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मिस्‍टर नटवरलाल रेलकर्मी…भाई का चार साल पहले निधन, विभाग को सूचना नहीं दी, छोटा भाई नौकरी कर उठाता रहा पगार, रिटायमेंट की कार्रवाई में धराया

-रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग का मामला, बीट इंचार्ज वेलफेयर इंस्‍पेक्‍टर ने रेलवे ट्रैकमैन का पकड़ा मामला
न्‍यूज जंक्‍शन-18
रतलाम। रेलवे में मृत भाई के जगह बगैर अनुकंपा प्रकिया के छोटे भाई द्वारा नौकरी कर हर माह पगार लेने का हैरतंगेज मामला सामने आया है।इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत ट्रैकमैन की चार साल पहले मौत के बाद छोटा भाई स्‍वयं कर्मचारी बनकर हर माह पगार उठाता रहा। कर्मचारी का दिसंबर 2024 में रिटायरमेंट होना है। इसके दस्‍तावेजी कार्रवाई में बीट इंचार्ज वेल्‍फेयर इंस्‍पेक्‍टर ने इस मामले को पकड़ा। इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दी तो अधिकारियों में भी खलबली मच गई। मामला डीआरएम के संज्ञान में दिया गया। इसके बाद बैंक खाता सीज किया गया। 26 नवंबर 2024 को जारी आदेश में विभाग द्वारा कर्मचारी को निलंबित किया गया। बल्कि रेलवे द्वारा पुलिस कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। मामले में मृत रेलकर्मी की सूचना को लेकर इसके नजदीकी फील्‍ड अधिकारी सहित अन्‍य जांच के घेरे में है।
यह मामला रतलाम रेल मंडल के पालिया-लक्ष्‍मीबाई नगर सेक्‍शन का है। इस सेक्‍शन में डॉ. अंबेडकर नगर (महू) सीनियर सेक्‍शन इंजीनियर के अधीन कार्यरत ट्रैकमैन नंदा पिता रादू का 20 जून 2020 में किसी कारणवश निधन हो गया था। इसकी सूचना विभाग को दिए बगैर छोटे भाई थावरिया पिता रादू ने स्‍वत: ही नौकरी पाकर सेक्‍शन में काम पर आना शुरू कर दिया। साथ ही भाई के बैंक खाते को संचालित कर ग्रेडपे के मुताबिक हर माह पगार भी उठाता रहा।

रिटायरमेंट के पूर्व कार्रवाई में पकड़ाया

मृत ट्रैकमैन नंदा का रिटायरमेंट 31.12.2024 को होना है। रिटायरमेंट की पूर्व तैयारी के लिए कार्मिक विभाग के बीट इंचार्ज वेल्फेयर इंस्‍पेक्‍टर एसएन बैरागी द्वारा सूचना देकर कर्मचारी को डीआरएम ऑफ‍िस बुलवाया। दो से तीन बार के प्रयास के बाद भी कार्यालय में दस्‍तावेज नहीं भेजे गए। इस पर बीट इंचार्ज सेक्‍शन में पहुंचे। आशंका होने पर पुख्ता तहकीकात कर कर्मचारी के गांव गए। वहां ग्रामीणों से पूछताछ की गई तो बताया गया कि कर्मचारी नंदा की तो वर्ष 2020 में ही मौत हो चुकी है। इधर, मृत ट्रैकमैन के परिजन अशिक्ष‍ित होने की वजह से निपटरा राशि तथा अनुकंपा नौकरी के लिए छोटे भाई थावरिया पर निर्भर रहे। पूछताछ में परिजनों ने वेलफेयर इंस्‍पेक्‍टर को जानकारी दी कि थावरिया उन्‍हें आश्‍वासन देता रहा कि मंडल कार्यालय में अनुकंपा नौकरी की कार्रवाई चल रही है। इसमें अभी समय लगेगा। इसने भाई से जुड़े सभी दस्तावेज भी फर्जी तैयार कर हर माह पगार लेता रहा।

मामला संज्ञान में आने पर बैंक खाता किया सीज

इधर, मामला उजागर होते ही इसकी सूचना वरिष्‍ठ मंडल कार्मिक अधिकारी अरिमा भटनागर को दी गई। इसके बाद मृत ट्रैकमैन के मूल विभाग इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्‍ठ अधिकारियों को दी गई। मामला डीआरएम रजनीश कुमार के संज्ञान में आते ही कर्मचारी के बैंक खाते को सीज करने की कार्रवाई कर मामले की पुख्‍ता जांच शुरू की गई। इंजीनिरिंग विभाग के फील्‍ड इंजीनियर तथा संबंधित अधिकारी भी संदेह के घेरे में है।

फील्‍ड में इनकी रहती है जिम्‍मेदारी, क्यों नही हुई पहचान

दरअसल रेल मंडल का ट्रैक मेंटेनेंस वर्किंग अलग अलग सेक्शनों में बंटा है। जिस सेक्‍शन में ट्रैकमैन काम करते हैं, इसकी पुख्‍ता जानकारी जमादार, एसएसई तथा एईएन की रहती है। बड़ा सवाल है कि यदि कर्मचारी की मौत हुई है। तब इसकी तुरंत विभाग को क्यों नहीं दी गई। दूसरा व्यक्ति यदि काम कर रहा है तो इसकी पहचान क्यों नहीं की गई। इसके अलावा भी कई और सवाल है जो जांच का विषय है। मामले में जांच भी शुरू कर दी गई है।

सेक्‍शन के वर्किंग में इनकी अहम भूमिका

जमादार– यह कर्मचारी फील्‍ड व सेक्शनों में ट्रैकमैन कर्मचारियों की नियमित हाजरी लेता है। इसकी जिम्‍मेदारी रहती है कि नियमित उपस्‍थ‍िति दर्ज कर इसकी सूचना आला अधिकारियों तक पहुंचाए।

एसएसई– सेक्‍शन में कार्यरत सीनियर सेक्‍शन इंजीनियर (एसएसई) के अधीन पूरी यूनिट रहती है। इन्‍हें पता रहता है कि सेक्‍शन में कितने ट्रैकमैन कार्यरत है। कौन सा काम कब व कितनी अवधि में पूरा किया जाना है।

एईएन– ये सेक्‍शन के प्रमुख अधिकारी रहते है। इन्‍हें कर्मचारियों के वेतन आहरण सहित संबंधितों के ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच करना होता है। एईएन अपनी पूरी मासिक रिपोर्ट मंडल कार्यालय वरिष्‍ठ अधिकारी को भेजते हैं।

इनका यह कहना है

यह विभाग का आंतरिक मामला है। कर्मचारी का बैंक खाता सीज किया है, इसकी सूचना बैंक वाले ही बता पाएंगे। अभी मैं कहीं बैठा हूं, बाद में बात करता हूं।

-पीयूष पांडेय, वरिष्‍ठ मंडल इंजीनियर (समन्‍वय), मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय रतलाम।

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