गुलाब चक्कर संरक्षण कार्य की सराहना….जोधपुर रियासत के पूर्व महाराजा गजसिंह ने पूर्व कलेक्टर राजेश बाथम को भेजा सम्मान पत्र
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम के ऐतिहासिक गुलाब चक्कर स्मारक के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य की सराहना करते हुए जोधपुर रियासत के पूर्व महाराजा एवं वर्ल्ड मॉन्यूमेंट्स फंड के चेयरमैन गजसिंह ने मध्यप्रदेश शासन के अपर सचिव तथा रतलाम के तत्कालीन कलेक्टर राजेश बाथम को सम्मान पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने विरासत संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
उम्मेद भवन पैलेस, जोधपुर से जारी पत्र में गजसिंह ने कहा है कि गुलाब चक्कर स्मारक का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भावी पीढ़ियों तक सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे प्रयास ऐतिहासिक स्मारकों की पहचान को संरक्षित करने के साथ समाज में इतिहास और परंपरा के प्रति जागरूकता भी बढ़ाते हैं।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि जनभागीदारी और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि के सहयोग से संपन्न इस कार्य ने रतलाम की ऐतिहासिक विरासत को नए स्वरूप में सामने लाने का प्रयास किया है। इससे स्थानीय लोगों में धरोहर संरक्षण के प्रति रुचि और सहभागिता भी बढ़ी है।
गजसिंह ने सम्मान पत्र में राजेश बाथम के प्रयासों, प्रशासनिक नेतृत्व और लोकहित के कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी विरासत संरक्षण और जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय योगदान देने की शुभकामनाएं दी हैं।
गजसिंह वर्तमान में वर्ल्ड मॉन्यूमेंट्स फंड के चेयरमैन हैं तथा विरासत संरक्षण से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों से जुड़े रहे हैं। वे समय-समय पर संस्कृति, विरासत संरक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी करते रहे हैं।
365 दिनों में 220 आयोजन:- उल्लेखनीय है कि संरक्षण कार्य के बाद गुलाब चक्कर रतलाम में सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां नियमित रूप से निःशुल्क सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान 365 दिनों में से 220 दिनों तक गीत-संगीत, नृत्य, कवि सम्मेलन और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों और नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध होने के साथ आमजन को भी सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला।
