यह भी नाटकीय पटाक्षेप…दुष्कर्म मामले से जुड़े अज़हर खान ने असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा दी थी, अब क्वालीफाई सूची में नाम
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। महिला के साथ रैप के मामले से जुड़े नाहरपुरा निवासी रेलवे ट्रैकमैन अजहर खान पिता अफ़ज़ल खान को रेलवे के बेहूदा सिस्टम व नाकारा अफसरों ने एक और सौगात दी दी। विभाग से अज़हर को गंभीर मामले के बावजूद एक भी चार्जशीट जारी नहीं की थी। बल्कि ज्वाइन कराकर असिस्टेंट लोको पायलट की विभागीय परीक्षा देने के रास्ते साफ कर दिए थे। परीक्षा की बुधवार को अर्हता सूची जारी की गई। इसमें इसका नाम दर्ज है। यानी वह इस परीक्षा में क्वालीफाई हो गया है।
बता दें कि अजहर के खिलाफ स्टेशन रोड पुलिस थाना में दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज हुआ था। दो से तीन माह की अनुपस्थिति के बाद ट्रैकमैन ने एक दिन के लिए रेलवे के इंजीनियर विभाग में ज्वाइन होने आया था। 21 सितंबर 2025 को असिस्टेंट लोको पायलट की विभागीय परीक्षा में शामिल हुआ। एक दिन बाद ही वह सिक पर चला गया था। इस मामले में हैरत की बात है कि रेलवे रिकॉर्ड में इसे केवल अनुपस्थिति माना लिया गया। रेलवे के जिम्मेदारों को यह भी पता नहीं कि उनके अधीनस्थ किसी कर्मचारी पर डीआरएम ऑफिस से महज आधा किलोमीटर दूर पुलिस थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज है। हालांकि आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने की बात सामने आई। लेकिन प्रकरण दर्ज होने के बाद से रेलवे ट्रैकमैन अजहर पेश नहीं हुआ है। नहीं उसके बयान हुए थे।
आपको यह भी बता दें कि रेलवे ट्रैकमैन अजहर मूलतः रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियरिंग पीवे (नॉर्थ) के अधीन कार्यरत है। इसे डीआरएम ऑफिस के ड्राइंग सेक्शन में नियुक्त कर रखा था। आरोपी अजहर खान को लेकर महिला के परिजनों की सूचना पर स्टेशन रोड पुलिस थाना में 30 जून को प्रकरण दर्ज किया था। इसी मामले को लेकर उसके साथ डीआरएम ऑफिस के बाहर मारपीट भी हुई। दूसरी ओर इसे फीट देने के बाद डीआरएम ऑफिस आया था। वहां से इसे सीनियर सेक्शन इंजीनियरिंग पीवे (नॉर्थ) के अधीन काम करने भेज दिया था। लेकिन काम करने में अक्षम होने से दोबारा छुट्टी चला गया था।
सूची में 348 नंबर पर नाम दर्ज:- इसे विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत कह सकते है कि जिस तरह से प्लान तैयार किया गया। इसके मुताबिक उसमें सफल हुए है। क्योंकि पूरे मामले में नोटिस या चार्जशीट नहीं दी गई।
मामले में न्यूज जंक्शन द्वारा पूर्व की खबर में आशंका जता दी थी कि जिस तरह से परीक्षा दिलवाई गई। उसी तरह से कर्मचारी परीक्षा में उत्तीर्ण भी हो जाएगा। बताया जा रहा है कि एलडीसीई रैंकर के तहत असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा का रिजल्ट आ गया। इसमें अजहर का नाम 348 नंबर पर दर्ज है। बड़ी बात है कि जिस समय इस कर्मचारी ने परीक्षा दी, उस दौरान दोनों हाथ में मेडिकल पट्टा बंधा हुआ था। ऐसे में परीक्षा उत्तीर्ण करने के पीछे कई सवाल उठ रहे है।
यह था पूरा मामला:- पीड़िता ने घटना में पुलिस को शिकायत में बताया था कि वह संजीवनी अस्पताल में सपोर्ट स्टाफ नर्स के पद पर पदस्थ थी। कोविड की ड्यूटी के समय से आरोपी को पहचानती थी। आरोपी क्लीनिक पर आया और उसे बोलने लगा कि उसे कुछ बात करनी है। उसे क्लीनिक के अंदर वाले कमरे में ले गया और उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया था। शिकायत के आधार पर अजहर के खिलाफ स्टेशन रोड पुलिस थाना पर दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज किया गया था। हालांकि उस दौरान रतलाम में अपर लोक अभियोजक सतीश त्रिपाठी के तर्कों को सुनकर अपर सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर ने आरोपी अजहर खान के अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट से इसे जमानत मिलने की बाद सामने आई थी।
इसलिए भी उठ रहे सवाल
– मीडिया की सुर्खियों में रहने के बाद भी विभाग के अधिकारियों को अपने ही विभाग के कर्मचारी के दुष्कर्म के प्रकरण की ढाई माह तक जानकारी न लगना संदेहात्मक है।
-कोई कर्मचारी लंबे समय तक बीमार अवस्था में अनुपस्थित रहे। इस पर वह मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर सूचना देता है। यदि ट्रैकमैन ने सूचना भी दी तो अफसरों ने गंभीर चोंट के बारे में पड़ताल क्यों नहीं करवाई।
-डीआरएम ऑफिस के ठीक नजदीक ट्रैकमैन के साथ दुष्कर्म मामले को लेकर मारपीट हुई। इसकी जानकारी कार्यालय के लगभग सभी कर्मचारियों को हुई। फिर भी अफ़सर इसे लेकर अनजान क्यों बने रहे।
-ट्रैकमैन पर दुष्कर्म जैसे आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद इसे इंजीनियरिंग विभाग द्वारा नोटिस जारी नहीं किया। इससे लिखवा लिया गया कि उसके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला नहीं है।
