न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस में विजिलेंस टीम द्वारा जांच के दौरान इनकी तीन टीटीई से गहमागहमी के बाद झूमाझटकी के मामले में विजिलेंस ने रिपोर्ट तैयार की है। सोमवार तक मामले में तीनों टीटीई से विभागीय पूछताछ व प्रारंभिक कार्रवाई की संभावना है। अधिकारिक सूत्रों में मुताबिक चेकिंग कर्मचारी की पहली गलती जांच के सहयोग न करना माना जा रहा है। इसी एंगल को आधार मानकर संबंधित सभी टीटीई से पूछताछ की जाएगी।
मालूम हो कि गुरुवार रात ट्रेन संख्या 14801 जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस में विजिलेंस इंस्पेक्टर अपने नियमित शेड्यूल के मुताबिक टीटीई स्टाफ की चेकिंग के लिए कोच में आए थे। विजिलेंस इंस्पेक्टर दिलीप जाधव व विनीत जैन ने कोच में टीटीई (सीटीआई) एमआर सिलावट, कृष्णा व मुनीश मीणा से पूछताछ कर केश की जांच करना चाही। लेकिन टीटीई मुनीश मीणा सहित दो अन्य ने सहयोग करने से साफ इंकार कर दिया। तीखी बहस के बाद विजिलेंस इंस्पेक्टर और टीटीई के बीच झूमाझटकी शुरू हो गई। बात बढ़ने पर विजिलेंस इंस्पेक्टर ने तीनों टीटीई को रतलाम नहीं उतरने दिया तथा तीनों को इंदौर ले गए। वहां पूछताछ कर लिखित प्रकरण तैयार किया गया। बताया जा रहा कि जांच में मिलान करने पर टीटीई कृष्णा के पास राशि कम निकली थी।
मामले में विजिलेंस इंस्पेक्टर ने अपनी ओर से रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह जोन मुख्यालय के माध्यम से रतलाम मंडल कार्यालय भेजी जाएगी। इधर, शनिवार व रविवार को साप्ताहिक अवकाश के चलते कार्यालयीन प्रकिया नहीं हो सकी। संभवतः सोमवार को टीटीई तलब किए जा सकते है।
इस मामले में शामिल एक सीटीआई पर पूर्व में भी विजिलेंस केस बन चुका है। साथ ही ट्रेन में इसी टीटीई द्वारा दाहोद सीएमआई से मारपीट की घटना को भी अंजाम दिया था।
नॉन कोऑपरेशन का मामला गंभीर:- रेलवे में नॉन कोऑपरेशन यानी विभागीय या अधिकृत एजेंसी द्वारा जांच व पूछताछ में सहयोग ना करना कार्रवाई के दायरे में माना जाता है। प्रशासनिक कामकाज में सहयोग न करने जैसे कई मामलों में संबंधित चेकिंग कर्मचारी पर अंतरमंडलीय तबादलों तज की गाज गिरी है। लेकिन पिछले कुछ मामलों में प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई न होने से नॉन कोऑपरेशन के मामले बढ़ते जा रहे है। कुछ माह पूर्व सीटीआई स्लीपर मोहन जोशी व डिप्टी सीटीआई विजेंद्र बैरवा के बीच विवाद भी नॉन कोऑपरेशन से जुड़ा था। विभाग द्वारा कार्रवाई न किए जाने से नौबत मारपीट तक जा पहुंची थी। यही वजह है कि गुरुवार को एक और मामला सामने आया कि विजिलेंस को जांच में सहयोग नही किया गया।
