-सीनियर डीसीएम प्लानिंग के सृजित किए पद को लेकर आरटीआई में मांगी गई जानकारी।
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 में भले ही सबको समानता का अधिकार है। लेकिन रेलवे में लगता है ऐसे नियमों से जिम्मेदारों का वास्ता नहीं है। क्योंकि यहां अधिकारियों तथा कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर मनमाने पृथक ही नियम बनाए हुए है। अधिकारियों को उन्नत पद का लाभ देना है तो नए पद तक सृजित कर लिए जाएंगे। जबकि कर्मचारियों की पात्रता सूचि में नाम दर्ज होने के बावजूद रिटायर्डमेंट तक उन्हें पदोन्नति के लाभ से वंचित कर अधिकारों का कत्ल ही कर दिया जाता है। रतलाम मंडल में कुछ ऐसी ही विसंगतियां निर्मित कर मनमाने लाभ अर्जित करने तथा अधिकारी तथा कर्मचारियों के बीच की खाई सरेआम पाटने के मामले है। इसे लेकर अब पीड़ित पक्ष द्वारा आरटीआई में जानकारी ली जा रही है। इसके बाद मामला उच्च स्तर तक संज्ञान में लाए जाने की पुख्ता तैयारी की जा रही है।
दूसरी ओर वेतनवृद्धि की रिकवरी से परेशान डिप्टी सीटीआई ने अब रेलमंत्री के ट्वीट माध्यम का सहारा लेकर मामले को भी अब उच्च स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। इसके बाद कई ट्वीट भी कर दिए गए है। साथ ही अभियान के तहत अपने मित्रों व परिचितों से भी ट्वीट करने की दरकार की जा रही है।
अस्थाई पद सृजित कर लिया था लाभ:- रतलाम रेल मंडल में अधिकारी को लाभ पहुंचाने के लिए अस्थाई पद सृजित करने का पुख्ता उदाहरण है। इसकी बिंदूवार आरटीआई लगाकर रजिस्टर्ड पोस्ट से डीआरएम ऑफिस भेजी गई है। इसमें उल्लेखित है कि है कि तत्कालीन सीनियर डीसीएम प्रतिभा पाल के लिए यहां सीनियर डीसीएम प्लानिंग का अस्थाई पद सृजित कर पदोन्नति का लाभ दिया गया था। अधिकारी का सीनियर अधिकारी पति के साथ यहां तबादला हुआ था। उस समय सीनियर डीसीएम पद पर सुनिल मीणा यहां पदस्थ थे। तब श्रीमती पाल कों इनकी ग्रेड के मुताबिक यहां नया पद सृजित कर सीनियर डीसीएम प्लानिंग नियुक्त किया गया। कुछ माह बाद मीणा का तबादला होने के बाद श्रीमती पाल को मूल पद सीनियर डीसीएम के लिए नियुक्त किया गया। बाद में सीनियर डीसीएम प्लानिंग का पद खत्म कर दिया गया। इसी तरह अन्य मामलों में विशेष अधिकारी को लाभ देने के लिए कई बार दूसरे अन्य अधिकारी को फोर्स लीव पर भेज दिया जाता है।
इसके विपरित इधर, कमर्शियल विभाग में ही उपयुक्तता सूचि जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारी को रिटायरमेंट तक पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया। दरअसल विभाग द्वारा 26.6.2024 को डिप्टी सीटीआई की उपयुक्तता सूचि जारी की गई थी। इसमें डिप्टी सीटीआई अनिल उपाध्याय का सूचि में नाम दर्ज था। उपध्याय का 31.8.2;24 को रिटायरमेंट था। दो माह के अंतराल में भी लाभ न देते हुए पदोन्नत पद से वंचित कर दिया गया।
मामले में अलग-अलग ट्वीट:- उपाध्याय ने खूद के साथ हुई नाइंसाफी को लेकर अधिकारों की लड़ाई का मन बना लिया है। इसके बाद इन्होंने वेतनवृद्धि की गणना में विभाग द्वारा की गई गलती तथा यह राशि रिटायरमेंट की ग्रेज्जूटी से काट लिए जाने के मामले में रेलमंत्री को ट्वीट किया है। इतना ही नहीं सीटीआई पद पर पदोन्नति की पात्रता के बावजूद उन्हें बगैर पदोन्नत पद के रिटायर कर दिया गया। इसे लेकर भी आरटीआई में जानकारी मांगी गई है। इन मामलों में पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद के जोलन संगठन मंत्री शिवलहरी का कहना है कि कर्मचारियों को न्याय दिलाने में उनका संगठन हमेशा साथ है।
