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कहानी बंगला नंबर 948…मेंटेनेंस नहीं किया तो बिल पास नहीं होगा, चमके इंजीनियरों ने चमका दिया न्यारा बंगला

-6 माह पूर्व डॉक्टर द्वारा खाली किए बंगले में अधिकारी ने कराई पुख्ता मरम्मत।
-रंगाई-पुताई के अलावा टॉयलेट, वॉशरूम की टाइल्स तुड़वा लगवाई नई।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में वैसे तो आम तौर पर अफसरों के बंगलों की प्राथमिकता से मरम्मत की जाती है। लेकिन तमाम बिल पास करने वाले विभाग का कोई छोटा अधिकारी भी हो तो आनन-फानन सुनवाई होना लाजमी है।
बात यहां रेलवे कॉलोनी रोड नंबर एक स्थित बंगला नंबर (क्वार्टर) 948 तथा इसमें रहने वाले अधिकारी को लेकर की जा रही है। डॉक्टर के खाली करने के बाद लेखा विभाग के एक अधिकारी यहां रहने आए। तब जिम्मेदारों ने इसमें पुख्ता मरम्मत कर अदद जिम्मेदारी निभा दी।
विभागीय सूत्र बताते है कि आईओडब्ल्यू के इंजीनियरों पर दबाव था। वे बंगले की मरम्मत नहीं करेंगे तो उनके अन्य बिल भी पास नहीं किए जाएंगे। फिर क्या था, ताबड़तोड़ मेंटेनेंस शुरू कर दिया गया।

बाउंड्री वॉल से लेकर कर दिए पूरे काम

इस बंगलेनुमा क्वार्टर की कहानी यह है कि पहले इसमें रेलवे अस्पताल में पदस्थ डॉ. अभिषेक जोशी रहते थे। हालांकि इस बंगले में पर्याप्त सुविधाएं थी। लेकिन उन्हें और सुविधायुक्त मकान मिल गया। वे इस क्वार्टर को छोड़कर चले गए। करीब 6 माह पूर्व मुंबई से तबादला होकर आए लेखा विभाग के अधिकारी एडीएफएम कृष्ण कुमार को यह बंगला आबंटित हुआ। इसके बाद इस बंगलें को और भी सुविधायुक्त व सुरक्षित बनाने का क्रम फिर से शुरू हुआ। विभागीय सूत्र बताते है कि बंगले में रंगाई-पुताई के अलावा टॉयलेट व वॉशरूम की टाइल्स बदली गई। इतना ही नहीं लोहे की एंगलनुमा बाउंड्रीवाल भी बनाई गई। वहां अभी भी काम जारी है। मामले में रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा का पक्ष जानना चाहा। मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

इसलिए भी हो रहा शासकीय धन का दुरूपयोग

दरअसल, रेल मंडल से हर साल बजट के लिए ग्रांट व्हाया पश्चिम रेलवे मुख्यालय से रेलवे बोर्ड भेजी जाती है। इसमें अलग-अलग मदों में हर साल राशि बढ़ाकर मांगी जाती है। यह राशि रेलवे की छोटी-बड़ी योजनाओं के अलावा शासकीय खर्च में उपयोग की जाती है। स्टेशन के काम होते है। वेतन-भत्तों पर खर्च के अलावा क्वार्टर्स व बंगलों की मरमत के नाम पर भी राशि का उपयोग किया जाता है। बंगलों के नाम पर बढ़कर आई राशि लेप्स न हो। इसलिए इसका जैसे-तैसे उपयोग कर लिया जाता है। शासकीय धन के दुरूपयोग की मुख्य वजह यह भी रहती है। कई बार एक मद की राशि का दूसरे कामों में उपयोग कर इसके मुताबिक ऑडिट भी करवा लिया जाता है।

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