THE BURNING RAJDHANI Followup…..ये कैसा अलर्टनेस: एआरएमई स्टार्ट ही नहीं हुई, 15 मिनिट लेट चली, हूटर भी नहीं बजाया गया
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। किसी ट्रेन हादसे के वक्त दुर्घटना राहत दल का महकमा कितना अलर्ट है। इसकी असल ट्रॉयल हादसे के वक्त ही परखी जा सकती है। ट्रेन संख्या 12431 तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस में आग लगने के बाद रतलाम मंडल की राहत अमले की सतर्कता डामाडोल रही। ऐसे में राहत इंतजामों की सतर्कता को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। दरअसल हादसे के बाद रतलाम में हूटर नहीं बजाया गया। कंट्रोल से मिले मौखिक मैसेज पर रतलाम से एआरएमई (Accident Relief Medical Equipment) को रवाना होने के मैसेज मिले। लेकिन यह वैन स्टार्ट ही नहीं हुई। हालांकि लापरवाही के इन मामले को डीआरएम ने गंभीर माना। उन्होंने सोमवार सुबह एआरएमई तथा राहत दल के इंतजामों की जांच की प्लानिंग बनाई। इसे लेकर जरूर राहत अमला हरकत में आ गया।
बता दें लूणीरिछा व विक्रमगढ़ आलोट के बीच रविवार तड़के करीब 5:15 बजे के दरमियान शॉर्ट शर्किट से राजधानी के ए- थर्ड एसी कोच तथा इसके पास जुड़े एसएलआर में आग लग गई थी। रतलाम में।सूचना मिलते ही राहत दल को मौके पर भेजने के मैसेज दिए गए।
हूटर नहीं बजाया गया:- रेलवे की सतर्कता नियमों के मुताबिक रेल हादसे पर राहत ट्रेन सहित इससे जुड़े अमले को मौके पर रवाना होने की सूचना देने हूटर बजाए जाते है। भारतीय रेलवे में राजधानी एक्सप्रेस जैसी पर प्रमुख ट्रेन में आग लगती है। तब राहत अमले की सक्रियता ज्यादा दिखना चाहिए थी। बताया जा रहा कि हादसे के वक्त हूटर नहीं बजाया गया। बल्कि मौखिक मैसेज दिए गए।
15 मिनिट देरी से पहुंची एआरएमई:- किसी यात्री ट्रेन के दुर्घटना होने पर दुर्घटना राहत चिकित्सा उपकरण वैन (एआरएमई) की सतर्कता बेहद जरूरी है। लेकिन राजधानी एक्सप्रेस हादसे के बाद एआरएमई रतलाम से 15 मिनिट देरी से रवाना हुई। वहीं मेडिकल वैन के लूणीरिछा रेलवे स्टेशन से रतलाम लौटते वक्त रुनखेड़ा स्टेशन के पास वैन के इंजिन के ब्रेक में आग लग गई थी। धुंआ उठने पर टीम के कर्मचारी नीचे उतरे। बाद में फायर इक्यूपमेंट से आग पर काबू पाया। ऐसी लापरवाही के चलते डीआरएम अश्वनी कुमार ने सोमवार को प्लेटफॉर्म नंबर 4 की ओर लूप लाइन में खड़ी एआरएमई की जांच का फैसला लिया और जांच शुरू की।
