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ऐसे पहुंचा दिया जाएगा फर्म विशेष को लाभ?….टेंडर की शर्तें एवं एस्टीमेट गोलमाल, रेलवे कमर्शियल डिपार्टमेंट का कमाल

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे के विभागों में यदि किसी ठेकेदार फर्म को लाभ पहुंचाना हो तो, नियमों के इर्द-गिर्द इसके रास्ते निकाल लिए जाते है। ऐसा एक ताज़ा उदाहरण रतलाम रेल मंडल के कमर्शियल डिपार्टमेंट में सामने आया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि टिकिट चेकिंग स्टाफ के रनिंग रूम में खानपान के लिए पिछले दिनों टेंडर जारी किए गए। इसमें सामान्य ठेकेदारों को वंचित करने के लिहाज़ से एक करोड़ रुपए अधिक में टेंडर जारी किया गया। इससे रेलवे को दो साल की टेंडर अवधि में राजस्व का नुकसान तथा फर्म को लाभ पहुंचना तय है। छोटी तमाम फर्मो को प्रतिस्पर्धा से लगभग बाहर कर दिया गया।
बताया जा रहा कि पिछले दो साल के टेंडर में सब्सिडाइज्ड मिल्स का मासिक टोकन के मान से भुगतान किया गया है। वह रनिंग रूम में जितना चेकिंग स्टाफ ठहरते हैं। उसके मान से खानपान के टेंडर में अधिकतम 5000 टोकन की खपत निकलती आई है। अब नए टेंडर में एक करोड़ रुपए अधिक एस्टीमेट के मान से 10, 0000 टोकन का निर्धारण कर टेंडर निकाला गया। बड़ी बात है कि वहीं पिछले दो साल की तरह ही यदि टोकन खपत रहेगी। तो जिस ठेकेदार फर्म को टेंडर दिया जाएगा, उसका मिल्स खर्च कम उठाना पड़ेगा। इससे फर्म को सीधा लाभ मिलेगा।

दो साल से कोटेशन पर काम, अब निकाला टेंडर:- रतलाम में टिकिट चेकिंग स्टाफ रनिंग रूम में रेलवे दो साल से कोटेशन पर सब्सिडाइज्ड मिल्स का काम करवा रही थी। इस दौरान अधिकतम 5000 टोकन मासिक के मान से निर्धारित राशि के मान से भुगतान किया गया। रेलवे द्वारा अब जाकर स्थाई तौर पर दो साल के लिए टेंडर जारी किया गया। लेकिन इसमें आरोप लग रहे हैं कि कमर्शियल विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अनियमितता की गई। टेंडर डल गए है तथा एक सप्ताह में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। मामले की तह में जाकर इससे जुड़े तथ्यात्मक बिंदुओं के साथ सिलसिलेवार खबर के माध्यम से अनियमितता उज़ागर की जाती रहेगी।

इस तरह की गई अनियमितता?

– सब्सिडाइज्ड मिल्स टेंडर के एस्टीमेट में सब्सिडाइज्ड मिल्स की मात्रा 66 रुपए प्रति टोकन भुगतान का निर्धारण किया गया। दो वर्ष के लिए 246622.20 X 66 रु.प्रति टोकन= 16277065.20 रूपए दी गई है।
– तकनीकी रूप से टेंडर साईट की विजिट करने पर पिछले रनिंग कॉन्ट्रैक्ट में उपभोग होने वाली मिल्स की मात्रा की जानकारी ली गई।
-तब पता चला कि मात्रा 132000.00 से ज्यादा नहीं आ रही है। ये भी 10% बढ़ाकर बताई गई।
– इनके हिसाब से उक्त कार्य की मात्रा 132000.00 X 66 रु.प्रति टोकन =8712000 रुपए ही होती है।
– यानी के वाणिज्य विभाग द्वारा उक्त कार्य को सीधे तौर पर लगभग एक करोड़ रूपए बढ़ा कर निकाला गया है।
– इससे सीधे-सीधे कई छोटी फर्म व कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से वंचित करने का एक षड्यंत्र रच दिया गया।
-ऐसी अनियमितता के चलते आगामी दो वर्ष के टेंडर में ये मात्रा 85% बढ़ाकर टेंडर करवाया जा रहा है। मामले में विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन टेंडर प्रकिया में सभी शर्ते ऑनलाइन है। नियमों के दायरे में यह प्रकिया की जा रही है।

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