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विवादों से रहा नाता…1.68 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में आरोपी रेलवे कांट्रेक्टर संजय जैन के पारिवारिक कलह के साथ अन्य कांट्रेक्टर से हुए विवाद

-धोखाधड़ी केस में रेलवे कांट्रेक्टर संजय के साथ माता-पिता, तत्कालीन उपपंजीयक प्रदीप भी आरोपी।

न्यूज़ जंक्शन-18

रतलाम। फर्जी दस्तावेज बनाकर 1.68 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले रेलवे कांट्रेक्टर संजय जैन का विवादों से पुराना नाता रहा है। परिवारिक कलह के अलावा रेलवे से जुड़े अन्य कांट्रेक्टर से भी विवाद हो चुके है। हालांकि धोखाधड़ी मामले में रेलवे कांट्रेक्टर जैन की अब जाकर मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सबूतों की जांच करने पर बैंक लोन लेने के लिए उपयोग किए गए दस्तावेज कूटरचित पाए गए हैं। इसके बाद स्टेशन रोड थाना पुलिस ने स्वस्तिक इंटरप्राइजेस के पूर्व भागीदार एवं इंटरप्राइजेस के साझेदार संजय के साथ उनके पिता मणीलाल जैन, माता मनोरमा जैन और तात्कालिक उपपंजीयक प्रदीप निगम का नाम भी एफआईआर में दर्ज कर आरोपी बना लिया है। इन तीनों ने धोखाधड़ी में कहीं न कहीं सहयोग किया था। अब पुलिस इनकी गिरफ्तारी की तैयारी में जुट गई है।

सुभाष जैन ने कराई थी एफआईआर:- रेलवे कांट्रेक्टर संजय जैन का यह मामला 2024 का है। इन्हीं के रिश्तेदार नीमचौक निवासी सुभाष जैन ने जैन कॉलोनी निवासी संजय जैन के खिलाफ 1.68 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।

दरअसल इस मामले में इनके माता-पिता मणीलाल व मनोरमा जैन स्वस्तिक इंटरप्राइजेस के पार्टनर है। हाईकोर्ट पेश किए समझौते और मकान को भारमुक्त करने के लिए लगाए गए तमाम दस्तावेजों में इनके भी हस्ताक्षर है। इसलिए इनकी लिप्तता उजागर हुई है। वहीं तत्कालीन उपपंजीयक प्रदीप निगम द्वारा मनोरमा जैन और सुभाष जैन के बीच रजिस्टर्ड एग्रीमेंट को पद का दुरुपयोग करते हुए बिना सुभाष जैन की सहमति एक पक्षीय तरीके से निरस्त कर दिया। इसलिए इन्हें भी आरोपी बनाया गया है।

वर्ष 2012 का यह है पूरा मामला:- यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में झूठे एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म स्वस्तिक इंटरप्राइजेस के नाम से अन्य साझेदारों की बिना जानकारी के फर्जी एकाउंट खुलवाकर गबन करने पर सुभाष जैन ने संजय जैन के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाया था। तब संजय कुछ दिनों के लिए भूमिगत हो गए थे। प्रकरण न्यायालय में चल रहा है। बाद में संजय और फरियादी सुभाष जैन के बीच समझौता हुआ था। इसमें तय हुआ कि जैसे-जैसे रुपए आते जाएंगे, चेक वापस होते जाएंगे। साथ ही संजय की मां की मालिकी का जैन कॉलोनी स्थित मकान बेचने का अनुबंध 25 अक्टूबर 2012 को सुभाष जैन के साथ किया गया। हाई कोर्ट इंदौर में पेश समझौते में स्पष्ट अंकित था कि चेक बाउंस होने पर 30 सितंबर 2013 को मकान की रजिस्ट्री सुभाष जैन के नाम करवा दी जाएगी। बावजूद जून 2013 को संजय ने मकान गिरवी रखकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र से तथा मां मनोरमा ने अपनी फर्म स्वस्तिक के नाम पर 60 लाख का लोन और श्री इंटरप्राइजेस के नाम पर 50 लाख का लोन ले लिया। बात तब बिगड़ी, जब संजय ने सुभाष जैन की सहमति के बिना तत्कालीन उपपंजीयक निगम के साथ मिलीभगत करके मकान को भारमुक्त भी करवा लिया।

पूर्व में रेलवे कांट्रेक्टर के साथ हुए विवाद- रेलवे कांट्रेक्टर संजय जैन के अन्य कांट्रेक्टर के साथ भी विवाद रहे है। दरअसल पूर्व में जैन का ऑफिस रेलवे स्टेशन के सटे पुराने मालगोदाम परिसर में था। वही अन्य रेलवे कांट्रेक्टर अंकित का काम चल रहा था। आरोप लगा था कि संजय ने अपना चारपहिया वाहन ठेकेदार अंकित के मटेरियल व मशीनों पर चढ़ा दिया था। विवाद के बाद मामला जीआरपी तक पहुंचा था।

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