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‘भोला’ नहीं माने….कावड़ियों के साथ 100 किमी चलकर श्वान पहुंचा उज्जैन महाकाल मंदिर

-भोला के गले पर कावड़ जल का कलश बांधा, बगैर गिराए पहुंचा उज्जैन।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। सावन मास में हर कोई शिव भक्ति में लीन है। वहीं भोला नाम के कावड़िए श्वान की अनोखी शिव आस्था देखकर हर कोई हैरान है। कावड़ियों के जत्थे के साथ गले में बंधा कलश लेकर वह बकायदा खुद भी कांवड़ियां बना बल्कि उज्जैन तक पहुंचा।

उसके जल को महाकाल को चढ़ाया गया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने इसे मंदिर परिसर के हॉल के बाहर ही रोक लिया। वहां भीड़ देखकर या रोक लेने से यह भोला नामक श्वान ज़रा भी विचलित नहीं हुआ। बल्कि शांति से बाहर बैठकर अपने साथी कावड़ियों का इंतजार करता रहा। नजारे की वीडियो रील बनना स्वाभाविक थी।
दरअसल यह तस्वीर रतलाम के समीप गांव से ही सामने आई है। जहां एक शिव भक्त श्वान कावड़ियों के जत्थे के साथ चल दिया। बकायदा उसने अपने गले में कावड़ का जल कलश भी उठाया। गांव में इस श्वान को लोग भोला कहकर पुकारते है। 100 किमी की इस यात्रा में हर कोई श्वान भोला को कावड़ ले जाते देख हैरान हो गया। मंदिर परिसर एवं रास्ते भर लोगों ने अपने मोबाईल से वीडियो बनाए। यह अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

29 जुलाई से कांवड़ यात्रा के साथ

रतलाम के लुनेरा गांव के विश्वेश्वर महादेव मंदिर से उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग तक पैदल कावड़ यात्रा 29 जुलाई को निकाली गई। तीसरे दिन यानी 1 अगस्त को यात्रा उज्जैन पहुंची। ग्रामीण विक्रम गुर्जर ने बताया की यह श्वान गांव में रहता है और इसका नाम भोला है। जब हम लोग कावड़ लेकर रवाना हुए तो यह हमारे पीछे-पीछे चल पड़ा। इसे भगाने पर भी नहीं गया। एक अन्य गांव में रात्रि विश्राम के दौरान इसे वापस लुनेरा गांव छोड़ा मगर वह वापस आ गया। जिसके बाद हम सभी ने महादेव की इच्छा मानकर भोला को साथ चलने की आजादी दे जताई।
भोला के गले पर कावड़ जल का कलश बांधा। बाकायदा वह कलश को उज्जैन तक ले गया। वहां सुरक्षाकर्मियों ने मंदिर परिसर के हॉल के बाहर ही इसे रोक लिया। तब बाहर बैठकर अपने साथियों के दर्शन उपरांत आने तक इंतजार किया। यह नजारा देखकर सुरक्षाकर्मी भी हैरान रह गए और उसकी वीडियो लेने लगे।

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