मेडिकल कॉलेज की बदइंतजामी….सैकड़ों मरीजों के उपचार के दावों वाला सिस्टम खुद बीमार, शुद्ध पानी के लिए तरस रहे विद्यार्थी, केंटीन व्यवस्था बदहाल
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम सहित कई जिलों के मरीजों के उपचार सहित स्टाफ व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपए सालाना बजट खर्च वाला डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज पिछले दो वर्षों से खुद बीमार होने लगा है। हालात यह है कि स्टाफ सहित मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी रोज जूझना पड़ रहा है।
यहां व्याप्त जल संकट ने संस्थान की गंभीर प्रशासनिक विफलता व बेहतर इंतजामों के दावों की पोल खोल दी है। कॉलेज के बॉयज़ हॉस्टल, गर्ल्स हॉस्टल, पीजी हॉस्टल या अकादमिक ब्लॉक…। इनमें से किसी भी सेक्शन में स्वच्छ पेयजल का एक भी भरोसेमंद इंतजाम नहीं है। 900 से अधिक एमबीबीएस छात्र, लगभग 100 स्नातकोत्तर छात्र तथा परिसर में निवास करने वाले रेज़िडेंट्स इस संकट से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं।
समस्या को लेकर कॉलेज के विद्यार्थी मुखर होने लगे है। छात्रों के अनुसार कॉलेज परिसर में स्थापित वाटर कूलर पिछले दो वर्षों से अधिकांशतः अनुपयोगी रहता है। पानी की आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। मजबूरन बाहर से पानी मंगवाया जा रहा। लेकिन यह भी गुणवत्ताहीन होने से इसका उपयोग सेहत से खिलवाड़ मान सकते है।
डीन का असंवेदनशील व्यवहार:- नाम नही प्रकाशित करने की शर्त पर छात्र बताते है कि प्रबंधन का समस्याओं पर कोई वास्ता नही है। मामले में प्रशासन व डीन को कई बार अवगत कराया गया। बावजूद अब तक कोई स्थायी या ठोस समाधान नहीं किया गया। यह स्थिति डीन की स्पष्ट नाकामयाबी, लापरवाही और उनका गैर-जिम्मेदार रवैया माना जा रहा है।
भय के माहौल में विद्यार्थी:-मेडिकल कॉलेज की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि भयवश छात्र अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को लेकर भी खुलकर बोलने में असमर्थ हैं। डीन के विरुद्ध आवाज़ उठाने में कार्रवाई का भय है। छात्र प्रतिनिधित्व, संवाद और शिकायत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया तक लगभग दबा दी गई है। डर के इस माहौल में छात्रों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े मुद्दे भी अनसुने किए जा रहे हैं।

इधर, अस्पताल की कैंटीन सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। छात्रों और रेज़िडेंट्स के अनुसार, कॉलेज कैंटीन की गुणवत्ता जुलाई 2024 के बाद से लगातार गिरती चली गई है। भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। गंभीर तथ्य यह है कि कैंटीन के किचन के ठीक पास एक खुली सीवर लाइन बह रही है। जिसमें लगातार लीकेज हो रहा है। मक्खियों और गंदगी फैलने से संक्रामक रोग फैलाने का ख़तरा है। बावजूद, डीन और प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई न कर उदासीनता बरती जा रही है।
कॉलेज में अध्ययनरत अनेक छात्र ग्रामीण, आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। पहले से ही महँगी चिकित्सा शिक्षा, भोजन और पानी की बढ़ती लागत का बोझ उठा रहे है।
इनका यह कहना
मामले में कॉलेज डीन अनिता मूथा का कहना है कि विद्यार्थियों के रेसिडेंस परिसर में आरओ लगा है। कुछ विद्यार्थी बाहर से पानी मर्जी से मंगवाते है। स्टाफ केंटीन की सीवरेज लाइन एक बार साफ करवा दी जे। एक बार फिर नगर निगम कमिश्नर को फ़ोन के समस्या निदान करवा देंगे।
