स्पीड दी खरगोश की, चाल अभी भी कछुआ… रतलाम मंडल में करोड़ों खर्च के बाद भी ‘लेटलतीफ’ हैं ट्रेनें, तेजस-राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के यात्री भी परेशान
जलज शर्मा, न्यूज़ जंक्सन-18
रतलाम। भारतीय रेलवे द्वारा मुंबई-दिल्ली रूट पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और पटरियों को अपग्रेड करने के तमाम दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। जुलाई के आधा माह गुजरने वाला है। लेकिन नए टाइम टेबल की सुगबुगाहट तक नहीं है। इसलिए रतलाम मंडल में ट्रैक की क्षमता और ट्रेनों की स्पीड बढ़ाए जाने के बावजूद टाइम शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नतीजा यह है कि लाखों यात्री आज भी पुराने समय के अनुसार ही यात्रा करने को मजबूर हैं। उन्हें करोड़ों रुपए के इस अपग्रेडेशन का कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। बड़ी बात यह है कि दिल्ली-मुंबई मार्ग पर यात्री ट्रेनों का परिचालन बाधित न हों। इसके लिए रेलवे ने डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर के तहत अधिकांश मालगाड़ियों के रूट बदल दिए गए है। स्पीड बढ़ाने के अलावा अवरोध दूर करने कई तकनीकी का इस्तेमाल किया गया। बावजूद ट्रेनें सालों पुराने समय से आ-जा रही है। राजधानी एक्सप्रेस के परिचालन में 16 सालों में बमुश्किल आधे घंटे का ही लाभ मिला।
तेजस-राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेन का भी यही हाल:- देश की सबसे वीआईपी और प्रीमियम ट्रेनों में शुमार 12951/12952 मुंबई सेंट्रल – नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस भी इस अव्यवस्था का शिकार है। ट्रैक की स्पीड क्षमता बढ़ने के बाद उम्मीद थी कि यह ट्रेन अपने पुराने समय से काफी पहले गंतव्य तक पहुंचेगी। जिससे यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी। लेकिन ऐसा हुआ नही। जानकारों के मुताबिक, बढ़े हुए स्पीड ट्रायल और ट्रैक अपग्रेडेशन के बाद मुंबई सेंट्रल से नई दिल्ली के बीच यात्रा समय में करीब 1 से 1.5 घंटे तक की कमी आ जानी चाहिए थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि तेजस राजधानी आज भी अपने पुराने और धीमे शेड्यूल के अनुसार ही आ-जा रही है। यात्री प्रीमियम किराया देने के बावजूद सुपरफास्ट स्पीड का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। जबकि वर्ष 2021 में एलएचबी रैक्स को अपग्रेड करके इसे ‘तेजस राजधानी’ का दर्जा दिया गया है। अलबत्ता इस ट्रेन का किराया भी विमान सेवा के मुताबिक ही है।
दर्जनों ट्रेनें प्रभावित, ग्वालियर-भिंड और इंदौर रूट के यात्री भी ठगे गए:- यह समस्या केवल राजधानी एक्सप्रेस तक सीमित नहीं है। रतलाम मंडल से गुजरने वाली दर्जनों अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों के समय में भी कोई सुधार नहीं हुआ है। उदाहरण के तौर पर ग्वालियर-भिंड-रतलाम एक्सप्रेस को ही ले लीजिए। इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों के यात्री भी पुराने ढर्रे पर ही यात्रा कर रहे हैं। इंदौर – दौंड (डोंड) एक्सप्रेस सहित मुंबई-दिल्ली के बीच चलने वाली तमाम सुपरफास्ट और मेल ट्रेनें ट्रैक खाली होने के बावजूद धीमी गति से चलने को मजबूर हैं।
