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दर्द हल्का है, सांस भारी है, जिए जाने की रस्म जारी है….मौत के पहले किए वादे, अब बिसराए, आंसू नहीं सूखा पा रहे परिजन

-6 मृत रेलकर्मियों के परिजन रेलवे सैलेरी पैकेज योजना में बीमा भुगतान को तरसे।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। ‘दर्द हल्का है, सांस भारी है, जिए जाने की रस्म जारी है,….शायर गुलज़ार की शायरी की ये पंक्तियां उस सरकारी सिस्टम की वादा खिलाफी बयां करने के लिए काफी है। जिनके मुखिया की मौत के बाद परिजनों को जीने के लिए उसी सिस्टम की रस्मों से गुजरने की पीड़ा सहना पड़ रही है।
यह बात रेलवे सैलेरी पैकेज योजना से जुड़ी है। इसके तहत बीमा राशि भुगतान के लिए मृतक के परिजनों को बैंक शाखाओं के चक्कर काटने का दुख भोगना पड़ रहा है।
दरअसल पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए रेलवे सैलेरी पैकेज (RSP) योजना शुरू की गई। अब यह गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। क्योंकि भुगतान के लिए परिजनों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।

रेलवे प्रशासन और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच समझौता (MOU) हुआ था। इसके तहत कर्मचारियों को वेतन खाते के साथ बीमा सुरक्षा का लाभ मिलना सुनिश्चित था। ताकि आकस्मिक परिस्थितियों में उनके परिवारों को आर्थिक लाभ से कुछ संबल मिल सके। लेकिन रतलाम मंडल में ऐसे मामलों ने इस व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। बल्कि पीड़ित परिवारों की पीड़ा और बढ़ा दी गई।
इस मामले में वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ, रतलाम मंडल ने डीआरएम अश्वनी शर्मा को पत्र भी लिखा। इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

आधा दर्जन पीड़ित परिजनों को लाभ का इंतज़ार:- मजदूर संघ के प्रतिनिधियों के मुताबिक रतलाम मंडल के 6 कर्मचारियों की सामान्य मृत्यु के बाद भी उनके आश्रित परिवारों को लगभग 10 लाख रुपए तक की बीमित राशि का भुगतान नहीं किया गया। बैंक द्वारा तकनीकी और औपचारिक कारणों का हवाला देकर दावों को लंबित रखा गया या अस्वीकृत कर दिया गया।

इन परिवारों की पीड़ा:- जिन मामलों में परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनमें स्व. सलीम अख्तर (TM-UJN), स्व. रामेश्वर बड़गुजर (SSE-LCC RTM), स्व. हरीश दान (TCN-LCC RTM), स्व. रोहित जैनवर (CBC-KUH), स्व. राकेश कौर (TCN) तथा स्व. देवदत्त (TM-DADN) के परिवार शामिल हैं। इन परिवारों के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं समय पर पूरी कर दी थीं। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इस मुद्दें को उठाने वाले मजदूर संघ के मैदानी प्रतिनिधियों का कहना है कि ये मामले न केवल MOU की मूल भावना के खिलाफ। बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ अन्याय है। योजना का (Railway Salary Package) उद्देश्य संकट की घड़ी में परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना था। लेकिन मौजूदा स्थिति में यही योजना पीड़ित परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
डीआरएम को भेजे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रभावित परिवार पहले ही अपने प्रियजन को खोने के गहरे दुख से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में आर्थिक सहायता उनके लिए राहत बन सकती थी, लेकिन भुगतान में देरी और अनिश्चितता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

प्रशासन से यह मांग की गई:-

-पूरे मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए।
-लंबित सभी मामलों का तत्काल निपटारा किया जाएं।
-भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय की जाएं।
मृतक कर्मचारियों के परिवारों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाएं।

यह उठाया बड़ा सवाल:- यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया। तब यह मामला कर्मचारियों के व्यापक असंतोष का कारण बन सकता है। अब रेलवे कर्मचारियों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है-जब कर्मचारी वर्षों तक बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। तब संकट की घड़ी में उनके परिवारों को उनका अधिकार क्यों नहीं मिलता? इस मामले में एसबीआई डीआरएम ब्रांच मैनेजर शाश्वत शर्मा से बात करना चाही। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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