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62 साल में 32 जैसी स्फूर्ति…रिटारमेंट बाद भी नहीं छोड़ा योगा व आयुर्वेद का साथ

-नियमित अभ्यास से योगा की अलख जगा रहे अनिल। 
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। नियमित योगा व नेचुरल थैरेपी के बूते पर यदि किसी 62 वर्ष के शख्स को 32 जैसी चुस्ती स्फूर्ति वाला कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।


हम बात कह रहे हैं सेवानिवृत्त हेड टीटीई अनिल उपाध्याय की। इन्हें योग प्राणायाम में महारत हासिल होने से ये बरसो से योग प्रणायाम कर स्वयं लाभ ले रहे है। बल्कि स्वास्थ्यवर्धक विधा से दूसरों को भी प्रशिक्षित कर रहे है। यहीं वजह है कि आज भी तरोताजा है व फिटनेस पहले जैसी है।
बता दें कि रेलवे के पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद से जुड़े होने से सामाजिकता में सक्रिय रहे उपाध्याय फ़िलहाल डीआरयूसीसी मेंबर है।


रोजमर्रा जीवन में शाकाहार को प्रमोट करते यह अपनी बात बताते हैं कि मैं अधिकतर एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करता हूं। साधारण बीमारी नेचरोपेथीक रूप से दुरुस्त कर लेता हूं। जड़ी-बूटी के नेचरल ज्ञान से यह संभव रहता है।
सुबह पांच बजे से दिनचर्या चालू होती है। दस हजार कदम चलना व योग प्रणायाम का नियमित क्रम बदस्तूर जारी है।
यह स्वास्थ्य सेवा भी:- उपाध्याय के मुताबिक उन्हें जो ज्ञान व अनुभव है। उसके आधार पर बढ़े हुए बेड कॉलोस्ट्रॉल, बीपी, शुगर, मूत्र रोग, फस्ट-सेकंड स्टेज का कैंसर आदि का नेचरल तरिके से कंट्रोल कर मानव सेवा में सहभागिता निभाते है।

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