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रतलाम के पूर्व APO लबाना को राहत….विजिलेंस जांच के बाद गिरी गाज में GM ने मेजर पेनल्टी में दी राहत

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के डीआरएम कार्यालय में पदस्थ रहे और हाल ही में मुंबई पदोन्नत स्थानांतरित हुए पूर्व सहायक कार्मिक अधिकारी (APO) ए.एल. लबाना को वित्तीय अनियमितताओं के एक गंभीर मामले में राहत दी गई है। लबाना को मेजर पेनल्टी (SF-5) चार्जशीट जारी की गई थी। लेकिन, अगस्त 2026 में सेवानिवृत्त हो रहे लबाना द्वारा सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद महाप्रबंधक (GM) रामाश्रय पांडेय ने उन्हें बड़ी कार्रवाई से राहत देते हुए केवल दो इंक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया है।
बता दें कि इस राहतभरे फैसले के बाद कर्मचारियों में चार्जशीट मामले में भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। क्योंकि कर्मचारियों के मामले में प्रशासन द्वारा कम ही राहत दी जाती है।।

​विजिलेंस रेड और संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े तार:- विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला लगभग 6 महीने पहले कार्मिक विभाग में हुई विजिलेंस रेड से जुड़ा है। उस दौरान विजिलेंस टीम ने कर्मचारी हरिकृष्ण बारगे पर कार्रवाई करते हुए उनके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की थी। जांच के दौरान जब कड़ियों को जोड़ा गया। तब तत्कालीन एपीओ ए.एल. लबाना की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।
सूत्रों से जानकारी मिली थी कि जांच टीमों को अधिकारी के खाते से.लाखों रुपये के संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन के पुख्ता सबूत मिले थे। जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें SF-5 की मेजर पेनल्टी चार्जशीट थमा दी।

आरोप स्वीकारने पर GM से मिली राहत:- ​मामला जब महाप्रबंधक कार्यालय तक पहुंचा, तब इसी माह (अगस्त 2026) सेवानिवृत्त हो रहे लबाना ने जांच के दौरान अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद महाप्रबंधक ने सहानुभूतिपूर्वक रुख अपनाते हुए उनके दो इंक्रीमेंट रोकने के आदेश जारी किए और उन्हें रिटायरमेंट के वक्त होने वाली किसी बड़ी या कठोर कार्रवाई से बचा लिया।

​रेल कर्मचारियों में उपजी असंतोष और चर्चाएं:- ​महाप्रबंधक द्वारा दी गई इस राहत के बाद रतलाम मंडल के कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कर्मचारियों में इस बात को लेकर असंतोष देखा जा रहा है कि आम कर्मचारियों को मामूली चार्जशीट मिलने पर भी बमुश्किल राहत मिलती है। अक्सर रिटायरमेंट की राशि रोकने या निलंबन जैसी सख्त कार्रवाइयों से गुजरना पड़ता है।
​कर्मचारी वर्ग इंदौर हॉस्टल इंचार्ज (WLI) फखरे आलम के मामले का उदाहरण दे रहा है। ये 20 सितंबर 2025 से निलंबित चल रहे हैं। जबकि पत्नी किडनी जैसी बीमारी से पीड़ित है। कर्मचारियों का कहना है कि माफी के बावजूद डीआरएम द्वारा फखरे आलम के निलंबन काल को लगातार बढ़ाया जाता रहा। जबकि लाखों के संदिग्ध लेन-देन के बड़े मामले में अधिकारी को महज इंक्रीमेंट रोककर राहत दे दी गई।

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