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ये सत्य वचन है….मां-बाप की सेवा करने वालों की विपत्तियां खुद-ब-खुद समाप्त होती है

-लॉयंस हाल में चल रही श्रीमद्भ भागवत कथा में पंडित डॉ. संजय सलिल ने कहा
-राधा देवी दामोदरदास तिवारी स्मृति में आयोजन के जजमान है राजेश तिवारी।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। भागवत कथा में जब तक देववाणी संस्कृत का प्रयोग ना हो, ऐसी भागवत कथा किसी जजमान का उद्धार नहीं कर सकती है।
यह बात लॉयंस हाल में चल रही राधा देवी दामोदरदास तिवारी स्मृति संगीतमय श्रीमद्भभागवत कथा के दौरान कथावाचक पंडित डॉ संजय सलिल ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं। कथा में भगवान के कृष्ण के वर्णन में श्रद्धालु भाव विभोर हुए। कथा प्रसंग के भजनों की प्रस्तुति के दौरान महिलाएं नृत्य के लिए खुद को रोक न सकी।
पंडित डॉ. सलिल ने कहा कि जीवन में किसी के लिए जब कुछ बन पड़े तो कुछ करने के लिए कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। जो व्यक्ति लोगों को खुशियां बांटता है वह व्यक्ति लंबा जीवन जीता है। हमारी दृष्टि कैसी है? लोगों को कैसे कुछ प्रदान कर सकते हैं, यह सब हमारे ऊपर निर्भर करता है। जिसके हृदय में परोपकार की भावना होती है वह व्यक्ति अवश्य परोपकार करता है। जरूरी नही कि परोपकार धन से ही किया जाए। फलदार छाया वाले पौधे लगाना या किसी की सहायता करना भी परोपकार की श्रेणी में ही आता है।

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मां-बाप की सेवा करते हैं परमात्मा उनको प्रत्यक्ष फल अवश्य देते हैं। परोपकारी के जीवन की सारी विपत्तियां खुद-ब-खुद समाप्त हो जाती है। उसके जीवन में हर क्षण सफलता तथा समृद्धि मिलती रहती है।
इससे पहले कथा के पूर्व जजमान आयोजक राजेश तिवारी, ममता तिवारी, दिव्यांश तिवारी, श्रेयांश तिवारी आदि ने पोथी पूजन किया। डॉ. सलिल ने भगवान् राधा कृष्ण के विवाह का सजीव वर्णन किया। महिलाओं ने रास रचाया नागरिकों ने कन्यादान किया। इस अवसर पर सर्व ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष नरेंद्र जोशी, सविता तिवारी, डॉ. गीता दुबे, सुनीता पाठक, शांतिलाल शर्मा, विजय शर्मा, सुनील शर्मा, शैलेंद्र तिवारी, राजू हॉकी ,सीमा सुरोलिया ,राजेश चास्टा, सुनील गौतम आदि ने पंडित सलिल का शाल-श्रीफल तथा सम्मान-पत्र देकर सम्मान किया. कथा के अंत में आरती सांसद तथा राजस्थान प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष नारायण पंचारिया, महेश व्यास, प्रभु राठोड, महेंद्र व्यास व नागरिकों ने आरती की व प्रसादी वितरित की गई । कार्यक्रम का संचालन विकास शैवाल ने किया।

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