ठंड में ही दिमाग गरम कर रहे Ac….फ़ाइलों की डस्ट में दबी कूलिंग, प्रस्ताव का स्विच दबाकर बैठे रेल अफ़सर
-लक्झरी वॉशरूम की पसंदीदा टाइल्स के चक्कर में महिला शौचालय भी अटकाया।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। भले ही रतलाम रेल मंडल में इंफ्रास्ट्रक्चर सहित डेवलपमेंट के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है। लेकिन रेलवे कर्मचारियों को अपने कामकाजी समय की सुविधाओं के लिए परेशानी झेलना पड़ रही है। कई मामलों में रेल संगठनों ने इन सुविधाओं को अपने एजेंडे में शामिल कर मिटिंगों में इसे उठाया भी। बावजूद अफसरों ने इनसे जुड़े ऑर्डर की फाइलों में दबा दिया है। मार्च आने वाला है। गर्मी का मौसम भी फरवरी एंड तक दस्तक दे देगा। पिछली सीजन से Ac की ठंडक का इंतज़ार कर रहे कर्मचारियों का दिमाग़ अभी से गरम होने लगा है। क्योंकि इसकी मांग महीनों से की जा रही है। हालांकि मामले में वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के मंडल मंत्री मनोहर बारठ का कहना है कि डीआरएम अश्वनी कुमार ने इसे लेकर आश्वासन दिया है।
लेकिन आम कर्मचारियों की माने तो कई मामलों में अफसरों की मनमानी बरक़रार है। ऐसे में अब विरोध के लिए संगठन भी मुखर होने की तैयारियों में जुटने लगे है।
कर्मचारी द्वारा इन मामलों की आम चर्चा :-
-डीजल शेड में महिला रेल कर्मचारियों के बन रहे शौचालय के काम को अधिकारी द्वारा इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोक दिया। यह सिर्फ इसलिए कि अधिकारी को उनके वॉशरूम में लगने वाली टाइल्स पसंद नहीं आ रही है। महिलाओं की समस्या का उक्त अधिकारी को कुछ लेना देना नहीं। जबकि रेलवे बोर्ड की इस संबंध में सख़्त गाइडलाइन है कि महिलाओं के लिए पृथक से शौचालय इंतजाम को प्राथमिकता से पूरा करें।
– मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय की दूसरी मंजिल पर लगने वाले Ac की फाइल मंडल कार्यालय के एक अधिकारी काफी समय से दबाकर बैठे हुए है। अभी तक सुगबुगाहट तक नहीं है। आशंका है कि मार्च माह के पूर्व Ac लग पाएंगे या नहीं।
– मंडल कार्यालय में हठी अधिकारी द्वारा दिसंबर में होने वाले प्रमोशन ऑर्डर को रोककर चहेतों को फायदा पहुंचाने की भरपूर कोशिश की गई। परंतु दोनों संगठन द्वारा दवाब डाला गया। तब जनवरी माह में वहीं आदेश बिना संशोधन के जारी कर दिए गए। सवाल है कि जिन कर्मचारियों को आजीवन पदोन्नति इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिल पाएगा, उनके लिए डीआरएम क्या करेंगे।
– सुविधा के लिहाज से रतलाम मंडल का मालवा रेस्ट हाउस कुछ रेल अधिकारियों के लिए मनोरंजन का स्थल बन गया है। एक रेल अधिकारी ने इसे स्थाई निवास मान लिया। शाम के बाद वहां कुछ साथी अधिकारी मिलकर रोज महफिल जमाते है। इनको देखने या रोकने वाला कोई नहीं है। जल्दी ही वीडियो भी सामने आएगा।
– वर्तमान में एक महिला रेल कर्मचारी द्वारा अपने बच्चे की देखभाल के लिए मिलने वाली छुट्टी के लिए आवेदन किया था। वो भी एक वरिष्ठ महिला रेल अधिकारी द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया।
– मंडल में हर विभाग में चाटूकारिता का बोलबाला है। कई वर्षों से संवेदनशील पोस्ट पर कार्य कर रहे है। विजिलेंस विभाग द्वारा हस्तक्षेप करने के बावजूद इन्हें इनके मूल पद से हटाया नहीं गया है। उल्टा इन्हें विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से नवाज़ा भी जा रहा है। इंजीनियरिंग विभाग में टेंडर टेबल पर एसएसई (ट्रेक) दीपक जोशी लंबे समय से कार्यरत है। अन्य कर्मचारियों को भी तमाम सुविधाएं दी जा रही है।
