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अमृत भारत स्टेशन योजना: अपनों को अमृत बांटने की जुगत में विषधारी

-इलेक्ट्रिकल पावर विभाग द्वारा लगभग 7 करोड़ के टेंडर में कुछ भी साफ नही ।
एक ही फर्म को मिला लाभ, नियमों को बेपटरी कर गए जिम्मेदार।
-ब्रांडेड नामी कंपनी द्वारा डीआरएम को की लिखित में शिकायत।

न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। रेल मंत्रालय द्वारा रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट की शक्ल देने व सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपए की अमृत भारत स्टेशन योजना के एलान के बाद इसे लागू किए जाने पर यात्रियों को कितना लाभ मिलेगा, यह भविष्य में ही सामने आ सकेगा। मगर इसकी तैयारियों के लिए निकले जा रहे टेंडर की प्रकिया आशंकाओं के घेरे में आने लगे है।
ताजा मामला रतलाम रेल मंडल के इलेक्ट्रिकल पावर विभाग द्वारा इलेक्ट्रिक सामग्री सप्लाई के लिए निकले गए टेंडर व इसकी अस्पष्ट, आधी अधूरी जानकारी व उलझनभरी प्रकिया को लेकर है। बताया जा रहा कि टेंडर के प्रारूप में दर्ज जानकारियों को नामी कम्पनियां भी नही समझ पाई। इसके बाद 18 से 19 प्रतिशत बिलो में एक फर्म के नाम टेंडर जारी कर देने की भी बात सामने आई है। मामले में एक नामी कंपनी द्वारा डीआरएम रजनीश कुमार को लिखित शिकायत कर दी है। इसमें अनियमितता का हवाला दिया गया है। अन्य फर्म के संचालक भी लामबंद होने लगे है।

टेंडर की जानकारियां अस्पष्ट

इलेक्ट्रिकल पावर विभाग द्वारा अमृत स्टेशन योजना के लिए रेल मंडल के 16 स्टेशनों पर लाइटिंग के लिए अप्रैल माह में 3 प्रमुख टेंडर निकले गए। 10.4.2023 को टेंडर क्रमांक इएल 2022-30 के तहत 21038144 रुपए का टेंडर निकाला गया। दूसरा 11.4.2023 को 73 लाख रुपए तथा एक अन्य 4 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया। टेंडर में जानकारियां बेहद ही चतुराई से दर्ज की गई। इससे कि टेंडर में अन्य कोई फर्म शामिल हो ही न सके। ऐसा संभव नही की विभाग प्रमुख इस अनियमितता से वाकिफ नही है। नियम कायदों का जमकर उल्लंघन करने के आरोप लगे है। इस मामले में रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा का कहना है कि अमृत भारत स्टेशन योजना का पूरा प्रारुप मुख्यालय व रेलवे बोर्ड से संबंधित है। इसमें किसी की मनमानी संभव नही है।

चहेते रिटायर्ड कर्मचारी को ही लाभ क्यों

इलेक्ट्रिकल पावर विभाग की टेंडर संबंधी अनियमितताओं को लेकर रेल मंडल सहित देशभर के ठेकेदारों में चर्चा अन्य मायने से भी है। कहा जा रहा है कि विभाग प्रमुख द्वारा पूर्व में चहेते एक कर्मचारी की तथाकथित फर्म को ही लाभ दिया जाता रहा है। यह सिलसिला कर्मचारी के रिटायर्ड होने तक जारी है। हालांकि कर्मचारी द्वारा भतीजे, भांजे सहित तमाम रिस्तेदारों के नाम 3 से 4 फर्म बना ली गई है। हर बार इन्ही मे से किसी को टेंडर देकर सीधा एक ही फर्म को लाभ दिया जा रहा है। इस खेल के पीछे विभाग के जिम्मेदारों की मंशा भी पूरी कर दी जा रही है।

टेंडर में बिंदुवार कई अनियमितता के चुनिंदा उदाहरण:-

-स्टेशनों पर फ़साड लाइटिंग लगाई जाएगी। 16 स्टेशनों पर बिल्डिंग पर किस तरह की लाइटिंग लगानी है। कैसी सप्लाई करना है। टेंडर में स्प्ष्ट नही है।
-फ़साड लाइटिंग यानी बिल्डिंग के स्वरूप के मान से एक ही रंग व रोशनी की कितनी लाइटिंग की जाना है।
-अलग-अलग स्टेशनों पर लाइटिंग का स्वरूप के बारे में भी कोई उल्लेख नही किया गया।
-स्टेशनों पर एलइडी लाइट को लेकर भी कई जानकारियां अस्पष्ट है।

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