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ये कैसा डेवलपमेंट….रेलवे में बन रहे सीसी रोड की गुणवत्ता पर सवाल, बगैर पर्याप्त बेस के डाल रहे मटेरियल का घोल

 

-रेलवे स्टेशन व्हाया फ्रीगंज बायपास सीसी रोड से भी नहीं लिया सबक।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में डेवलपमेंट के नाम पर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी नजदीकी ठेकेदारों को मनमाना वर्क देकर शासकीय बजट का मटियामेट करने तुले है। तकरीबन सीसी रोड के घटिया निर्माण की श्रृंखला में अब बकरा पुल के पास के एरिया में ऐसा ही कमीशनखोरी का नया खेल शुरू कर दिया गया है। यहां तय मापदंड व मानक स्तर की सामग्री का उपयोग न करते हुए नए सीसी रोड निर्माण की अच्छे से बेंड बजाई जा रही है। इंजीनियरिंग विभाग के बेशर्म सीनियर अफ़सर झांकने नहीं आ रहे कि ठेकेदार सड़क के लिए उपयोग में आने वाले मटेरियल का कैसे फालूदा बना रहे है।
बता दें कि तीन साल पहले रेलवे स्टेशन व्हाया फ्रीगंज बायपास पर सीसी रोड बनाया गया था। तब लोकार्पण के दो माह में ही सड़क से प्लास्टर उखड़ने लगा था। बेशर्म जिम्मेदारों ने रिपेयरिंग की लीपापोती कर ली थी। अब उसी ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने के बजाय मंडल में और भी काम दे दिए गए। वर्तमान के फ्रीगंज बायपास की दशा बेहद ही खराब हो गई। स्टेशन से आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी होने लगी है।

पर्याप्त बेस के बगैर निर्माण:- बकरा पुल के पास बनाए जा रहे सीसी रोड पर सीमेंट-कांक्रीट के घोल को जैसे केवल लीपा जा रहा है। इसके निर्माण में तकनीकी तौर पर बेस तक नहीं बनाया गया। मामले में इस काम को करवाने वाले पेटी कांट्रेक्ट श्याम डागा का कहना है कि जमीन के अंदर केबल है। इसलिए अधिकारियों ने खुदाई के लिए मना किया है।
इधर, रहवासियों का कहना है कि यदि जमीन में केबल है तो सीसी रोड की मंजूरी क्यों दी गई। इसके बजाय डामरीकरण करवाया जाना था।

एक्सपर्ट के नजरिए से ऐसे सीसी रोड निर्माण जरूरी :-

– सबसे पहले सड़क की जगह से झाड़ियों, कंकड़-पत्थरों और पुरानी सतह हटाना रहती है।
– सड़क के समतलीकरण के बाद पानी निकासी के लिए एक तरफ हल्का ढलान ज़रूर है।
– ज़मीन को अच्छी तरह रोलर या थंपर से दबाकर कॉम्पैक्ट किया जाए।
– इसके ऊपर 4 से 6 इंच मोटी क्रशर डस्ट, मुर्रम या गिट्टी की परत बिछाकर अच्छी तरह दबाना। यह सड़क को धंसने से बचाता है।
– सड़क का आकार और मोटाई तय करने के लिए किनारों पर लकड़ी या लोहे के मज़बूत सांचे लगाने आवश्यक।
– यदि भारी वाहनों का आवागमन होना है, तो कंक्रीट के नीचे 6-8 मिमी के स्टील जाल का इस्तेमाल जरूरी।
– आम रास्तों के लिए 1 हिस्सा सीमेंट, 2 हिस्सा रेत तथा 4 हिस्सा गिट्टी/एग्रीगेट) का रेश्यो होना चाहिए।
– कंक्रीट को सांचों में भरते समय नीडल वाइब्रेटर का उपयोग रहना चाहिए। ताकि कंक्रीट के अंदर की हवा बाहर निकल जाए और दरारें न पड़ें।
– लकड़ी के फट्टे या ट्रॉवेल की मदद से सतह को बिल्कुल चिकना किया जाना जरूरी।
-कंक्रीट सूखने पर सिकुड़ता है। इसलिए अल्टरनेट पैनल विधि (एक छोड़कर एक ब्लॉक) में ढलाई किया जाए।
– सड़क के सूखने के बाद सीसी रोड की मजबूती के लिए कम से कम 10 से 15 दिनों तक तराई करना ज़रूरी है।

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