रेलवे स्कूल में सौर ऊर्जा प्लांट का अभिनव प्रयोग….30 किलोवाट का का बनाया सौर-आधारित पार्किंग शेड, ऊपर बिजली उत्पादित, नीचे वाहनों की पार्किंग
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल की है। रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल, रतलाम में स्थापित 30 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का पुनर्स्थापन कर उसे सौर-आधारित पार्किंग शेड के रूप में विकसित किया है। शेड से बिजली उत्पादित होगी। वहीं नीचे वाहनों की पार्किंग की जा सकेगी।
इस परियोजना का लोकार्पण मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।
दरअसल सौर ऊर्जा संयंत्र पहले से ही विद्यालय भवन की छत पर स्थापित था। लेकिन विद्यालय के नवीनीकरण एवं पुनर्विकास कार्य के कारण छत खाली करनी जरूरी थी। इसलिए संयंत्र को हटाना ही एकमात्र विकल्प था। ऐसे में रतलाम मंडल के विद्युत विभाग ने इसे हटाने के बजाय नए स्वरूप में विकसित करने का निर्णय लिया। संयंत्र को सोलर आधारित पार्किंग शेड के रूप में पुनः स्थापित किया।

स्थान का बेहतर उपयोग:- सौर-आधारित पार्किंग शेड में जहॉं एक ओर बिजली का उत्पादन होगा। वहीं दूसरी ओर वाहनों को छाया भी मिलेगी। इस व्यवस्था से उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग हुआ है। पहले से स्थापित सौर संयंत्र का पुनः उपयोग संभव हुआ है तथा अतिरिक्त पार्किंग सुविधा भी विकसित हुई है।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि यह रतलाम मंडल की अपनी तरह की पहली (पायलट) परियोजना है। इस मॉडल के सफल होने के बाद भविष्य में ऐसे रेलवे परिसरों में भी इसे अपनाया जा सकेगा। जहां भवनों के पुनर्विकास या सीमित छत उपलब्ध होने के कारण पारंपरिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करना संभव नहीं होता।
लोकार्पण अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने इस नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन और पार्किंग सुविधा को एक साथ जोड़ने की यह अवधारणा संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर लेफ्टिनेंट डी.के. प्रजापति सहित इस परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने भी इसे भारतीय रेल में नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। 30 किलोवाट क्षमता का यह सौर- आधारित पार्किंग शेड पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल की हरित ऊर्जा में बढ़ोतरी के साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा सतत रेलवे अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। साथ ही यह परियोजना भविष्य में अन्य रेलवे मंडलों एवं सरकारी संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित हो सकती है।
