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ग्राम बनबटी व खाचरौद की ये बेटियां कर रही क़माल…पढ़ाई की सफलता रंग लाई, प्रेमलता ने GMC भोपाल में MBBS में लिया, पूजा ने पाई Gmc रतलाम में MBBS सीट

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। जिला मुख्यालय के छोटे गांवों की बेटियां अपने पढ़ाई के हुनर से माता पिता का बल्कि अपने गांव का नाम रोशन कर रही हैं। इनकी इस मेहनत में अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट मददगार साबित हो रही है। ये बेटियां चाहे गांव बनबटी हो या जिला मुख्यालय के पास जिले का खाचरौद की हों। इन्होंने नीट परीक्षा में अपनी बुलंदी के झंडे गाड़े है।

शहर के समीप स्थित छोटे से गांव बनबनी की बेटी प्रेमलता ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर सफलता की मिसाल पेश की है। प्रेमलता ने NEET-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए GMC भोपाल में MBBS में प्रवेश हासिल किया है।
प्रेमलता के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर रही है। माता-पिता आर्थिक कठिनाइयों से जूझते हुए भी अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। प्रेमलता की प्रारंभिक पढ़ाई गांव के शासकीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने कामठाना के शासकीय विद्यालय से आगे की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने शुरू से ही शासकीय विद्यालय में पढ़ाई की।

12वीं के बाद B.Sc. और फिर M.Sc. करते हुए NEET की तैयारी:- प्रेमलता ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद B.Sc. में प्रवेश लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने M.Sc. में प्रवेश लिया।
प्रेमलता बताती हैं कि 12वीं तक उन्हें यह जानकारी भी नहीं थी कि डॉक्टर बनने के लिए किस प्रकार की पढ़ाई और परीक्षा की आवश्यकता होती है। जब वह आगे की पढ़ाई के लिए रतलाम आईं, तब उन्हें पता चला कि NEET के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बना जा सकता है। यहीं से उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना जन्मा।
M.Sc. के प्रथम वर्ष में पढ़ाई करते हुए ही उन्होंने पहली बार NEET की परीक्षा दी। उस समय उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करते हुए परीक्षा दी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्हें समझ आया कि NEET जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही रणनीति और अनुभवी मार्गदर्शन भी जरूरी है।

M.Sc. के दूसरे वर्ष में अभ्यास से जुड़ीं:- NEET में बेहतर तैयारी के लिए प्रेमलता को एक परिचित के माध्यम से रतलाम के अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद M.Sc. के दूसरे वर्ष में पढ़ाई करते हुए उन्होंने अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया।
अभ्यास में आने के बाद उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ NEET की तैयारी को भी गंभीरता से आगे बढ़ाया। नियमित कक्षाओं, टेस्ट सीरीज, प्रश्नों के अभ्यास, कमजोर टॉपिक्स पर विशेष ध्यान और शिक्षकों के मार्गदर्शन के साथ उन्होंने अपनी तैयारी को व्यवस्थित किया।
प्रेमलता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की ओर से भी उन्हें पढ़ाई में सहयोग प्रदान किया गया, ताकि आर्थिक परेशानी उनकी तैयारी में बाधा न बने।
एक साल की कड़ी मेहनत ने बदल दी जिंदगी
अभ्यास से जुड़ने के बाद करीब एक वर्ष तक प्रेमलता ने पूरी लगन के साथ NEET की तैयारी की। M.Sc. की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने दोनों को संतुलित करते हुए लगातार मेहनत जारी रखी।
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और NEET-2026 में शानदार सफलता प्राप्त कर उन्होंने GMC भोपाल में MBBS की सीट हासिल कर ली।

