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गोपनीय की गुपचुप आपत्ति काम नहीं आई, सिर पिटे नेताजी….अखाड़े के साथ अहाता भी बना बेडमिंटन कोर्ट…मिट्टी के ऊपर सीमेंट का लेप, तैयार हो रही सड़कों की खेंप…इंपेक्टर साहब तोड़ेंगे पार्टनरशिप

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। नगर निगम की तरह दो बत्ती एरिया में इंजिन वाले ऑफिस में इन दिनों तबादलों के चर्चित दौर चल रहे हैं। विभागों में एक से दूसरी मलाईदार टेबल पर पहुंचने की जी-तोड़ कोशिशों में साहब लोगों का भी भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। दो दिन पहले की ही बात है….। दूसरी मंजिल पर कर्म करने वाले कर्मचारियों के विभाग में तो भाई कमाल ही हो गया। यहां जो चीज पूरी तरह से गोपनीय रखना चाहिए, उसे उगाड़ने की पूरी तैयारी कर ली। एक लॉबी से जुड़े कर्मचारी की पदोन्नति का तबादला गोपनीय सेक्शन में ही कर दिया। ऐसे में हो-हल्ला होना तो लाज़मी था न…।
पहले तो मजबूर लॉबी के नेता ने आपत्ति लेकर बाबा सोमनाथ के दरबार में गुपचुप मौखिक अर्जी लगाकर उस तबादले को गलत ठहराया। लेकिन यह बात उगाड़ी हो गई। बात फैली तो यह दूर तक चली गई। यह खबर बाबा भोलेनाथ से बाबा सोमनाथ तक होती हुई सीधे बाबा जगन्नाथ के पास पहुंच गई। तब मजबूरी व घबराहट में आकर नेताजी साफ नट गए कि हमने तो कोई आपत्ति नही।  दरअसल नेताजी चाहते है कि अपन क्यों किसी से खुलकर व्यवहार बिगाड़े। किसी से बुराई मोल लेने से फायदा भी क्या है। अपने वाले भी क्या दे देंगे। हालांकि गुपचुप आपत्ति के बाद भी नेता जी की चली नही। उल्टे बाबा सोमनाथ की ऐसी कृपा रही कि रेड लॉबी से जुड़े बाबूजी को गोपनीय तरीके से  गोपनीय सेक्शन में नियुक्त कर ही दिया। इधर, अशोक के पेड़ की भांति ऊंचे-पूरे बाबूजी का काम सौ टका पक्का है। ये मैदान में टी-20 मैच में सुरक्षित तरीके से गेंद को बाउंड्री पार पहुंचाने में खूब माहिर है। गोपनीय तरीके से बल्लेबाजों को चकमा भी देते आए। अब देखना है कि ये गोपनीय वाले सेक्शन में कैसे गेंद को स्पिन कर विकेट में डालते है।

हालांकि सुनने में तो यह भी आया है कि दूसरी मंजिल के लिए बेटिंग की शुरुआत निचले तल से भी शुरू कर है। दरअसल निचले तल पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटपति राजू की तर्ज पर एक स्पिनर बैठा है। सुलटाने वाले प्रकरणों की खेर-खबर पूछकर उन्हें दूसरी मंजिल भेजता है। नाम व पते लेकर प्रकरणों को अपने स्तर पर सुलटा रहा है। किसी को कानो कान खबर तक नहीं हो रही है। लेकिन प्रभु जगन्नाथ से कोई बात नहीं छिपी है। ऐसी कई गोपनीय सूचनाएं उड़कर आ ही जाती है।
हे प्रभु, नगर निगम में ऐसी व्यवस्था इंजिन वाले ऑफिस में स्वतः ही लागू हो है। कोई काम हो तो बगैर खाली पॉकेट जाना बेकार है। कुछ भी कर लो काम होगा ही नहीं। यदि काम करवाना हैं तो पॉकेट हल्की करनी ही पड़ेगी।

अखाड़े के साथ अहाता भी बना बेडमिंटन कोर्ट:- रेलवे ने शायद यह सोचकर बैडमिंटन हॉल बनाया कि इसमें खेलकर बच्चे नाम रोशन करेंगे। उन्हें नौकरी के अवसर भी मिल सकेंगे। लेकिन बैडमिंटन हॉल को अखाड़े के अलावा अब कॉम्पेक्ट अहाता भी बना दिया है। लंबे टाइम से वहां अलग-अलग ब्रांड की बोतलों के ढक्कन खुल रहे थे। ग़नीमत है इसकी रील मार्केट में आ गई। वरना कैरेट के कैरेट खाली हो जाती और किसी को पता भी नहीं चलता। दूसरी ओर दो मेल-फीमेल पहलवानों ने मिलकर तो कोर्ट को अखाड़ा ही बना लिया था। ग़नीमत यह भी रही कि तीसरे रेफरी ने सिटी बनाकर मेल-फीमेल पहलवानों की कुश्ती रुकवा दी। वरना लपक्के दंगल मचता। बाद में ख़ाकी की शरण में अच्छा ख़ासा कम्प्रोमाइज हुआ। तब जाकर दोनों पहलवान छुटे।
हे प्रभु, पहले के अफसरों ने बक़ायदा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स व क्लबों का निरीक्षण कर जायजा लिया। इतना ही नहीं कार्रवाई भी की। लेकिन अब….बंटा ढाल व सब रामभरोसे।

