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कमीशन की मशीन बना रेलवे ट्रैफिक वर्कशॉप?… अल्प शिक्षित कर्मचारी को दी इंचार्ज की बागडौर, बंगलों पर काम करने को मजबूर अनफिट कर्मचारी

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के वाणिज्य विभाग के अंतर्गत संचालित ट्रैफिक वर्कशॉप अनियमितता के चलते एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार भी यात्री सुविधाओं के नाम पर वर्कशॉप के माध्यम से करोड़ों रुपए की बेवजह खरीदी सहित कमीशनबाजी ही चर्चा में है। कमीशन के खेल के चलते जिम्मेदार अफसरों ने अयोग्य कर्मचारियों को भी प्रभारी बनाकर संचालन की बागडौर सौंप दी। अब चूंकि काम पूरा तरीके से करना है। कमीशनबाजी को बदस्तूर जारी भी रखना है। इसके लिए एक रिटायर्ड प्रभारी तक की सेवाएं ली जा रही है। इन्हें समय समय पर बुलाकर आंकड़ों का गणित जमाया जा रहा है।
अब हालात यह है कि बड़े पैमाने पर ओव्हर बिलिंग व कमीशनबाजी ने इस यूनिट को भ्रष्टाचार का मुख्य अड्डा बना दिया है। यही वजह है कि इस यूनिट को अफ़सरों ने अभी बंद नहीं किया गया। जबकि अनुपयोगिता को देखते पश्चिम रेलवे जोन के अन्य मंडलों में इस यूनिट को बंद कर दिया है।
इस संबंध में यहां के ही कुछ कर्मचारियों ने प्रधान कार्यकारी निदेशक (PED), रेलवे बोर्ड विजिलेंस, रेल भवन, नई दिल्ली को शिकायत भेज दी। इसमें  जानकारी दी गई कि ट्रैफिक वर्कशॉप के क्लास फोर कर्मचारियों से अफ़सरों के बंगले पर निजी काम में लिया जा रहा है। मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

एमसीएफ को वर्कशॉप की कमान:- वर्कशॉप में कोई भी जवाबदेह सुपरवाइजर या टाइमकीपर (क्लर्क) तैनात नहीं है। क्योंकि पूर्व प्रभारी अहमद शेख की एक साल पहले सेवानिवृत्ति हुई है। इसके बाद किसी भी योग्य कर्मचारी ने बतौर प्रभारी जवाबदेही नहीं ली। इस कारण MCF (लोहार ग्रेड)  हरिप्रसाद लोट को इंचार्ज की जिम्मेदारी दी गई।

–जिम्मेदारी ठेकेदार की, काम कर रहे कर्मचारी:- टेंडर शर्तो के मुताबिक यात्री सुविधाओं से जुड़ा कोई काम ठेकेदार द्वारा लिए जाने के बाद इसे पूरा करना संबंधित फर्म के ही जिम्मे रहता है। लेकिन इसमें रेलवे कर्मचारियों का उपयोग किया जा रहा है। रेलवे स्टेशनों पर नए सामान जैसे सोफे, टेबल, कुर्सियां, पलंग, गद्दे, डिस्प्ले बोर्ड आदि की सप्लाई और फिटिंग का पूरा कार्य शर्तों के मुताबिक ठेकेदार को अपनी फर्म की लेबर द्वारा किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद, फिटिंग का कार्य वर्कशॉप के रेल कर्मचारियों से कराया जाता है। आरोप है कि ठेकेदार की इस लेबर बचत का हिस्सा निचले स्तर से लेकर ऊपर तक बांट दिया जाता है।

सामग्री का निजी उपयोग और उपस्थिति में धांधली:- वर्कशॉप में आने वाला सामान और फर्नीचर अधिकारियों एवं कुछ यूनिट के ही कर्मचारियों के घरों की शोभा बढ़ा रहे है। शिकायत में आरोप लगाए है कि वर्कशॉप में कोई भी नियमों के विपरित काम करते वक्त अन्य कर्मचारियों को लाइन ड्यूटी (TA) पर भेज दिया जाता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जनवरी 2026 के मस्टर (हाजिरी रजिस्टर) में देखा जा सकता है। कुछ कर्मचारी इंचार्ज के चहेते है। वे अपनी मर्जी से ड्यूटी करते हैं। इतना ही नहीं कई बार अनुपस्थिति होने पर अगले दिन ऑफिस आकर हस्ताक्षर कर देते हैं।

शिकायत में गंभीर आरोप, मेडिकल अनफिट कर्मचारियों का शोषण:- शिकायत में बताया गया है कि वर्कशॉप में अधिकतर 1800 ग्रेड पे के मेडिकल अनफिट कर्मचारी तैनात हैं। इन कर्मचारियों को विभागीय कार्य लेने के बजाय उन्हें अधिकारियों के बंगलों पर निजी काम करने के लिए भेजा जाता है।


​फ़ोटो- अधिकारी के बंगले पर काम करते ट्रैफिक वर्कशॉप के क्लॉस फोर कर्मचारी। 

शिकायतकर्ता द्वारा मांग की गई कि रतलाम ट्रैफिक वर्कशॉप का तत्काल औचक निरीक्षण कर वर्तमान हालात को देखा जाए। जनवरी 2026 से अब तक की उपस्थिति, TA बिलों एवं ठेकेदार के सप्लाई मस्टरों की गहन जांच की जाए। दोषी अधिकारियों और प्रभारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। यदि कोई भी अधिकारी या सुपरवाइजर जवाबदेही लेने से बचता है, तो वर्कशॉप का पूर्ण रूप से ठेकेदारी (आउटसोर्सिंग) में विलय किया जाए।

इस अनियमितता का उल्लेख

-जिम्मेदार कर्मचारियों ने कई तरह के लोन ले रखे है। कई तरह के कमिशन व टीए से मिलने वाली राशि से इसका भुगतान किया जा रहा।
-फिटर, लोहार व कारपेंटर कर्मचारियों का शोषण कर उन्हें कहा जा रहा कि उनकी कैटिगिरी का रेलवे में काम नहीं है। इसलिए उन्हें बंगलों पर काम करना होगा।
-सेवानिवृत्त पूर्व प्रभारी को वर्कशॉप में बुलाकर उनसे तकनीकी आंकड़ों के काम लेकर कमीशन भुगतान किया जा रहा।

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