प्रतिभा गांव में भी है, जरूरत है सही मार्गदर्शन की:- अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने प्रेमलता की सफलता पर कहा कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे स्कूल की मोहताज नहीं है। यदि विद्यार्थी में मेहनत और आगे बढ़ने का जुनून हो तथा उसे सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो गांव और सामान्य आर्थिक परिस्थितियों से आने वाला विद्यार्थी भी देश की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रेमलता की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने सपनों को छोटा समझ लेते हैं। प्रेमलता ने M.Sc. की पढ़ाई के साथ NEET की तैयारी करते हुए यह साबित किया कि सही दिशा, निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
अब गांव की बेटी बनेगी डॉक्टर
गांव के शासकीय विद्यालय से पढ़ाई शुरू करने वाली प्रेमलता अब GMC भोपाल में MBBS की पढ़ाई करेंगी। उनका डॉक्टर बनने का सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ चुका है। उनकी सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ उनके गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
प्रेमलता की सफलता पर अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की टीम ने उनके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। संस्थान की टीम ने परिवार का मिठाई खिलाकर सम्मान किया और प्रेमलता के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
बनबनी जैसे छोटे से गांव से निकलकर GMC भोपाल तक पहुंची प्रेमलता की यह कहानी साबित करती है कि सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि बड़ा हौसला और निरंतर मेहनत जरूरी है।

गांव-गांव फेरी लगाकर सामान बेचते रहे पिता, बेटी ने हासिल की Gmc रतलाम में MBBS सीट

सपनों की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत की कीमत जरूर चुकानी पड़ती है। कुछ सपने सुविधाओं के बीच पूरे होते हैं, तो कुछ संघर्षों के बीच जन्म लेकर इतिहास लिखते हैं। खाचरौद की पूजा चौहान की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष, संकल्प और सफलता की कहानी है।
पूजा के पिता राजू चौहान मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाते हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। रोज की मेहनत के बीच उनके मन में एक सपना हमेशा रहा। बच्चे पढ़ें और जीवन में उनसे बेहतर मुकाम हासिल करें।
सुबह के 5 बजे, जब अधिकांश लोग अपने घरों में नींद में होते हैं, राजू चौहान अपनी मोटरसाइकिल पर सामान लादकर फेरी के लिए निकल पड़ते हैं। गांव-गांव घूमकर सामान बेचते हैं और फिर उसी कमाई से परिवार की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई पूरी करते हैं।
पिता की सुबह गांवों की गलियों से शुरू होती रही और बेटी की सुबह किताबों के साथ।
पूजा ने खाचरौद के मॉडल स्कूल से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उसने एक वर्ष Abhyas Career Institute, Ratlam में NEET की तैयारी की। परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। नियमित अध्ययन, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास के साथ उसने NEET की तैयारी की।
मेहनत रंग लाई और पूजा ने MBBS में प्रवेश हासिल कर लिया। अब उसे Government Medical College (GMC), Ratlam में MBBS की सीट मिली है।
यह उपलब्धि पूजा के लिए जितनी बड़ी है, उससे कहीं ज्यादा यह उसके पिता राजू चौहान के संघर्ष की जीत है।
जिस पिता ने मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाई, उसी पिता की बेटी अब मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने की पढ़ाई करेगी। जिस मेहनत की कमाई से कभी किताबें खरीदी गईं, फीस भरी गई और पढ़ाई का खर्च उठाया गया, आज वही मेहनत बेटी को सफेद कोट के सपने के करीब ले आई है।
पूजा की सफलता उन तमाम विद्यार्थियों के लिए संदेश है जो सुविधाओं की कमी को अपनी कमजोरी समझते हैं। संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपनों की उड़ान सीमित नहीं होनी चाहिए। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का विश्वास साथ हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता रोक नहीं सकतीं।
पूजा ने अपने पिता के संघर्ष को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि उसे अपनी प्रेरणा बनाया। राजू चौहान ने गांव-गांव जाकर मेहनत की और पूजा ने किताबों के बीच बैठकर उस मेहनत का सम्मान किया।
आज GMC Ratlam में पूजा का MBBS में प्रवेश सिर्फ एक सीट मिलने की खबर नहीं है। यह एक पिता के त्याग, एक बेटी के संकल्प और एक परिवार के विश्वास की जीत है।
एक तरफ पिता की मोटरसाइकिल गांव-गांव घूमती रही और दूसरी तरफ बेटी की किताबें उसे डॉक्टर बनने की मंजिल तक ले जाती रहीं। दोनों की मेहनत आज एक मुकाम पर आकर मिल गई है।
राजू चौहान की मेहनत ने पूजा के सपनों को पंख दिए और पूजा की मेहनत ने उस संघर्ष को सम्मान। अब खाचरौद की बेटी GMC Ratlam में डॉक्टर बनने की राह पर है।

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