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नौकरी से रिटायर हुए, चेंबर से नहीं…रिटायरमेंट के बाद भी हटी नहीं नेमप्लेट, छूटा नहीं चेंबर का मोह

रेलवे अधिकारी सीनियर डीईएन वर्क्स रहे आलोक श्रीवास्तव के हाथ अभी भी छुटी नहीं हुई फाइलें।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में भरपूर सुविधा तथा कर्मचारियों की जमकर हुजूरियत के चलते अधिकारी का रिटायरमेंट के बाद भी ऑफिस व चेंबर का मोह नहीं छुट पाता है। इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर डीईएन वर्क्स के रूप में कार्यरत रहे आलोक श्रीवास्तव 31 मई को रिटायर्ड हो गए है।

5 दिन बाद भी विभाग को इनके चेंबर खाली कराने या नेमप्लेट निकालने की फुर्सत नहीं मिली है। 4 जून मंगलवार तक यह नेमप्लेट बकायदा चेंबर के बाहर चिपकी रहीं। बल्कि स्वयं श्रीवास्तव फ़िलहाल ऑफिस नहीं छोड़ पा रहे है। हाथों में पूर्व की तरह फाइलें व रजिस्टर लेकर ऑफिस में दिखाई देना आम तौर पर देखा जा रहा है।

मालूम हो कि किसी अधिकारी का तबादला या रिटारमेंट के बाद चेंबर से फ़ौरन ही नेमप्लेट हटा दी जाती है। बताया यह जा रहा कि सीनियर डीईएन वर्क्स की पोस्ट यहां से हेडक्वार्टर चली गई। जबकि वर्क्स का पूरा काम अब सीनियर डीईएन (कोर्डिनेशन) पीयूष पांडे के जिम्मे रहेगा।

श्रीवास्तव ने कई करवाए निर्माण के काम, बने रहे चहेते।

श्रीवास्तव की बात की जाए तो रतलाम मुख्यालय पर ही वे वर्क्स में एईएन, डीईएन तथा सीनियर डीईएन पद पर रहते बंगले, क्वार्टर मेंटेनेंस से लेकर कई निर्माण के काम भी इन्होंने करवाए हैं। ऐसे में रेलवे यूनियनों की मान मुनव्वर का खूब लाभ मिला। जूनियर अधिकारी के भले ही काम नहीं हुए, लेकिन सीनियर अधिकारियों के बंगलों के काम खड़े रहकर करवाए गए। वहीं वे सालों से परिचित विभिन्न कामों के ठेकेदारों भी इनके चहेते बने रहे। हालांकि न्यू रेलवे कॉलोनी में पिछले माह क्वार्टर लाइन के पीछे के एरिया में गंदगी से छुटकारे के लिए सीमेंट कांक्रीट करवाया गया। साथ ही कई कालोनियों के एरिया में सीसी सड़क निर्माण करवाया गया। इसकी गुणवत्ता सभी कर्मचारियों के भली-भांति संज्ञान में है। इसकी बेहतरी की और सच्चाई आगामी बारिश के दिनों में देखने को आसानी से मिल जाएगी।

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