिस तरह से 7 वर्ष और 9 वर्ष के छोटे साहिबज़ादे बाबा जोरावर सिंह जी बाबा फतेह सिंह जी को यातनाएं देकर शहीद किया। वह सुनकर आज भी रूह कांप जाती हैl इस अवसर पर समिति ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले बच्चों को सम्मानित भी किया।उपाध्यक्ष हरजीत चावला, सचिव अजीत छाबड़ा, कोषाध्यक्ष देवेंद्र सिंह वाधवा, प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह भामरा, समिति सदस्य सतपाल सिंह डंग, धर्मेंद्र गुरु दत्ता सहित समाजजन प्राचार्य मेघा वैष्णव, प्रधान अध्यापिका सरला माहेश्वरी, इंचार्ज मनीषा ठक्कर, शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे। बच्चों को शहीद भाई मोती महरा की स्मृति में दूध का प्रसाद भी वितरित किया गया।

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