दि प्रशा दत्रा शो…यूएस में रह रही रतलाम की बेटी का शो में साक्षात्कार, बोली- बैलेंस्ड लाइफ जीना, स्वास्थ्य अनुसार खान-पान व मेडिटेशन से कैरियर में लाभ
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। बैलेंस्ड लाइफ में जीना, स्वास्थ्य अनुसार खान-पान व मेडिटेशन से कैरियर व स्वास्थ्य में आमूलचुक लाभ मिल सकता है। यूएस में रह रही रतलाम की बेटी गरिमा व्यास ने “दि प्रशा दत्रा शो” में वर्चुअल वार्ता के दौरान रतलाम से यूएस में नौकरी पाने के अनुभव को सांझा किए।
दरअसल “दि प्रशा दत्रा शो” की प्रमुख एंकर प्रशा एक मनोवैज्ञानिक है। इसमें भिन्न-भिन्न प्रोफेशनलों से “पौडकास्ट” में खुले मंच पर वार्ता के माध्यम से उनके द्वारा सामना की गईं कठिनाइयों, भिन्न भिन्न प्रकार के एक्सपीरियंस इत्यादि और उनसे मिली सीखों के बारे में विस्तार से चर्चा की जाती हैं।
ऐसे ही एक एपिसोड में रतलाम की बेटी सुश्री गरिमा व्यास का प्रशा द्वारा यूएसए में साक्षात्कार लिया गया।
चर्चा में दोनों ने पहले तो विषय की वर्तमान स्थिति में उपयोगिता पर विचार-विमर्श किया। इस बात को उजागर किया कि आज के परिप्रेक्ष्य में, जबकि विशेषकर महिलाओं को भी पुरुषों की भांति कॉरपोरेट जगत में कंधे से कंधा मिलाकर काम करना पड़ता है। साथ ही साथ घर भी संभालते हुए जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होता है। ऐसी स्थिति में तनाव का सामना व उससे जुझते हुए कैरियर में भी आगे बढ़ना एक चैलेंज के रूप में सामने आता है!
प्रशा ने फिर विषय को गरिमा व्यास की ओर मोड़ते हुए उनके विचार व निजी एक्स्पोज़र से प्राप्त सीखों के बारे में विस्तार से जानकारी चाही।
बता दें कि रतलाम के रिटायर्ड बैंक अधिकारी तरनी व्यास की बेटी गरिमा बीई व एमएस हैं। उन्होंने शिक्षा रतलाम के ही केन्द्रीय विद्यालय प्रारंभ की थी। बचपन से ही सदैव अव्वल दर्जे में उत्तीर्ण हुई हैं।
गरिमा वर्तमान में यूएसए के हूसटन शहर टेक्सास में प्रेक्टिस डायरेक्टर इंडिगो बीम कंसल्टिंग संस्था में कार्यरत है। उन्होंने अपने उत्कृष्ट कार्य शैली के कारण बहुत ही कम समय में पदोन्नतियां प्राप्त कर इस पद को हासिल किया है।

फ़ोटो-गरिमा पिता तरनी व्यास।
गरिमा ने बतलाया कि कैसे इनिशियल स्ट्रगलिंग को जीतकर, मेहनत, निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करके अपने सीनियर्स का कॉन्फिडेंस पाया और कैरियर में आगे बढ़ी। हालांकि इसका स्वास्थ्य पर नेगेटिव असर भी पड़ा। सहकर्मियों से उनके एक्सपीरियंस जाने, व अन्य मित्रों व परिवार से भी चर्चा कर के रास्ते निकाले। उन्होंने मनोवैज्ञानिकों से भी संपर्क साधा व सबसे ज्यादा फायदा मेडिटेशन और शारीरिक व्यायाम व संतुलित आहार सेवन करने से मिला। पूर्व में मात्र तीन से चार घंटे ही नींद लें पाती थी। मेडिटेशन इत्यादि के उपरांत सात से आठ घंटे अच्छी नींद पा लेती हैं। कार्य भी अधिक सुगमता से निपटना संभव हो गया है।
प्रशा व गरिमा ने फिर चर्चा की समीक्षा करते हुए आज की युवा पीढ़ी व विशेषकर महिलाओं के लिए संदेश दिया कि एक बैलेंस्ड लाइफ में जीना, स्वास्थ्य के अनुसार खान पान करना व, मानसिक संतुलन के लिए अति आवश्यक मेडिटेशन इत्यादि से कैरियर तथा जीवन अच्छे से चल सकता है।
प्रोग्राम को देखने वालों ने भी वार्ता को खूब सराहा व अपने अमूल्य कमेंट्स द्वारा प्रोग्राम को और आकर्षक बनाया।
