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यहां ऐसा भी मॉकड्रिल….हूटर बजते ही दौड़ पड़ी दुर्घटना राहत ट्रेन, बगैर सीएमआई पहुंच गया राहत दल

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में सेफ़्टी की जांच के लिए ट्रेन दुर्घटना  मॉकड्रिल की सीरियस एक्सरसाइज के तगड़े नियम है। लेकिन रतलाम रेल मंडल में इसे बेहद हल्के में लिया जा रहा है। यात्री ट्रेन दुर्घटना का मैसेज जारी हुआ। इससे हड़कंप मचना स्वाभाविक था। इस मैसेज के बावजूद यहां से राहत के लिए सीएमआई (कमर्शियल इंस्पेक्टर) रिलीफ टीम में शामिल नहीं रहा। हालांकि ग़नीमत रही बाद में खुलासा हुआ कि डीआरएम ने मॉकड्रिल की थी।
बता दें कि रतलाम जंक्शन से करीब 150 से अधिक यात्री ट्रेनों का मूवमेंट है। फ़ास्ट स्पीड के लिहाज़ से दिल्ली-मुंबई राजधानी रूट पर विशेष सतर्कता जरूरी रहती है।
इसी के मद्देनजर मंगलवार को डीआरएम अश्वनी कुमार ने रतलाम से गोधरा तक मॉकड्रिल का प्लान बनाया। यात्री ट्रेन दुर्घटना के संकेत के लिए चार बार हूटर बजाए गए। फौरन एआरटी व एआरएमई स्टेशन पहुंच गई। इसमें मेडिकल, सीएंडब्ल्यू तथा अन्य खास कर्मचारियों की टीम सुबह 11.50 बजे गोधरा के लिए रवाना की गई। एआरटी संतरोड तक गई जबकि एआरएमई सीधे गोधरा स्टेशन तक पहुंची। दोपहर 2.08 बजे मॉकड्रिल का खुलासा हुआ। तब दल वापस रतलाम के लिए लौटा।

डीआरएम को किया ग्रुप में मैसेज:- इधर, मॉकड्रिल के बाद कर्मचारियों की उपस्थिति की रिपोर्ट बनाकर डीआरएम को पेश की जाना है। लेकिन राहत दल में कमर्शियल विभाग की ओर से कोई सीएमआई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बारे में सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) राजेश कुमार बेन ने ऑफिसर्स ग्रुप में सीधे मैसेज कर बताया कि रिलीफ़ टीम में एक भी सीएमआई शामिल नहीं था।

यात्री ट्रेन दुर्घटना के वक्त यात्रियों के खानपान के लिए सीएमआई जरूरी:-रेलवे की व्यवस्था के मुताबिक जब भी यात्री ट्रेन से जुड़ी आपात स्थिति या दुर्घटना होती है। तब यात्रियों के खानपान जैसी मूल सुविधा के इंतजाम रेलवे की अहम जिम्मेदारी में शामिल रहता है। कमर्शियल विभाग स्वयं इसके इंतजाम करता है। सुबह जब ट्रेन दुर्घटना का मैसेज मिला तब रिलीफ टीम में सीएमआई का होना भी बेहद जरूरी था। इसकी अनुपस्थिति का मामला गंभीर माना जा रहा है। मामले की पुष्टता के लिए रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा से जानकारी लेना चाही। लेकिन खबर लिखे जाने के अंतराल तक उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

तत्कालीन डीआरएम-सीनियर डीसीएम में हुए थे मतभेद:- दो साल पहले बजरंगगढ़-अमरगढ़ सेक्शन में बारिश के दौरान ट्रैक धंसने से घंटों गाड़ियों का परिचालन बाधित हुआ था। यात्रियों के खानपान की अपर्याप्तता के चलते सख़्त कार्यशैली के तत्कालीन डीआरएम रजनीश कुमार तथा पूर्व सीनियर डीसीएम प्रतिभा पाल के बीच मतभेद हुए थे। बाद में मामला मनमुटाव में तब्दील हो गया था। अंततः सीनियर डीसीएम पाल के तबादले की नौबत आई थी। वर्तमान में प्रशासनिक लचीलापन तथा सुस्त कार्यप्रणाली का आलम है। इसका खामियाजा कभी भी आम यात्रियों को उठाना पड़ सकता है।

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