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रतलाम: डोसीगांव पीएम आवास मल्टी पर चला निगम का चाबुक; 208 फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। डोसीगांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की मल्टी में बकाया राशि जमा न करने वाले 208 परिवारों पर नगर निगम और प्रशासन ने आखिरकार सख्त कदम उठा लिया है। 4 अगस्त की दी गई समय-सीमा समाप्त होते ही, बुधवार सुबह निगम का अमला, भारी संख्या में महिला पुलिस बल और जिला प्रशासन की टीम मल्टी परिसर पहुँची और फ्लैट खाली कराने पहुंचा। बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी।
किसी भी अप्रिय स्थिति या हंगामे से निपटने के लिए एक तरफ मल्टी परिसर में गश्त बढ़ाई गई। वही दूसरी तरफ कलेक्टर कार्यालय के बाहर भी भारी पुलिस बल मुस्तैद किया गया।
​रहवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव और धरना
​कार्रवाई के विरोध में डोसीगांव मल्टी के रहवासी अपने-अपने घरों पर ताले लगाकर नए कलेक्टर से गुहार लगाने निकले। हालाँकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद आक्रोशित रहवासी कलेक्ट्रेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए। बारिश के मौसम में इस कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे।

कांग्रेस नेता पारस सकलेचा पहुँचे, कमिश्नर से तीखी बहस-कहा नौकरी खा जाऊंगा
​मामले की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता पारस सकलेचा मौके पर पहुँचे और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। इस दौरान नगर निगम आयुक्त (कमिश्नर) और पारस सकलेचा के बीच तीखी बहस हो गई। सकलेचा ने कहा कि बारिश के मौसम में गरीब और बेघर परिवारों को इस तरह सड़क पर फेंकना पूरी तरह अमानवीय है। बहस के दौरान माहौल उस वक्त और गरमा गया जब सकलेचा ने कमिश्नर को नौकरी खा जाने की बात कह दी। जिससे अधिकारी भड़क गए। इस दौरान रहवासियों ने भी निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
​क्या है पूरा मामला? (2020 से अब तक की टाइमलाइन)

-विस्थापन: जावरा रोड स्थित शिवशंकर कॉलोनी और प्रकाश नगर स्लम बस्ती (जो रेलवे की जमीन पर थी) के 396 परिवारों को 2020-21 में डोसीगांव की मल्टी में शिफ्ट किया गया था।

वित्तीय शर्त: तत्कालीन प्रशासन और विधायक चेतन्य काश्यप के प्रयासों से हितग्राहियों से ₹20,000 मार्जिन मनी ली गई (जिसमें ₹10,000 विधायक फाउंडेशन ने दिए थे)। शेष ₹1.80 लाख पंजाब नेशनल बैंक से लोन लेकर जमा कराने थे।

बकाया का आंकड़ा: कुल 396 हितग्राहियों में से केवल 166 ने लोन लिया और 20 ने नकद भुगतान किया। बाकी 208 कब्जाधारियों ने न लोन लिया, न बकाया राशि चुकाई।

निगम का पक्ष: पिछले 6 सालों में 208 लोगों को 6 बार नोटिस दिए जा चुके हैं। बिजली-पानी के अवैध कनेक्शन से निगम को लाखों का नुकसान हुआ। 31 जुलाई को 4 अगस्त तक ₹1.80 लाख जमा करने का अंतिम नोटिस दिया गया था।
– निगम की चेतावनी: बकाया जमा न करने वालों से फ्लैट खाली कराने के साथ-साथ उनके खिलाफ अमानत में खयानत का मामला भी दर्ज कराया जाएगा।

रहवासियों के आरोप: “सुविधाएं दी नहीं, मारपीट और अभद्रता की”
दूसरी ओर, बेघर हो रहे परिवारों ने ज्ञापन सौंपकर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रहवासियों का कहना है कि आवंटन के समय पानी, सफाई और मूलभूत सुविधाओं का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ। 31 जुलाई को नोटिस देने आई निगम टीम ने महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ अभद्रता व मारपीट की, जिसके वीडियो भी मौजूद हैं। बारिश के इस मौसम में उनके पास सिर छुपाने की कोई दूसरी जगह नहीं है। रहवासियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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