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भागवत कथा का तृतीय दिवस…..महिलाओं को वाइफ नहीं श्रीमती बनाना चाहिए, जिनकी वाइफ होती है, मान लो उनकी लाइफ डिस्टर्ब

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। भागवत प्रेमी को भागवत भाव से ओत प्रोत होना चाहिए। जिनका जीवन भागवत से प्रेरित रहता है, उनके यहां की संतानें भी प्रभु प्रेमी होती है। पति-पत्नी संस्कारी हो तो उनके बच्चे भी संस्कारी होते है। इसलिए युवा अवस्था में अपने तप के प्रभाव से जीवन यापन कर जो संतान पैदा होती है वह संतान भी दिव्य होती है। भक्त प्रहलाद जैसा बालक ही जीवन का उद्धार कर सकता है। महिलाओं को वाइफ नहीं श्रीमती बनाना चाहिए। जिनकी वाइफ होती है उनकी लाइफ डिस्टर्ब होती हे। पत्नी को अपने पति का अन्तर्यामी होना चाहिए जो पति के मन की बात बिना बताए ही जान जाए।

यह बात रामसनेही संत हरिराम महाराज ने सवारियां मंदिर के पीछे करमदी रोड पर सात दिवसीय दिव्य भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को कथा श्रवण कराते व्यक्त किए।

संत श्री ने कपिल ऋषि की कथा श्रवण कराते हुवे कहा कि भगवान कपिल मुनि जो सांख्य दर्शन के प्रवर्तक और भगवान विष्णु के पंचम अवतार माने जाते हैं। कर्दम ऋषि और देवहूति के पुत्र थे। माता देवहूति की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया था कि वे स्वयं उनके गर्भ से अवतार लेंगे। जिसके बाद कपिल मुनि का जन्म हुआ। ऋषि कर्दम और देवहूति की नौ पुत्रियां थीं। देवहूति ने भगवान विष्णु के समान पुत्र की कामना की थी। जिसके बाद कपिल मुनि का जन्म हुआ। इनके अवतार की महत्ता ब्रह्मा जी ने स्वयं कर्दम ऋषि को बताया था कि भगवान विष्णु स्वयं सांख्यशास्त्र का उपदेश देने के लिए उनके पुत्र के रूप में अवतरित होंगे। जब कपिल मुनि का जन्म हुआ, तो आकाश से पुष्पों की वर्षा हुई और चारों ओर आनंद छा गया। बाद में, कपिल मुनि ने अपनी माता देवहूति को सांख्य दर्शन की शिक्षा दी, जिससे उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। कपिल मुनि को “आदिसिद्ध” कहा जाता है, क्योंकि वे जन्म से ही योग और सिद्धियों से युक्त थे।

कथा में खाचरौद रामद्वारा के बाल योगी संत श्री तोलाराम जी महाराज ओर रतलाम के दंडी स्वामी मठ के संत श्री आत्मानंद सरस्वती महाराज स्वामी ने भी आशीर्वचन दिया। साथ ही गुरुकुल के छात्र भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि यह कथा खाचरोद गुरुकुल के बच्चों की सहायतार्थ है। इसी प्रकल्प में कथा के दौरान एक महिला ने 5000 की राशि एवं एक महिला ने 5100की राशि संत श्री को भेट की। साथ ही वाघेला जीवदया समिति के दिनेश वाघेला ने 5100 खाचरोद के महेश शर्मा ने 5100 संजय सोनी ने 5100 के साथ साथ जगदीश माली की स्मृति मे उनके पुत्र प्रकाश परिहार द्वारा 11000 की राशि गुरुकुल को समर्पित की।

कथा में धर्मनिष्ठ महिला बहन राजकुमारी अग्रवाल वाघेला जीवदया समिति के दिनेश वघेला बाबूलाल सिसोदिया खाचरोद के बद्रीलाल पोरवाल गोपाल परिहार चंद्रप्रकाश गोपाल पटेल पूर्व पार्षद वंदना अनिल पुरोहित ने भी पोथीपूजन कर धर्म लाभ लिया।

शाम को भगवान पुराण की आरती संपन्न हुई। जिसमें मुख्य आयोजक चेतन पटेल, कन्हैयालाल पटेल, अनूप स्वामी सत्यनाराय पटेल झूमर पटेल शांतिबाई सांकला, प्रकाश परमार, तुलसी पटेल, रिना पटेल, तेजपाल, मुकेश शर्मा, मुकेश स्वामी, आशीष सोनी, सत्यनारायण भूतिया, संदीप पोरवाल, कुलदीप सोलंकी,आदि ने आरती का लाभ लिया।

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