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विन्रम श्रंद्धाजलि… अख़बारी ख़बर की सुर्खियों जैसा रहा व्यक्तित्व, घेवर की तरह उलझी रही जिंदगी

-ताउम्र साइकिल पर नगर भ्रमण कर अखबार वेंडर का काम करने वाले मणिलाल नहीं रहे।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। दशकों तक अखबारी वेंडर तथा अपने तल्ख़ आंदाज के लिए शहरभर में पहचाने जाने वाले मणिलाल जैन अब दुनिया में नहीं रहे। अख़बार व पत्रिका के व्यवसाय से जुड़े मणिलाल का व्यक्तित्व भी खबर की सुर्खियों की तरह रहा है। वहीं घेवर की तरह उलझन भरी जिंदगी रही। ये संज्ञान में नहीं कि इन्हें उपनाम क्यों दिया गया। लेकिन आम लोग इन्हें इसी घेवर के नाम से भी जानते थे।
बता दें कि 70-80 के दशक के दौर में फ्रंट पेज की खबर के हेडिंग को बोलकर अखबार बेचना आम वेंडर का क्रेज था। इसी पंच हेडिंग से अखबार बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित बाज़ार व चौराहों पर बिका करते थे। उस दौर में मणिलाल लगभग इसी तर्ज पर अखाबर बेचा करते थे। बदलते डिजिटल दौर में खबरें पूरी तरह स्क्रीन व सोशल मीडिया के रूप में सिमट गई। ऐसे में वेंडर्स की वह कला भी लुप्त होकर जाती रही। परिस्थितिवश मणिलाल की मानसिक परेशानी भी बढ़ी। कुछ सालों से ये अपनी तुनकमिजाजी के लिए शहरभर में चर्चित होने लगे। इनके इसी अंदाज से शहर का हर शख्स इन्हें पहचानने लगा।
यहीं वजह है कि सोमवार को इनके निधन की सूचना शहरभर में फैली गई। बल्कि चौराहों पर हर जुबान पर इनकी चर्चा थी। रामगढ़ स्थित निवास से शवयात्रा त्रिवेणी मुक्तिधाम ले जाई गई। वहां अंतिम संस्कार किया गया।

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