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विजिलेंस कार्रवाई, सीडब्ल्यूएलआई पर प्रकरण…शासकीय आयोजनों के बिलों की हुई जांच, हस्ताक्षर किए कैटरिंग के ब्लेंक बिल भी जब्त किए

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। लंबे समय से फर्जी व आधे अधूरे बिलों के जरिए आर्थिक अनियमितता की शिकायतों के बाद पिछले सप्ताह विजिलेंस इंस्पेक्टर ने कार्मिक विभाग के सीडब्ल्यूएलआई पर बड़ी कार्रवाई की। जांच के उपरांत विजिलेंस इंस्पेक्टर द्वारा बकायदा प्रकरण बनाया। बल्कि फ़ास्ट ट्रैक की तर्ज पर अब इस फाइल को हेडक्वार्टर सबमिट कर कार्रवाई के लिए मामला विभाग को भेजा जाएगा। कार्रवाई में यह भी सामने आया कि एपीओ स्तर के अधिकारी द्वारा बिलों को बकायदा हस्ताक्षर कर फॉरवर्ड किए गए। इससे आर्थिक अनियमितता में विभागीय सांठगांठ की आशंका भी जताई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लंबे समय से शिकायतें मिलने के बाद विजिलेंस इंस्पेक्टर संतोष साहू अपने साथ आरपीएफ कांस्टेबल को लेकर 12 फरवरी 2026 को डब्ल्यूएलाई सेक्शन में सीडब्ल्यूएलाई प्रशांत पांडे के पास पहुंचे। विजिलेंस इंस्पेक्टर ने 12 व 13 फ़रवरी (गुरुवार-शुक्रवार) दो दिन तक तमाम बिल व दस्तावेज निकलवाए। बताया जा रहा कि इन्हें खंगाला गया तो कई अनियमितता उज़ागर हुई है।

इन ईवेंट्स के बिल जांचे गए:- विजिलेंस की कार्रवाई में सांस्कृतिक सभागृह की बुकिंग, रोजगार मेला आयोजन से जुड़े बिल, गोवा टूर व महेश्वर टूर के भुगतान बिल, रेलवे स्टेशन के 100 साल आयोजन के बिल सहित उज्जैन हॉलिडे होम से जुड़े दस्तावेज भी जांचकर मिलान किए गए। कई मामलों में फर्जी बिल के अलावा कोटेशन भी बनवाए गए। बड़ी बात निकलकर यह भी आई कि इसमें एपीओ स्तर के अधिकारी द्वारा बकायदा हस्ताक्षर कर बिल पास करवाए गए। इससे ऊपरी स्तर पर सांठगांठ की आशकाओं को नकारा नहीं जा सकता है।
बता दें कि जितने भी इवेंट हुए, इसमें सर्वाधिक खर्च रतलाम स्टेशन के 100 साल पूरे होने पर आयोजन को लेकर था। इसमें कैटरिंग ठेकेदार भी संदेह के घेरे में है।

ब्लेंक बिल पर कैटरिंग ठेकेदार के हस्ताक्षर:- दो दिन की जांच में बड़ी अनियमितता कैटरिंग के बिलों को लेकर सामने आई है। जांच के पाया कि कुछ कोरे बिल ऐसे भी निकले, जिनमें कैटरिंग ठेकेदार के केवल हस्ताक्षर थे। जबकि इन बिलों में खाना व नाश्ता का न तो मेन्यू दर्ज था, नहीं इसमें कोई मूल्य लिखा गया था। आशंका जताई जा रही कि मनमानी राशि दर्ज कर बिल पास करने की प्लानिंग की जा रही होगी।
यह भी बता दें कि न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा गोवा टूर के दौरान बिलिंग संबंधी अनियमितता को लेकर ख़बर का प्रमुखता से प्रकाशन किया गया था। तब विभाग के सीनियर अधिकारी द्वारा मामले में कोई एक्शन नहीं लिया। उसी दिशा में अब विजिलेंस द्वारा जांच की गई तो तमाम गड़बड़ियां उज़ागर होती दिखाई दी।

इस मामले में होगी ठोस कार्रवाई? :- इन दिनों विजिलेंस की छापामारी व इसमें अनियमितताओं के बावजूद विभाग के अधिकारियों द्वारा सबंधित कर्मचारी को बचाने के भरसक प्रयास किए गए। पूर्व में कार्मिक विभाग के दो कर्मचारियों पर विजिलेंस जांच के बाद भी उन्हें मूल काम से नहीं हटाया गया। जबकी दोहरी प्रशासनिक नीति के चलते इंदौर होस्टल में कार्यरत डब्ल्यूएलाई फ़ख़रे आलम को छह माह के लिए निलंबित कर न केवल होस्टल से हटाया गया था। बल्कि इस मामले में सुनवाई व फरियाद सुनने का अवसर तक न दिया गया। फ़ख़रे आलम की निलंबन अवधि सीधे अगले छह माह के लिए और बढ़ाकर खूब मनमानी की गई। अब ताज़ा मामले में विभाग क्या कार्रवाई करता है, यह देखना अहम रहेगा।

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