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मंदसौर टावर वेगन डिरेलमेंट का फंसा पेंच….मामले को दबाने में उलझे जिम्मेदारी, व्हील बदलना पड़ रहा भारी

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे की इलेक्ट्रिक लाइन ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) मेंटेनेंस के काम आने वाली टावर वेगन का लापरवाह परिचालन अब जिम्मेदार अधिकारियों का सिरदर्द बढ़ाने लगा है। 6 जून 2026 को हुए इस टावर वेगन डिरेलमेंट मामले में अब परतें और खुल रही हैं। रेलवे के नियमों के मुताबिक, किसी भी डिरेलमेंट (पटरी से उतरने) की घटना के तुरंत बाद सीनियर स्केल अधिकारियों की जॉइंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट (Joint Inspection Report) तैयार होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में जो ‘पेच’ फंसा है, वह इसी रिपोर्ट और जांच की दिशा को लेकर है। दुर्घटना में टावर वेगन के व्हील क्षतिग्रस्त होने से तकनीकी रूप से इसे परिचालन में अयोग्य माना गया है। दूसरी ओर जिम्मेदार इस मामले को दबाकर जैसे-तैसे टावर वेगन की रिपोर्ट ओके करवाना चाह रहे है।
बता दें कि 6 जून को टावर वेगन क्रमांक 220007 को लोको पायलट इदरीस मंसूरी ड्राइवर चलाकर जा रहे थे। तभी मंदसौर टावर वेगन डिपो के सामने वेगन बेपटरी हो गई। इसके बाद इसे पैसेंजर यार्ड लोको शेड रतलाम में लाया गया। यहां जांच के बाद टीएक्सआर ने मेंटेनेंस के लिए वेगन को सीधे डीजल शेड ले जाने को कहा गया। शेड से इसे जब वापस फिट (ट्रेक पर चलने योग्य सर्टिफिकेट) के लिए लाया गया। तब पैसेंजर यार्ड के टीएक्सआर ने व्हील बदलने की बाध्यता बताई गई। टावर वेगन को 40 किमी प्रतिघंटा की स्पीड में दाहोद या डीजल शेड ले जाने की सलाह दी ही।

इसलिए फंसा पेंच:- दरअसल टावर वेगन डिरेलमेंट को टीआरडी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामला जैसे-तैसे रफा-दफा करने मूड में है। इससे कि यह मामला रतलाम मंडल से बाहर जोन मुख्यालय व जीएम तक नहीं पहुंचे। लेकिन अब इसमें तकनीकी विभागों की अपनी जिम्मेदारियों को दरकिनार नहीं करते हुए टावर वेगन को नियमों से व्हील बदलने का पेंच फंसा दिया गया है।।

​हर दुर्घटना में मुख्य विवादित ऐसे बिंदु रहते हैं:
1. जॉइंट रिपोर्ट में देरी और मतभेद:- ​आमतौर पर हादसे के तुरंत बाद मौके का मुआयना करके रिपोर्ट बन जाती है। लेकिन यहाँ जिम्मेदार अधिकारी (जैसे इंजीनियरिंग, ओएचई, और ऑपरेटिंग विभाग) एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे हैं।
2. ट्रैक की खराबी बनाम वेगन की स्पीड:- एक तरफ ट्रैक की कमियों (इंजीनियरिंग विभाग) को छुपाने की कोशिश हो रही है। तो दूसरी तरफ वेगन के संचालन या उसकी गति (ऑपरेटिंग/लोको स्टाफ) पर बात टाली जा रही है।
​3. ग्राउंड स्टाफ को बलि का बकरा बनाने का प्रयास:- ​विभागीय गलियारों में चर्चा है कि ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों को बचाने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों (जैसे साइट पर तैनात की-मैन/गैंगमैन) पर पूरा ठीकरा फोड़ने की तैयारी की जा रही है। ताकि मामले को “मानवीय भूल” बताकर रफा-दफा किया जा सके।
4. सेफ्टी से समझौता:- टावर वेगन का काम ही रेलवे के ओवरहेड तारों और ट्रैक की सुरक्षा को दुरुस्त रखना होता है। अगर वही डिरेल हो जाए, तो यह पूरे सेक्शन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी बदनामी से बचने के लिए मामले को दबाने और मीडिया या उच्च अधिकारियों तक सही तथ्य न पहुंचने देने का खेल चल रहा है।

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