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मध्‍यप्रदेश की पहली भाषाई फिल्‍म कुंआरापुर मनोरंजन का बूस्‍टर डोज साबित हुई

-रतलाम में फ़िल्म की अपार सफलता, परिवार सहित सिनेमाघर पहुंच रहे दर्शक।

जलज शर्मा,
अविनाश फिल्‍म्‍स व मैक्शन बैटरी के बैनरतले मध्‍यप्रदेश की पहली भाषाई फिल्‍म कुंआरापुर लेकर आए प्रोड़यूसर अविनाश तिवारी व डायरेक्‍टर राजेंद्र राठौर सहित यूनिट के कलाकारों ने इस प्रोजेक्‍ट के जरिए दर्शकों को मनोरंजन का बूस्‍टर डोज दिया। पूरी तरह से पारिवारिक भारतीय संस्‍कृति पर आधारित फिल्‍म की कहानी दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रही है। इसकी सफलता इस मायने में भी अहम मानी जा रही है कि फिल्‍म में बॉलीवूड तर्ज की तकनीकी पहलूओं को ध्‍यान में रखा गया। बड़े बैनर की फिल्‍म से कमतर नहीं बल्कि समानांतर साबित हुई। साथ ही बड़े बैनर की तर्ज पर ही इसके म्‍यूजिक ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। बड़ी बात यह है कि भारतीय मूल की ठेठ ग्रामीण संस्‍कृति को फिल्‍म में बखूबी उकेरा है।

रतलाम, उज्‍जैन, इंदौर सहित अन्‍य शहरों में दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रियाओं में इसे जाहिर भी किया। जहां फ‍िल्‍म के नायक अविनाश तिवारी ने उम्‍दा अभिनय कर गुदगुया भी। वहीं सहपात्र दुल्‍हे के पिता, फुफा, मामा तथा दोस्‍त के अलावा विलेन के रूप में शंकर फ्रुटी का यादगार अभिनय दिखाई दिया। फिल्‍म में लल्‍ली के रूप में किरदार निभाने वाली नायिका अन्‍नपूर्णा द्विवेदी ने अ‍पनी भूमिका के प्रति पूरी तरह से न्‍याय किया। कुआरों के गांव में हीरो की शादी के संबंध तथा बारात ले जाने तक दिखाई गई कॉमेडी ने दर्शकों को बांधे रखा। फिल्‍म में बड़े कलाकारों के अलावा मुख्‍य रूप से असरानी, विक्रम गोचर, गरिमा अग्रवाल के अभिनय से वजन पड़ा है। आइटम सांग अनुप्रिया लक्ष्‍मी कटोच के गाने ने तालियां बटौरी। असरानी के डायलॉग हम अंग्रेजों के जमाने के टीटी है। इस डायलॉग ने असरानी की शोले की भी याद ताजा की। डायरेक्‍टर राठौर के तकनीकी अनुभव ने फिल्‍म की सफलता की गारंटी दे दी। 40 प्रिंट में अलग-अलग शहरों में फिल्‍म दर्शकों को थियेटर तक खींचने में सफल हुई है। कुल मिलाकर कुंआरापुर फुल इंटरटेनर फिल्‍म रही है।

 

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