घूसखोरी मामला : 10 हज़ार रिश्वत लेते पकड़े गए रेलवे क्लर्क को चार्जशीट, पूछताछ में नाम लेने वाले का इंटर डिवीजन तबादला
-10 जनवरी के मामले में विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर रेल प्रशासन की कार्रवाई।
-विजिलेंस द्वारा ट्रेप किए गए क्लर्क शिवलाल मीणा ने पूछताछ में ओएस सीपी पांडे का नाम लिया था।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में फैमेली पेंशन के नाम पर 10 हज़ार रुपए की रिश्वत के मामले में रेल प्रशासन द्वारा बुधवार को सेटलमेंट सेक्शन में कार्यरत क्लर्क (एसओ) सीपी पांडे का बड़ौदा मंडल के लिए इंटर डिवीजन तबादला आदेश जारी किया है। हालांकि प्रशासनिक हित में तबादला किया गया। इस मामले में एक अन्य क्लर्क शिवलाल मीणा को पूर्व में चार्जशीट दी गई थी।
मालूम हो कि रिश्वतखोरी का यह मामला फैमेली पेंशन के लिए रेलवे रिकार्ड में नाम जुड़वाने को लेकर था। दिवंगत रेलकर्मी के बेटे आरस ने इसकी विजिलेंस में लिखित में शिकायत की थी। फैमेली पेंशन में उसका नाम जुड़वाने के लिए डिलिंग क्लर्क द्वारा उससे रिश्वत की मांग की जा रही है। इसके बाद विजिलेंस इंस्पेक्टर, आरपीएफ जवान सहित पांच सदस्यीय टीम द्वारा पहचान के लिए तय नंबर के नोट देकर क्लर्क को पकड़ने का जाल बिछाया था। उस दिन सुबह करीब 11.30 बजे सेटेलमेंट सेक्शन में कार्यरत क्लर्क शिवलाल मीणा 10 हजार रुपए लेने रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 की ओर पहुंचा। तभी विजिलेंस टीम ने वहां मीणा को पकड़ लिया। पूछताछ में मीणा ने बताया कि उसे ओएस सीपी पांडे ने भेजा है।

मामले में मीणा पर सामान्य कार्रवाई…?
इस कार्रवाई को लेकर मंडल कार्यालय के गलियारों में खूब चर्चा है कि विजिलेंस द्वारा सीधे धरपकड़ वाले क्लर्क मीणा को विभागीय रूप से केवल एसएफ-11 चार्जशीट दी गई। जबकि मीणा द्वारा पूछताछ में नाम लेने पर ओएस सीपी पांडे का इंटर डिवीजन तबादला किया गया। दूसरी ओर यदि ओएस पांडे को तबादलें से दंडित किया गया तो आदेश प्रशासनिक हित मे निकाले जाना कितना तर्क संगत है..? क्योंकि इस तबादलें में कर्मचारी को ट्रांसपोर्ट अलाउंस सहित अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाना है।
विजिलेंस से मुख्य काम पर लौटे कर्मचारी पर ऐसी मेहरबानी
इधर, अधिकारियों के संज्ञान बगैर या मूल तथ्य बताए बिना डीलिंग क्लर्क द्वारा आदेश जारी करवाते हुए अनियमितता की जाती है। कुछ माह पूर्व विजिलेंस से अपना कार्यकाल पूरा कर लौटे कर्मचारी को उज्जैन तबादलें का लाभ दिलवा दिया गया। दरअसल उज्जैन में कार्यरत मोहम्मद इरफान पदोन्नति के बाद उज्जैन ही पोस्टिंग चाहते थे। क्योंकि इसका बेटा दिव्यांग है और पारिवारिक परेशानी भी है। लेकिन डिलिंग क्लर्क द्वारा यह कहते इंकार कर दिया कि चार सीनियर कर्मचारियों की नेमनोटिंग लगी है। यानी तबादलें के लिए पूर्व से आवेदन में नाम दर्ज है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मुंबई विजिलेंस से कार्यकाल पूरा कर लौटे विजिलेंस इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार साहू का उज्जैन तबादला कर दिया गया। कर्मचारी इसे नियमों की अवहेलना करार दे रहे है।
इधर, पूरे मामले में पीआरओ खेमराज मीणा से संपर्क करना चाहा। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
