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ख़ामोशी की हलचलों का एक साल…बनाई अपनी जगह, किया लोगों के दिलों पर राज

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे ट्रेंड यूनियनों में सेवा, सत्कार व सहयोग का संसार पृथक व विस्तृत है। इस संसार में अपनी ख़ास पहचान बनाना सिस्टम में बहुत मायने रखती है। ऐसी ही आज से एक वर्ष पूर्व सेवा प्रकल्प की दूसरी पारी प्रारंभ हुई। जिसने कई दिलों पर दस्तक दी। कई लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। कई उम्मीदों को पूरा किया। कई नए आयाम तय किए। भले ही सिस्टम में ट्रेड यूनियन में संगठन व पदों का बदलाव सालों से आम तौर पर देखा गया है। लेकिन दूसरी भूमिका में अपनी पहचान बनाना भी इस दौर में अहम है।


ट्रेड यूनियन में लंबा समय बिताने वाले नरेंद्र सिंह सोलंकी 1 वर्ष पूर्व आज ही के दिन वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन छोड़कर वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ में शामिल हुए थे। दूसरी पारी में यह ऐसा नाम हो गया है जो कई कर्मचारियों को फिर से अपने क़रीब लगने लगा है। क्योंकि इस खिलखिलाते चेहरे में कुटिलता, धोखा व फरेब या आक्रोश कोसों दूर तक नहीं दिखाई देता है। आज ही के दिन इन्होंने नए सफर की शुरूआत की थी। इस एक साल में भी इन्होंने कर्मचारियों के कई काम किए।

मूक बधिर कर्मचारी को दिलाया आशियाना:- नरेंद्र के नेचर की खासियत है कि वे किसी काम को अनदेखा नही करते। TCN-2, SSE RAC/TL में कार्यरत मूक बधिर गौतम दास खुद अपनी कहानी बताते है।
वे कहते हैं कि मेरे नाम पर रेलवे क्वार्टर 1663/B आबंटित हुआ था। लेकिन उस क्वार्टर पर पहले से कुछ अन्य लोगों द्वारा जबरदस्ती कब्जा किया था। मेरे नाम पर क्वार्टर होने के बावजूद मुझे अपने परिवार सहित काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मैं मूक-बधिर हूँ। न मैं बोल सकता हूँ और न सुन सकता हूँ। इसलिए मैंने अपनी समस्याएँ लिखित रूप से वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ को अवगत कराईं।

जब क्वार्टर मेरे नाम पर आबंटित हुआ। तब मैंने वहां रह रहे लोगों से गुहार लगाई। परंतु वे खाली करने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद मैंने अपने भाइयों एवं साथियों के माध्यम से अपनी समस्या पहुंचाई।
सहायक मंडल मंत्री भाई नरेन्द्र सोलंकी के साथ युवा अध्यक्ष अशोक टंडन, महिला अध्यक्ष रंजीता वैष्णव तथा इमरान ने मेरी समस्या को गंभीरता से समझा। इन्होंने पूरा सहयोग दिया। मेरा क्वार्टर शीघ्र खाली करवाया गया।

धार्मिक कामों में अग्रणी:- इधर, नरेंद्र धार्मिक कामों में भी अग्रणी रहे है। वे रेलवे महू रोड कॉलोनी में महाआरती आयोजित करते आए। बल्कि शहर के सार्वजनिक मंदिर, क्षत्रीय समाज के अलावा अन्य सामाजिक कामों में आर्थिक मदद के लिए भी पीछे नहीं रहते।

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