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विजिलेंस की ये कार्रवाई चर्चा में….एआरटी कैश इम्प्रेस्ट घोटाला, रतलाम मंडल के दाहोद स्टेशन के SSE को जांच के दायरे में लिया

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। Indian Railways के रतलाम मंडल में विजिलेंस कार्रवाई से जुड़ा एक मामला इन दिनों ख़ासा चर्चा में है। बताया जा रहा कि आरोप की पुष्टि भी हुई है। अब विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई होना संभावित माना जा रहा है।

दरअसल यह मामला दाहोद रेलवे स्टेशन पर कार्यरत SSE (C&W) भरत पुष्कर से जुड़ा है। ये विजिलेंस जांच के दायरे में आए हैं। सूत्रों के अनुसार ART (एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन) के कैश इम्प्रेस्ट के कथित दुरुपयोग एवं अन्य गतिविधियों को लेकर जांच किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मामले में रेलवे प्रशासन या विजिलेंस विभाग की ओर से आधिकारिक विस्तृत बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन विजिलेंस ने कार्रवाई के दौरान कम्यूटर सेट सीज किया है। इसमें पिछले 4 साल के कैश इम्प्रेस्ट बिल का डाटा था। बताया जा रहा कि विजिलेंस जांच के वक्त गहमागहमी भी हुई। इसमें कर्मचारी ने विजिलेंस को किसी अधिकारी की रिश्तेदारी का हवाला देते धमकाया भी था।
जिस कर्मचारी को दायरे में लिया वह वर्ष 2014 से दाहोद में ही पदस्थ हैं। ऐसे में कर्मचारियों और रेलवे से जुड़े लोगों के बीच प्रशासनिक पारदर्शिता एवं निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जबकि रेलवे बोर्ड की ट्रांसफर नीति का सख्ती से पालन किए जाने के नियम साफ है। ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे और विभाग की छवि प्रभावित न हो। ऐसे में यदि समय-समय पर संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाए। तब ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।

और भी कर्मचारी लंबे समय से पदों ओर आसीन:- सूत्रों के अनुसार कैरिज विभाग में कई कर्मचारी लंबे समय से संवेदनशील पदों पर कार्यरत हैं। इनमें भूपेंद्र राम (SSE), राघवेंद्र सिंह (JE), रामदेव जैन (SSE), दयाराम मीणा (SSE), अनिल मीणा SSE, चंद्रेश जैन SSE, सरफराज खान SSE नाम चर्चा में हैं। ये सभी कर्मचारी रतलाम मंडल के अलग-अलग स्टेशनों पर कार्यरत है। हालांकि इन कर्मचारियों के खिलाफ किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई या आरोप की पुष्टि नहीं हुई है।
रेलवे प्रशासन की आगामी कार्रवाई और विजिलेंस जांच की रिपोर्ट पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

कैश इम्प्रेस्ट का दबा-छिपा घोटाला, अधिकारी की आंखेंमूंदी:- रेल मंडल स्तर पर किसी भी स्टेशन पर ट्रेन दुर्घटना के मौके आए। तब त्वरित राहत व बचाव के लिए रेलवे ने रतलाम सहित दाहोद, चित्तौड़गढ़, महू सहित अन्य स्टेशनों पर दुर्घटना राहत ट्रेन (एआरटी) की तैनाती कर इनके इंचार्ज नियुक्त किए है। वहीं दुर्घटना राहत चिकित्सा उपकरण (एआरएमई) ट्रेन की रतलाम स्टेशन पर तैनाती की गई। जिन स्टेशनों पर एआरटी के इंतजाम है। इसके रखरखाव सहित छोटे-मोटे उपकरण खरीदी के लिए 12 हजार रुपए कैश इम्प्रेस्ट राशि हर माह स्वीकृत की जाती है। इनकी बिलिंग जांच को लेकर अधिकारी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यहीं वजह है कि दाहोद में विजिलेंस को कैश इम्प्रेस्ट राशि व बिलिंग को लेकर गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसकी जांच की गाज एकाउंट्स विभाग के जिम्मेदारों पर भी गिरने की संभावना है। जहां से बगैर जांच के बिल पास किए गए थे।

इसलिए भी बढ़ रहा भ्रष्टाचार:- रतलाम मंडल में इंजीनियरिंग विभाग, कार्मिक विभाग, एकाउंट्स विभाग, सीएंडब्ल्यू विभाग, कमर्शियल विभाग, एसएंडटी विभाग सहित अन्य प्रमुख विभागों में अभी भी कई खास कर्मचारी टेंडर से जुड़े कामों की टेबलों पर लंबे समय से कार्यरत है। असल में एक ही पद पर किसी कर्मचारी की पदस्थी के पीछे विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारियों का वरदहस्त रहता है। ये कर्मचारी ठेकेदारों से जुड़े कामों में सीधी मध्यस्थता कर अफसरों को चांदी कटवाते रहे है। बल्कि खुद भी भ्रष्टाचार की मलाई चाटते रहे है। यहीं वजह है कि आवधिक तबादलों की अवधि पूरी होने पर दिखावे का आदेश जारी किया जाता। जबकि असल में टेंडर से जुड़े काम स्वयं उन कमाऊ कर्मचारियों के जिम्मे रहते है। इन मामलों को विजिलेंस का दखल भी बेअसर साबित होता है। पिछले दिनों कमर्शियल विभाग में विजिलेंस की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद अभी भी सीएमआई खरीदी से जुड़े काम को बखूबी अंजाम दे रहे है।

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