मिट्टी के ऊपर सीमेंट का लेप, तैयार हो रही सड़कों की खेंप :- रेलवे की कॉलोनियों में इन दिनों नकली सीमेंटेड सड़क बनाने का गोरखधंधा खूब फलफूल रहा है। ठेका मिला तो करना कुछ भी नहीं है…। बस जमीन की मिट्टी के ऊपर थोड़ी गिट्टी, थोड़ी रेत और थोड़ी बहुत सीमेंट डाल दो और बन जाएगी सीसी सड़क…। साहब भी राजी और ठेकेदार भी खुश। दरअसल सरकारी पैसों के बहाव में कमीशनखोरी की नाव अच्छे से चल रही है। इसमें बैठकर कई ठेकेदार किनारे लग रहे है। लेकिन इस धंधे की आड़ में पनप रही ठेकेदारी प्रथा डेवलेपमेंट सिस्टम को उल्टा खोखला कर रही है। यही वजह है कि रेलवे में पिछले कुछ सालों में ठेकेदारों की बाढ़ ही आ गई है। बकरा पुल एरिया में पिछले दिनों घटिया सीमेंटेड सड़क निर्माण का खेल सभी ने देखा। बकरा पुल के पास बनाए जा रहे सीसी रोड पर सीमेंट-कांक्रीट के घोल को जैसे-तैसे लीपकर सड़क बना दी। सड़क निर्माण में तकनीकी तौर पर न तो बेस बनाया गया। नहीं गुणवत्ता आंकी गई। पोल खुली तो पेटी कांट्रेक्टर कहने लगा कि जमीन के अंदर केबल होने से अधिकारियों ने खुदाई के लिए मना किया है। रहवासियों ने तो यहां तक कहा था कि यदि जमीन में केबल है तो सीसी रोड की मंजूरी क्यों दी गई। इसके बजाय डामरीकरण करवाया जाना था। इसी ठेकेदार की इंजीनियर विभाग के अधिकारियों ने पीठ थपथपाई। उल्टे अब सुनने में आ रहा कि उसी सड़क निर्माण के काम की बिलिंग प्रकिया भी शुरू की जा रही है।
हे प्रभु जगन्नाथम, ये सीसी रोड निर्माण में सीमेंट के घोल के लेप का खेल भले रास आ रहा है। लेकिन जल्दी ही मामला मुंबई हेडक्वार्टर पहुंचने वाला है। तब यहां के  जिम्मेदारों को बड़े साहब द्वारा सीधे सीमेंट से ही चुनवाया जाएगा।

कमाई वाले विभाग में सारे बाबूजी के घर बदल डाले:- पिछले दिनों इंजिन वाले ऑफिस के कमाई वाले विभाग में सारे के सारे बाबुजियों की कुर्सियां मेडम जी ने बदल डाली। केबिन में बैठने वाले बाबुजियों को बाहर हॉल में ले आए और बाहर हॉल में बैठने वालों को सीधे केबिन में पहुंचा दिया। इस सर्जरी में कुछ शिकायतें भी काम कर गई। जबकि कुछ बाबूजी अपनी चलाकर किसी को भी नहीं गाठ रहे थे। सपना भी नहीं आया होगा कि उनकी टेबल पर लात पड़ने वाली है। सरकारी काम को मिक्की माउस का ड्रामा मानकर पट्ठे मौज-मस्ती में जुटे थे। उन्हें मेडम जी ने आईना दिखा दिया। नई घोड़ी नया दाम की तर्ज पर अभी बाबू अपना-अपना काम सीख रहे है। क्योंकि गलती की तो फिर से ….!!
हे प्रभु जगन्नाथ, कमाई वाले विभाग में ऐसा क्या है कि सभी के सभी बाबुजियों में ईगो भरा है। ज़मीन पर पैर ही नहीं टिक रहे। बेचारे मंडल व जोन के मुखिया यानी बड़े साहब तो ज़मीन पर चलते है। ये छोटे-छोटे बाबूजी हवा में बात करने से बाज नहीं आते। इन्हें समझना चाहिए कि ज्यादा अंठाने से कोई फायदा नहीं है। हवा-हवाई होने में देर नहीं लगती। बाद में मुंह बिगाड़कर घूमने के अलावा कोई चारा नहीं है।

इंपेक्टर साहब को मज़ा नहीं आ रही, तोड़ेंगे पार्टनरशिप:- पिछले दिनों रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा फूड मार्केट क्या खुला इसमें व्यापारियों ने उमड़कर दुकानें (आउटलेट) बुक करवा लिए। इधर रेलवे के दो बत्ती वाले ऑफिस की पहली मंज़िल पर काम करने वाले एक इंपेक्टर को भी वहां यात्रियों को चाय नाश्ता व खाना खिलाकर कमाई करने की उग गई। बस ममता व सागर की गहराइयों में डूबकर कर बैठे पार्टनरशिप….। सोचा होगा कि मटेरियल की खरीदी में मिली कमाई को लगा देंगे। इससे और भी ज्यादा धन-वैभव प्राप्त होने लगेगा। लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा बै। सुनने में आ रहा कि मामला घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसलिए अब पार्टनरशिप से मोह भंग होने लगा गई।
हे प्रभु, सब कमाया अपने बाप का नहीं होता है। अनीति का पैसा एक न एक दिन परेशानी में डालता ही है। अब देखते है पार्टनरशिप में आगे क्या होता है।
हे प्रभु जगन्नाथम ये सब क्या हो गया है।

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