जेसीस बैंक डायरेक्टर अर्पित जैन का चार्जेस काउंटर…बोले-नई बीमा पॉलिसी तो मजदूर संघ के बोर्ड के दौरान फाइनल की गई थी
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। WREU समर्थित बोर्ड जनवरी में बना है। फरवरी में पहली बोर्ड ऑफ डायरेक्टर मीटिंग के पश्चात WREU के बोर्ड ने कर्मचारियों के करोड़ों रुपयों से बनाई बीमा पॉलिसी एवं बीमा कंपनी को क्लैम भेजने शुरू किए। केवल 2 माह के भीतर लगभग 29 कर्मचारियों को बीमा कंपनी से लगभग 2 करोड़ रुपये का क्लैम दिलवाने का कार्य किया है l
यह बात WREU समर्थित जेसीस बैंक डायरेक्टर अर्पित जैन ने जारी विज्ञप्ति में कही।
उन्होंने कहा कि रतलाम मंडल के लगभग 12 से 13 केस बीमा कंपनी को भेजे गए है। यह लगभग 1 से डेढ़ करोड़ का क्लेम होगा। लगभग 40 लाख के आसपास की राशि कर्मचारियों के परिवारों को मिलेगी। यह राशि पहले नही मिलती थी।
दिन रात अपने परिवार को नजरअंदाज करते हुए अंशधारी साथियों एवं रेल कर्मचारियों के लिए काम कर रहे है। ये अंशधारकों के विश्वास का प्रतिफल है। यहां आरोप लगाने और कॉपी पेस्ट के साथ AI का उपयोग नही केवल यूनियन का सार्थक सहयोग एवं ईमानदार प्रयास है।
आरोपों के दलील में जैन बोले-झूठे और भ्रामक प्रचार से सावधान
-नई बीमा पॉलिसी मजदूर संघ के बोर्ड के दौरान फाइनल की गई थी।
-लगभग करोड़ों रुपये मजदूर संघ के बोर्ड द्वारा बीमा कंपनी को दिए गए ।
-प्रति 1 लाख पर 100 रुपये बढ़ाने का निर्णय मजदूर संघ के बोर्ड द्वारा BOD में फाइनल किया गया और उसे मिनट्स में लिया गया ।
-अंशधारी कर्मचारियों के करोड़ों रुपये आनन फानन बीमा कंपनी को दिए परंतु कोई भी निधन के केस को बीमा कंपनी को नहीं भेजा गया।
-जब मजदूर संघ के बोर्ड ने बीमा कंपनी को करोड़ों रुपये का भुगतान किया तब कर्मचारियों को क्यों सूचित नहीं किया गया।
-जब SRF के नाम पर 400 रुपये की राशि को बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया तो क्यों कर्मचारियों को सूचित नही किया।
-जब WRMS के बोर्ड ने नियम बनाया कि कम से कम 3 रिकवरी आने के बाद ही मृतक कर्मचारी के परिवार को पुरानी पालिसी के तहत क्लैम दिया जाएगा। ऐसी पॉलिसी क्यों बनाई जिससे लगभग 27 मृतक कर्मचारियों के परिवारों के लगभग 2 करोड़ रुपये फंसा दिए गए और भुगतान नहीं किया गया।
-WREU के बोर्ड द्वारा वन टाइम छूट प्रदान करते हुए अपनी पहली ही BOD के पश्चात 27 कर्मचारियों को 2 करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित कर लिया। ये काम संघ के बोर्ड ने क्यों नहीं किया।
-यदि 100 रुपये अतिरिक्त काटे जाने का निर्णय WREU के बोर्ड ने ही किया था तो उस बोर्ड में रतलाम के मजदूर संघ के डायरेक्टर सचिन मिश्रा सहित मजदूर संघ के कुल 7 डायरेक्टर थे। तब उन्होंने आपत्ति क्यों नहीं ली।
-बीमा पालिसी संबंधी सारे काम मजदूर संघ का पुराना बोर्ड करके गया जब मजदूर संघ ने क्यो कर्मचारियों को विश्वास में नही लिया।
-उज्जैन के दिवंगत स्टेशन मास्टर देवेन्द्र प्रधान (जो की मजदूर संघ से जुड़े थे) के परिवार को *WREU समर्थित बोर्ड ने लगभग 20 लाख रुपये की राशि प्रदान की। ये काम WRMS के बोर्ड ने क्यों नहीं किया था।
