-रिलीव नहीं होने पर एक सीट पर दो कर्मचारी नियुक्त होने जैसी भी स्थिति।
-पिरियोडिकल तबादलें के मुख्यालय के निर्देश, डीआरएम के आदेश की भी अनदेखी।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। लंबे समय के बाद विभागों द्वारा पिरियोडिकल तबादलें की कार्रवाई जरूर की गई। लेकिन तबादलें के बाद अब कुछ विभागों की सेंसटिव पोस्ट पर नियुक्त रहे कर्मचारी वहां से हटने का नाम नहीं ले रहे। कुर्सी के लालच में अभी तक रिलीव नहीं हुए। जबकि कुछ विभाग में तो तबादलें के बाद कर्मचारी ज्वाइन होने के लिए करीब पखवाड़े से खाली बैठे है। हालात यह है कि एक सीट पर दो कर्मचारियों की मौजूदगी किसी शासकीय विभाग में हैरान करने वाली स्थिति है।
मालूम हो कि तबादलों की शुरुआत कार्मिक विभाग से हुई थी। इस विभाग के जिन कर्मचारियों के तबादले किए गए थे। वे अन्य विभागों में उन अधिकारियों को भला-बुरा कह रहे थे, जिनके अधीन कई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही कुर्सी पर जमे हुए थे।
हालांकि बाद में अन्य विभागों में भी यह कार्यवाही शुरू की गई। लेकिन उन विभागों में तबादलें के बाद कुछ सेंसेटिव पोस्ट के कर्मचारी अभी भी जमे हुए है।
इन विभागों में कार्रवाई को लेकर सवाल
मंडल कार्यालय में 3 मई को जारी आदेश में इलेक्ट्रिक पावर विभाग में चीफ टेलक्निकल असिस्टेंड के पद पर कार्यरत मस्तराज मीणा का तबादला अन्य सेंक्शन में हुआ है। इसने स्थान नीरज कुमार को भेजा गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मीणा फिलहाल रिलीव नहीं हुए है।
इसी तरह इंजीनियरिंग वर्क्स में ओएस पद पर कार्यरत साबिर अली का पखवाड़े पहले तबादला हो गया था। इसके बावजूद ये रिलीव नहीं किए गए। सोमवार शाम को इसी मुद्दे को लेकर वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ के मंडल मंत्री अभिलाष नागर विभाग के अधिकारी से चर्चा करने पहुंचे। बताया जा रहा है कि साबिर अली के स्थान पर तबादला होकर आए अन्य कर्मचारी पखवाड़े से ही मौजूद है। लेकिन चार्ज नही मिलने से एक सीट पर दो कर्मचारियों की नियुक्ति जैसी स्थिति निर्मित हो गई है।
इसी तरह वाणिज्य विभाग में कार्यरत टीटीई मनोज यादव व राजाराम बैरवा को एक साल पहले ही उज्जैन से इंदौर स्टेशन पिरियोडिकल तबादला कर दिया गया। लेकिन दोनों फिलहाल उज्जैन में ही कार्यरत है। बताया जा रहा कि दोनों ने अन्य कही जाने से बचने पिरियोडिकल तबादलें से पहले ही नेमनोटिंग करवाया था। अब तबादलें के बाद भी विभाग द्वारा इन्हें राहत देना समझ से परे है।
एक अन्य विसंगति वाणिज्य विभाग की है कि चेकिंग में कार्यरत 25 से अधिक टीटीई को पिरियोडिकल तबादलें में शामिल नहीं किया जाता है। इसे पक्षपात माना जा रहा है। दरअसल इनकी ड्यूटी स्थाई होने के साथ ही शाम को इन्हें होम प्लेस मुख्यालय आने का लाभ मिल जाता है। जबकि स्लीपर मैनिंग वाले टीटीई की रोज ट्रेन बदलने के बावजूद उन्हें पिरियोडिकल तबादलें में शामिल किया जाता है।
लेखा विभाग में संसोधन की संभावना
इधर, लेखा विभाग में पिछले सप्ताह 13 सीनियर एसओ के तबादलें किए गए थे। विभागीय सूत्र द्वारा बताया जा रहा कि अधिकारी द्वारा चुनावी ड्यूटी से आने के बाद सेंसेटिव पोस्ट पर तबादला किए गए एक सीनियर एसओ का पद एक बाद फिर बदला जा सकता है।
हालांकि तबादला किए गए सभी एसओ को नई टेबल में काम करने की मशक्कत करना पड़ रही है। कुछ माह में स्टाफ के तबादलें की भी संभावना जताई जा रही है। मामले में रेलवे पीआरओ का कहना है कि नियम से तबादलें व ज्वाइनिंग, रिलीविंग की प्रकिया पूरी की जाती है।
