मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स इंतज़ार करते रहे… कलेक्टर ने महज मरीजों के इंतजामों का लिया जायजा, समस्या यथावत और डीन इंदौर रवाना
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। मेडिकल कॉलेज में होस्टल के विद्यार्थियों की पानी व केंटीन की असुविधाओं की जानकारी लगने पर शुक्रवार को कलेक्टर मिशा सिंह कॉलेज जरूर पहुंची। लेकिन वे विद्यार्थियों से नहीं मिली। बल्कि कॉलेज के दूसरी व्यवस्थाओं का महज जायजा लिया। निरीक्षण पूरा होते ही डीन अनिता मूथा इंदौर रवाना हो गई। ऐसे में विद्यार्थियों की समस्या जस की तस बनी हुई है।
दोपहर बाद पहुंची कलेक्टर सिंह ने निरीक्षण करने के दौरान निर्देश जरूर दिए कि यहां हॉस्टल में विद्यार्थियों को पानी और भोजन की असुविधा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन द्वारा दिए गए रिकॉर्ड और दी गई जानकारियों के बारे में मरीजों से भी चर्चा कर वास्तविक स्थिति जांची।
उन्होंने निरीक्षण के दौरान लेबोरेटरी में मरीजों के हाथ में पर्ची देखी तो निर्देश दिए कि ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए मरीज को उनकी जांच रिपोर्ट दी जाए।

साथ ही कहा कि इस व्यवस्था को और आसान बनाई जाए। ताकि मरीजों को भर्ती होने के बाद किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। डीन ने इन्हें बताया कि मरीज को उनके मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन रिपोर्ट भेजी जा रही है। कलेक्टर ने मरीजों को कॉल कर इस बारे में बात की। उन्होंने जन्म-मृत्यु पंजीयन कक्ष में व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। निर्देश दिए कि प्रसूता को बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उनके डिस्चार्ज होने से पहले पलंग पर दे दी जाए।
कलेक्टर ने एक्स-रे कक्ष में जाकर मरीजों से सीधे पूछताछ की। अस्पताल में ब्लड जांच, दवाई, सोनोग्राफी, एक्स-रे के लिए कलर कोडेड पर्ची बनाने के लिए कहा ताकि भ्रम की स्थिति नहीं बने।
कलेक्टर ने निर्माणाधीन सीटी स्कैन कक्ष का भी जायजा लिया। सोनोग्राफी कक्ष में वेटिंग अधिक होने के कारण चिकित्सा अधिकारियों को और अधिक समय देने को कहा। ओपीडी एवं आईपीडी के मरीजों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित करके समय पर सेवाएं देने के लिए आगाह किया। उन्होंने कहा कि छात्रावास के लिए भोजन व्यवस्था के टेंडर प्रक्रिया जल्दी अमल में लाई जाए।

विद्यार्थी इंतजार करते रहे:- कॉलेज के विद्यार्थियों की मुख्य समस्या भोजन एवं पानी के संबंध में थी। हालांकि उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हो। लेकिन विद्यार्थी कलेक्टर से रूबरू होना चाहते थे। इससे कि वे अपनी समस्या को सीधे कलेक्टर के संज्ञान में दे सके। लेकिन प्रबंधन ने ऐसा नहीं होने दिया। बाद में डीन मूथा भी इंदौर के लिए रवाना हो गई।
