न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे सैलरी अकाउंट से संबंधित बैंकों की रेलवे सैलेरी पैकेज योजना की बीमा स्किम में बैंक प्रबंधन की दोहरी नीति उजागर होने लगी है। बैंक प्रबंधकों की मनमानी कार्यशैली का खामियाजा मृतक रेलवे कर्मचारी के परिजनों को उठाना पड़ रहा है। क्योंकि उनके खाते सैलेरी अकाउंट स्किम के अधीन होते हुए भी परिजनों को अब तक बीमा राशि भुगतान का लाभ नहीं मिला है।
दोहरी नीति यह है कि रेलवे के यूनियन बैंक से जुड़े सैलेरी अकाउंट वाले दिवंगत कर्मचारियों के मामलों में बकायदा कार्यवाही हुई है। कर्मचारियों के निधन पर बकायदा परिजनों को 10 लाख रुपए का क्लेम भुगतान हुआ है। जबकि समान मामलों में एसबीआई के खाताधारकों के निधन के बाद परिजनों को क्लेम राशि भुगतान के लिए बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ रहे है। इस मामले में गुरुवार को सीनियर डीपीओ सोमनाथ कैलाश गायकवाड़ ने बैंक मैनेजर्स के साथ मीटिंग की। इसमें बैंक की ओर से भुगतान के लिए तकनीकी पेंच बताया है।

इधर, न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा 14 मई को मामले की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की है। इसके बाद रेलवे प्रशासन भी अपने कर्मचारियों के हित में एक्शन मोड में आया है। गुरुवार को ही बैंक स्टाफ को चर्चा के लिए डीआरएम बुलवाया। सीनियर डीपीओ गायकवाड़ ने मामले में वैधानिक कार्यवाही को लेकर जानकारी ली। मामले में डीआरएम अश्वनी कुमार का कहना है। रेलवे सैलेरी स्किम का मामला बैंक स्तर का है। बीमा राशि भुगतान के लिए एकाउंट स्किम के दायरे में रहना जरूरी है। शायद बैंक मैनेजर्स को सीनियर डीपीओ ने बुलवाया होगा।
यूनियन बैंक के प्रकरणों में भुगतान:- रेलवे व बैंक के बीच एमओयू के तहत यूनियन बैंक से संबद्ध सैलेरी खातों पर कार्रवाई की गई है। इसमें दिवंगत दीपक परमार TCN इलेक्ट्रिकल विभाग व श्रीमती मीना जाजम OS – कार्मिक विभाग अन्य को 10 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। वहीं शुजालपुर के एसएसई सिग्नल दिवंगत गजेंद्र आर्य के परिजनों को एक करोड़ रुपए की क्लेम राशि प्राप्त हुई है।
यह है मामला:- रतलाम मंडल में रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए रेलवे सैलेरी पैकेज (RSP) योजना शुरू की गई। रेलवे प्रशासन और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच हुए समझौता (MOU) हुआ था। इसके तहत कर्मचारियों को वेतन खाते के साथ बीमा सुरक्षा का लाभ मिलना सुनिश्चित था। ताकि आकस्मिक परिस्थितियों में उनके परिवारों को आर्थिक लाभ से कुछ संबल मिल सके। लेकिन रतलाम मंडल में 6 कर्मचारियों की सामान्य मृत्यु के बाद भी उनके आश्रित परिवारों को लगभग 10 लाख रुपए तक की बीमित राशि का भुगतान नहीं किया गया। बैंक द्वारा तकनीकी और औपचारिक कारणों का हवाला देकर दावों को लंबित रखा गया या अस्वीकृत कर दिया गया। जिन मामलों में परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनमें स्व. सलीम अख्तर (TM-UJN), स्व. रामेश्वर बड़गुजर (SSE-LCC RTM), स्व. हरीश दान (TCN-LCC RTM), स्व. रोहित जैनवर (CBC-KUH), स्व. राकेश कौर (TCN) तथा स्व. देवदत्त (TM-DADN) सहित करीब 10 से 15 परिवार शामिल हैं। इन परिवारों के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं समय पर पूरी कर दी थीं। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

योजना को लेकर बैंकर्स के व्यू:- इधर, एसबीआई के बैंक अधिकारियों के नियमों का हवाला पृथक है। उनके मुताबिक रेलवे सैलेरी पैकेज (RSP) योजना से जुड़ी कुछ शर्ते (कंडीशन) है। इसमें कर्मचारियों को जीवित अवस्था में ही अपना सेवा से संबंधित डेटा बैंक शाखा को उपलब्ध कराना होता है। कर्मचारी के निधन के बाद डेटा उपलब्ध कराने पर इसका औचित्य नहीं है। इसके अभाव में तकनीकी पेंच के चलते भुगतान संभव नहीं है। हालांकि बैंकर्स द्वारा बैंक प्रबंधन के उच्च स्तरीय अधिकारियों तक मामले को संज्ञान में दिया गया है।
मामले में जिम्मेदारी कौन?:- बैंक स्किम के दौरान कई भुगतान शर्ते दबी-छुपी रहती है। वहीं इसे लेकर कर्मचारियों को मौखिक जानकारी नहीं दी जाती है। ऐसे में क्लेम के दौरान तकनीकी पेंच भुगतान के आड़े आता है। यदि रेलकर्मियों के सर्विस डेटा उपलब्ध कराने मामले में या तो उन्हें बैंक से जानकारी नही दी गई। या फिर बैंक प्रबंधन व रेलवे के संबंधित सेक्शन से काउंसलिंग नहीं की गई। गुरुवार को बैंक मैनेजर्स की बैठक में आगे से कर्मचारियों के अनिवार्य डेटा उपलब्ध कराने पर सहमति बनी।
