-सालों से जमे कर्मचारियों को नई टेबलों पर काम करने में करना पड़ रही खासी मशक्कत।
-एक फरवरी को तबादला, 3 माह किया रेलवे अस्पताल काम, कर्मचारी को दोबार बुलाया मंडल कार्यालय।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में सालों से एक टेबल पर मौज गुजारी के बाद जब कर्मचारियों के तबादलें किए गए। तब इन कर्मचारियों को न केवल नया काम समझने में खासी मशक्कत करना पड़ रही। बल्कि इनके लुंज-पुंज कामकाज का रवैया अधिकारी के लिए भी सिरदर्द साबित होने लगा। हालात यह बन रहे कि कामकाजी गलतियों के चलते जिम्मेदारों ने इनके हाथ जोड़ना मुनासिब समझा।
मालूम हो कि 1 फरवरी से मंडल कार्यालय में बड़े पैमाने पर तबादलें किए गए। कुछ पिरियोडिकल से दबे-छिपे कर्मचारियों के तबादलों व रिलीविंग की प्रकिया अभी भी जारी है।
रेलवे अस्पताल प्रबंधन ने तीन माह में हाथ जोड़े
फरवरी में हुए तबादलों की प्रकिया में एक आदेश मंडल कार्यालय से रेलवे अस्पताल का भी हुआ था। तकरीबन 14 साल से रेलवे अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी गोपाल भाटी का तबादला कर इनके स्थान पर मंडल कार्यालय से बापूसिंह को भेजा गया। नई टेबल में तालमेल की भारी समस्या के चलते तीन माह के अंतराल में बापूसिंह को 16 मई दोबारा मंडल कार्यालय बुलवा लिया गया। बताया जा रहा है कि रेलवे अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी से विशेष अनुरोध किया। इसके बाद बापूसिंह को सम्मान मंडल कार्यालय वापसी में तबादला कर दिया गया। हालांकि बापूसिंह को मंडल कार्यालय के सेक्शन में नियुक्त करने को लेकर सेक्शन प्रभारियों द्वारा ना नुकुर करने की बात भी सामने आई है।
दूसरी ओर एक्शन मोड में दिखाई दे रहे डीआरएम की सख्ती के चलते इंजीनियरिंग वर्क्स में नियुक्त साबिर अली को रिलीव करने की तेजी से तैयारियां की गई। बताया यह जा रहा है कि तबादलें के बावजूद समान पद पर आए संबंधित कर्मचारी को प्रभार देने या कामकाजी प्रकिया को संज्ञान में देने में कतई रुचि नहीं दिखाई गई। इसके लिए अन्य विकल्प भी खोजे जा रहे है।
इधर, डीआरएम के दखल के बाद इलेक्ट्रिक पावर विभाग में चीफ टेलक्निकल असिस्टेंड के पद से तबादला हुए मस्तराज मीणा को आनन-फानन रिलीव करने के आदेश हुए। सूत्र बताते है कि अधिकारी द्वारा मीणा को मौखिक रिलीव होने का बोला गया। बाद में लेटर जारी कर रिलीविंग की विधिवत प्रकिया पूरी करना पड़ी।
गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
लेखा विभाग में सीनियर एसओ के तबादलें के बाद नए कामों को समझने की मशक्कत करना पड़ रही है। हालांकि विभाग में अब कर्मचारियों के कामों व ऑफिस की टाइमिंग को लेकर भी निगरानी रखकर गोपनीय रिपोर्ट अधिकारी को भेजी जा रही है। इनकी दक्षता के आंकलन के आधार पर नए सेक्शनों में ट्रांसफर किए जाएंगे।