करोड़ों खर्च, पर नतीजा ‘ढाक के तीन पात’:- रेलवे ने मुंबई-दिल्ली मुख्य मार्ग पर 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने के लिए ट्रैक का सुदृढ़ीकरण किया गया। आधुनिक सिग्नल प्रणाली लगाई और करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए। लेकिन जब तक रेलवे बोर्ड और पश्चिम रेलवे मिलकर नया ‘स्पीड-बेस्ड’ टाइम टेबल लागू नहीं करते है। तब तक इस भारी-भरकम निवेश का आम जनता को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है।
<span;>फिलहाल स्थिति यह है कि ट्रेनें बीच के स्टेशनों पर समय काटने के लिए जानबूझकर धीमी कर दी जाती हैं। या उन्हें आउटर पर खड़ा रख दिया जाता है। ताकि वे अपने पुराने (लेट) शेड्यूल के मुताबिक ही स्टेशन में प्रवेश करें। यात्री अब सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से रेल मंत्रालय से गुहार लगा रहे हैं कि जल्द से जल्द ट्रेनों के समय में सुधार कर बढ़े हुए घंटों का लाभ उन्हें दिया जाए। मामले में जेडआरयूसीसी सदस्य शिवलहरी शर्मा का कहना है कि रेलवे हर जुलाई में ट्रेनों के नया टाइम टेबल लागू करता है। रेलवे द्वारा इस बार ऐसा नहीं करना समझ से परे है। क्योंकि रूट पर करोड़ों रुपए खर्च कर आमूलचुक बदलाव किए है। मामले में जोनल रेलवे परिचालन अधिकारी का कहना है कि ट्रेनों के समय बदलाव रेलवे बोर्ड की मंजूरी पर बदला जाता है। जनवरी में आंशिक बदलाव किया गया था।
राजधानी के वर्ष 2010-26 के बीच परिचालन बदलाव की स्थिति:- दरअसल वर्ष 2010 में इस ट्रेन का नंबर 2951 (मुंबई से दिल्ली) और 2952 (दिल्ली से मुंबई) हुआ करता था। दिसंबर 2010 में भारतीय रेलवे ने सभी ट्रेनों के नंबरों को 5-डिजिट का कर दिया था। ऐसे में वर्ष 2026 में इसका ट्रेन नंबर 12951 (मुंबई सेंट्रल से नई दिल्ली) और 12952 (नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल) है। ट्रैक अपग्रेडेशन और ट्रेन की रफ्तार (स्पीड) बढ़ने के कारण पिछले 16 वर्षों में यात्रा के समय में करीब 20 से 40 मिनट की कमी आई है।
राजधानी फेरों के परिचालन घंटे की तुलना
ट्रेन नंबर 12951: मुंबई सेंट्रल से नई दिल्ली:- वर्ष 2010 में यह ट्रेन मुंबई सेंट्रल से शाम 16:40 बजे रवाना होती थी। अगले दिन सुबह 08:30 बजे नई दिल्ली पहुंचती थी। तब यात्रा का कुल समय 15 घंटे 50 मिनट होता था। वर्ष 2026 में अब यह ट्रेन मुंबई सेंट्रल से शाम 17:00 (05:00 PM) बजे निकलती है और अगले दिन सुबह 08:32 AM पर नई दिल्ली पहुंचती है। वर्तमान यात्रा के घंटे 15 घंटे 32 मिनट लग रहे है।
ट्रेन नंबर 12952: नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल – वर्ष 2010 में: यह ट्रेन नई दिल्ली से शाम 16:30 बजे रवाना होती थी। अगले दिन सुबह 08:30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचती थी। तब यात्रा का कुल समय 16 घंटे 00 मिनट होता था।
-वर्ष 2026 में अब यह ट्रेन नई दिल्ली से शाम 16:55 (04:55 PM) बजे रवाना होती है और अगले दिन सुबह 08:35 AM पर मुंबई सेंट्रल पहुंचती है। वर्तमान यात्रा के घंटे 15 घंटे 40 मिनट निर्धारित है।
