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36 साल चुनौतियों के सिर चढ़कर बोली दिव्यांगता….अक्षमता को मात दे रेल सेवा करते रहे मुकेश तिवारी, रेल इतिहास में पहली बिदाई

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। अपनी दिव्यांगता को कभी आड़े न आने देने वाले और अटूट इच्छाशक्ति के धनी रेलकर्मी मुकेश तिवारी शुक्रवार को भारतीय रेलवे में 36 वर्ष और 22 दिनों की समर्पित एवं उत्कृष्ट सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर अकाउंट्स विभाग सहकर्मियों ने उनकी बिदाई को ऐतिहासिक बना दिया। पूरे सेक्शन को बलून सहित डेकोरेशन से रंगारंग कर दिया। उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की मंगलकामनाएं करते हुए उन्हें भावभीनी बिदाई दी।

​शिक्षा से लेकर बैंकिंग व शिक्षा क्षेत्र में अनुभव:- कोटा (राजस्थान) में जन्मे मुकेश तिवारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा मध्य प्रदेश के रतलाम से पूरी की। उन्होंने एम.कॉम की उपाधि प्राप्त करने के बाद भारतीय रेल सेवा में आने से पूर्व एक राष्ट्रीयकृत बैंक, महालेखा परीक्षक कार्यालय (ग्वालियर) और शासकीय विद्यालय में अपनी सेवाएं देकर अपनी कार्यकुशलता की छाप छोड़ी थी।

1990 में शुरू हुआ रेल सेवा का सफर:- ​9 जुलाई 1990 को रतलाम स्थित वरिष्ठ मंडल लेखा अधिकारी कार्यालय में लेखा लिपिक के पद पर उनकी पहली नियुक्ति हुई थी। अपने 30 से अधिक वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने वित्त, पेंशन, भविष्य निधि (PF), व्यय, निपटारा और स्थापना जैसे महत्वपूर्ण अनुभागों में अत्यंत ईमानदारी, दक्षता और निष्ठा के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

​जीएम अवॉर्ड से हुए थे सम्मानित:-  ​मुकेश तिवारी की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली और निष्ठा के लिए उन्हें मंडल स्तर से लेकर मुख्यालय स्तर तक कई बार सम्मानित किया गया। वर्ष 2017-18 में सातवें वेतन आयोग के तहत पेंशन भुगतान आदेश (PPO) रिवीजन के कार्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए चर्चगेट (मुंबई) में तत्कालीन महाप्रबंधक अनिल कुमार गुप्ता द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया था।

सहकर्मियों के लिए बने मिसाल:- शारीरिक चुनौतियों और दिव्यांगता के बावजूद मुकेश तिवारी की सकारात्मक सोच, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा प्रत्येक रेलकर्मी के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। संगठन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और उच्च कार्य-संस्कृति को रतलाम मंडल हमेशा याद रखेगा।

प्रेरणादायी पारिवारिक पृष्ठभूमि:- मुकेश तिवारी का परिवार भी समाज और सेवा क्षेत्र में समर्पित रहा है:

पिता: स्वर्गीय बसंत कुमार तिवारी (रेलवे के सीनियर डीएमएम/राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त)।

पत्नी: उषा तिवारी (मूक एवं बधिर बच्चों की विशेष शिक्षिका/)।

पुत्री:  डॉ. वैष्णवी तिवारी (बीएएमएस, भारती विद्यापीठ पुणे से उत्तीर्ण एवं रतलाम अस्पताल में चिकित्सक)।

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