CCCTS पदोन्नति सूची पर बड़ा बखेड़ा: कार्यालयों के 19 बाबुओं को बनाया TTE, नियमों की अनदेखी और चहेतों को उपकृत करने पर सवालों के घेरें में आई प्रकिया
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। भारतीय रेलवे के रतलाम मंडल में वाणिज्य विभाग के अंतर्गत हाल ही में जारी की गई सीसीटीसी (CCCTS – ग्रेड पे 4200) की पदोन्नति प्रक्रिया गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के घेरे में आ गई है। रेलवे स्टेशन सहित विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत 19 बाबुओं को टिकट चेकिंग कर्मचारी (TTE) बनाया गया है। इसके बाद अब इस पूरी प्रक्रिया और प्रशासन द्वारा तय किए गए मापदंडों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
दूसरी ओर, कई ऐसे चेकिंग कर्मचारी वर्षों से ट्रेनों में टिकट चेकिंग और मैनिंग की ड्यूटी निभा रहे हैं। जिन पर विजिलेंस और यात्रियों की कई शिकायतें दर्ज है। बावजूद उन्हें अभी तक पार्सल ऑफिस, बुकिंग विंडो या माल गोदाम जैसे कार्यालयों में नहीं तैनात नहीं किए गए है।
आनन फानन ट्रेनिंग पर भेजने की तैयारी:- न्यूज जंक्शन-18 द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में प्रमुखता से खबर प्रसारित किए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सूची निरस्त होने और उच्चस्तरीय जांच के भय से विभाग द्वारा इन कर्मचारियों को आनन-फानन में ट्रेनिंग पर भेजने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बता दें कि परीक्षा संपन्न होने के बाद करीब ढाई माह तक परिणाम/सूची को अटकाए रखा गया, और बाद में जब सूची जारी की गई तो उसमें दोबारा फेरबदल किया गया, जिससे पूरी कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है।
वरिष्ठता और नियमों की अनदेखी बिंदुवार
– चहेतों को लाभ और अनावश्यक आर्थिक बोझ: ‘बेस्ट अमोंग द फेल्योर’ श्रेणी में पास हुए नानक सिंह को उज्जैन में टीसी के रूप में पदस्थापित करने के लिए, जनरल सीनियरिटी में पास उज्जैन के सबसे वरिष्ठ कर्मचारी दीपेन्द्र कुमार का रतलाम स्थानांतरण कर दिया गया। वहीं, रतलाम से जनरल सीनियरिटी में पास सिंगल मदर श्रीमती तृप्ति चौहान को नागदा भेज दिया गया। उज्जैन और रतलाम में पहले से पद रिक्त होने के बावजूद इस उठापटक से रेल खजाने पर दो-दो कर्मचारियों के भारी-भरकम स्थानांतरण भत्ते (Transfer Allowance) का अनुचित आर्थिक बोझ पड़ा है। सिंगल मदर के संबंध में रेलवे बोर्ड के विशेष दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी की गई है।
– आरक्षित वर्ग (SC/ST) के नियमों का उल्लंघन: रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश (RBE No. 89/2018) के मुताबिक एससी/एसटी कर्मचारियों को उनकी पदोन्नति के दौरान यथासंभव उनके वर्तमान कार्यस्थल या आसपास ही पदोन्नत किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, उज्जैन के एससी वर्ग के कर्मचारी राम अवतार को उज्जैन में पद खाली होने के बावजूद तिही (Tihi) भेज दिया गया, जबकि उनके कनिष्ठों को उज्जैन में ही रोक लिया गया। ऐसा ही रवैया उज्जैन के उदय सिंह ठाकुर और रतलाम की एससी महिला कर्मचारी श्रीमती मीरा कैथवास के साथ अपनाया गया, जिन्हें रतलाम से जावरा भेज दिया गया।
– दंपति नीति की अनदेखी: एससी वर्ग की कर्मचारी श्रीमती प्रिया लोठ और उनके पति अभिषेक करोसिया रतलाम गुड्स ऑफिस में पदस्थ हैं। रेलवे बोर्ड के पति-पत्नी को एक ही स्थान पर रखने के आदेश (RBE No. 63/2026) को ताक पर रखकर दोनों को जावरा स्टेशन पर पदोन्नत कर दिया गया, जबकि रतलाम में पर्याप्त रिक्तियां थीं और उनके कई कनिष्ठ रतलाम में ही टिके हुए हैं।
– ‘क्रॉस ट्रांसफर’ का खेल: इंदौर के एससी कर्मचारी अनिल जारवाल को उनके कार्यस्थल से लगभग 350 किमी दूर चित्तौड़गढ़ भेज दिया गया, जबकि इंदौर के आसपास पद रिक्त थे और नीमच के भूपेंद्र सिंह को चित्तौड़गढ़ भेजा जा सकता था (जिन्हें बड़नगर कर दिया गया)। इसी प्रकार इंदौर के सोनू राठौर और मंडल कार्यालय की अनुष्का सक्सेना के बीच ‘क्रॉस ट्रांसफर’ कराकर रेल खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
– कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़: भोपाल मंडल से पारस्परिक स्थानांतरण पर रतलाम मंडल आए नागेश्वर सोलंकी को इस परीक्षा में शामिल होने से वंचित रखा गया, जिससे उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
संगठनों द्वारा की गई शिकायत:- इन तमाम गंभीर अनियमितताओं और कथित जातिगत भेदभाव के खिलाफ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन द्वारा प्रशासन को पत्र लिखा जा चुका है। इसके अलावा, राष्ट्रीय दलित महासंघ के राष्ट्रीय सचिव द्वारा देश के रेल मंत्री एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई गई है। इन मामलों को लेकर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