रतलाम मंडल के ऐसे उदाहरण:- ट्रेन नंबर 11126 रतलाम इंटरसिटी एक्सप्रेस शाम 7.50 बजे ग्वालियर से रवाना। दूसरे दिन सुबह 10 बजे रतलाम। 680 किमी दूरी तक़रीबन14 घंटे में तय कर रही है। इसी तरह ट्रेन संख्या 11125 ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेस शाम 5.25 बजे रतलाम से रवाना की जाती है। दूसरे दिन सुबह 7.37 बजे ग्वालियर स्टेशन पहुंचती है। इस मार्ग पर कुछ किमी पर ही सिंगल लाइन है। जबकि बाकी का सेक्शन डबलिंग कर दिया गया है। लेकिन यह ट्रेन पुराने समय के मुताबिक चलाई जा रही है।
स्पीड बढ़ाने के लिए किए ऐसे जनत, करोड़ों रुपए खर्च:-
-मुंबई-दिल्ली रेल कॉरिडोर:- ट्रेनों की रफ्तार को 130 किमी/घंटा से बढ़ाकर 160 किमी/घंटा करने के लिए पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में बुनियादी ढांचे को पूरी तरह अपग्रेड किया गया है। इसके तहत मुख्य रूप से ‘मिशन रफ़्तार’ के अंतर्गत कई बदलाव किए। बावजूद फिलहाल यात्रियों को इसका ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा है।
– लूप और कर्व का सीधा करना:- तेज रफ्तार पर ट्रेनों के पलटने या असंतुलित होने के खतरे को कम करने के लिए ट्रैक के घुमावों को तकनीकी रूप से सीधा या कम किया गया है। ताकि 160 किमी/घंटा की गति पर भी ट्रेन बिना गति धीमे किए निकल सके।
– H-बीम स्लीपर्स और भारी गर्डर्स:- पुराने कंक्रीट और स्टील चैनल स्लीपर्स को हटाकर उच्च क्षमता वाले ‘H-बीम स्लीपर्स लगाए गए हैं। इसके अलावा, भारी ट्रेनों का दबाव झेलने के लिए पुलों पर भारी पीएससी गर्डर्स बदले गए हैं।
– गोधरा-नागदा सेक्शन:- रतलाम मंडल के अंतर्गत आने वाले लगभग 228 किलोमीटर लंबे नागदा-गोधरा खंड पर पटरियों को पूरी तरह अपग्रेड कर हाई-स्पीड ट्रेनों (जैसे वंदे भारत और तेजस) के अनुकूल बनाया गया है।
-कैटल फेंसिंग और कंक्रीट दीवारें:- 160 किमी/घंटा की रफ्तार पर मवेशियों या इंसानों का ट्रैक पर आना बेहद जानलेवा हो सकता है। इससे बचने के लिए रतलाम मंडल के संवेदनशील इलाकों (विशेषकर नागदा-गोधरा के बीच लगभग 83 किमी के हिस्से) में ट्रैक के दोनों ओर कंक्रीट की बाउंड्री वॉल और मजबूत मेटल फेंसिंग खड़ी की गई है।
– लेवल क्रॉसिंग (फाटकों) का खात्मा:- मंडल ने पटरियों के बीच आने वाले मानवयुक्त और मानवरहित रेलवे फाटकों को बंद करके वहां रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज का निर्माण किया है। जिससे ट्रेनें बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़ सकें।
– अपग्रेड के तहत कवच प्रणाली:- ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकने और खराब मौसम (जैसे कोहरे) में भी तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए इस रूट पर भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को स्थापित किया जा रहा है।
– OHE और कैटेनरी सिस्टम का अपग्रेड:- हाई-स्पीड ट्रेनों को लगातार और भारी मात्रा में बिजली की आपूर्ति चाहिए होती है। इसके लिए पारंपरिक ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) लाइनों को – 25×2 KV (किलोवोल्ट) सिस्टम में बदला गया है। ताकि हाई-स्पीड इंजनों को बिना किसी ट्रिपिंग के लगातार पावर मिलती रहे।
