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ये कैसी मेहरबानी….दो महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव पर, दोनों को दिलाई स्टेनो परीक्षा, एक को दोबारा दे दी लीव

-रेलवे कार्मिक विभाग में अंधेरगर्दी, दोबारा लीव पर भेजी गई महिला उत्तीर्ण भी हुई।
-दाहोद से दंडित होकर आए डब्ल्यूएलआई को भी सजा खत्म होते ही दे दिया प्रमोशन।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे के कार्मिक विभाग में तीसरे क्रम के अधिकारी की मेहरबानी के आलम चरम पर है। नियमों को दरकिनार कर विशेष कर्मचारियों को लाभ दिया जा रहा है। मेहरबानी ऐसी कि मैटरनिटी लीव पर रही दो महिला कर्मचारियों को बुलाकर विभागीय परीक्षा दिलवा दी। इसमें से एक तो पास भी हो गई। जबकि दाहोद से बतौर सजा डब्ल्यूएलाई (कल्याण निरीक्षक) को पनिशमेंट अवधि खत्म होते ही पदोन्नति का लाभ दे दिया गया।
बड़ी बात यह है कि इस अनियमितता को वरिष्ठ अधिकारी भी अनदेखा कर गए। जबकि दबी-छुपी ये अनियमितताएं विभाग के गलियारों से होती हुई बाहर तक आ पहुंची।
मालूम हो कि मंडल कार्यालय में एपीओ (सहायक कार्मिक अधिकारी) अम्बाराम लबाना के रूप में लगभग दो साल से पदस्थ है।
पहले बात हो रही 7 अगस्त 2024 को 2400 ग्रेडपे की हुई विभागीय स्टेनो परीक्षा की। परीक्षा में पदोन्नति की आस में 14 कर्मचारी शामिल हुए। इसमें 8 कर्मचारी उत्तीर्ण हुए। जिन्हें अब पदोन्नति का लाभ मिलेगा।
इस परीक्षा के दौरान एक चतुर्थ श्रेणी व एक तृतीय श्रेणी में कार्यरत दो महिला आवेदिका भी शामिल हुई। लेकिन ये दोनों महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव पर थी। अधिकारी ने इनमें से एक को बकायदा बुलवाकर ज्वाइन करवाया। इसके बाद परीक्षा दिलवाई। जबकि दूसरी महिला कर्मचारी को अवकाश अवधि में ही परीक्षा दिलवा दी। दूसरे नंबर की महिला तो परीक्षा में उत्तीर्ण भी हो गई। अनुत्तीर्ण हुए कर्मचारियों का कहना है कि नियमों के मुताबिक यदि महिलाएं मैटरनिटी लीव पर है तो तकनीकी रूप से उन्हें नोटिफिकेशन की जानकारी कैसे हुई। एक महिला तो एक दिन पहले ही ज्वाइन हुई। अब अनुत्तीर्ण हुए कर्मचारी डीआरएम को शिकायत की तैयारी में जुट गए है।

एपीओ तथा डब्ल्यूएलआई दाहोद से दंडित होकर आए

इधर, सितंबर 2024 में एपीओ के साथ डब्ल्यूएलआई आरसी मीणा दाहोद वर्कशॉप से विजिलेंस कार्रवाई में दंडित होकर रतलाम आए। इसमें डब्ल्यूएलआई मीणा का पनिशमेंट खत्म होने के दूसरे ही दिन 4800 ग्रेडपे पर पदोन्नति की मेहरबानी कर दी गई। जबकि अन्य कर्मचारियों को 6 से 8 माह तक पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जाता है।
इधर, मामले में जनसंपर्क विभाग के जिम्मेदार अपना पक्ष देने से बचते रहे।

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